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Barabanki News: जवान बेटे को कंधा देते ही फफक पड़े लाचार पिता
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:48 AM IST
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बाराबंकी। लखनऊ के अलीगंज में संचालित कोचिंग सेंटर में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड में असमय काल के गाल में समाए अम्मार की अंतिम विदाई में भीड़ उमड़ पड़ी। अम्मार के जनाजे को पिता मंसूर आलम कंधा देते वक्त फफक पड़े। नवंबर में अम्मार और उसकी बहन की शादी तय थी।
पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मंगलवार को अम्मार का शव शहर के लखपेड़ाबाग स्थित आवास पर पहुंचा तो कोहराम मच गया। मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पैतृक गांव के कब्रिस्तान में नम आंखों और भारी गम के बीच अम्मार को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे में शामिल हर शख्स की जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी कि ईश्वर परिवार को दुख सहने की शक्ति दे।
1:45 बजे हुई थी बात
दोस्त फैज अहमद खान ने बताया कि अम्मार उनका इकलौता मित्र था। फैज के मुताबिक, अम्मार हेड हॉपर ग्राफिक डिजाइन कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर दो साल से नौकरी करता था। रविवार को उसकी आखिरी बार अपने दोस्त से मुलाकात हुई थी। सोमवार को फैज को लखनऊ से कोई सामान मंगाना था, इसलिए दोपहर 1:45 बजे उसने अम्मार से बात की थी। उसे क्या पता था कि अपने दोस्त से ये उसकी आखिरी बातचीत होगी।
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नवंबर में होना था भाई-बहन का निकाह
पिता मंसूर आलम ने बताया कि नवंबर में अम्मार व उसकी बहन का निकाह भी तय था। उसी की तैयारी में परिवार लगा था। इस हादसे में सबकुछ छिन गया। अम्मार के पिता की कुरौली में वेल्डिंग की दुकान है।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार स्तब्ध
मोहल्ला काजीपुर निवासी 21 वर्षीय शहजान तीन बहनों में अकेले भाई थे। उनकी असमय मौत से पूरा परिवार स्तब्ध है। शहजान भी हेड हॉपर ग्राफिक डिजाइन कंपनी में ग्राफिक डिजाइन का एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स कर रहे थे। मंगलवार को शहजान का भी गांव में अंतिम संस्कार किया गया।
शहजान के पिता मोहम्मद इमरान पिछले 15 वर्षों से दुबई में नौकरी करते हैं। उनका परिवार 20 वर्षों से जानकीपुरम (बीकेटी) में रह रहा है। वह बकरीद के अवसर पर छुट्टी लेकर परिवार के साथ समय बिताने के लिए घर आए थे। परिवार को क्या पता था कि यह खुशी का समय उनके इकलौते बेटे के साथ बिताए गए आखिरी पल साबित होंगे।
परिजनों के अनुसार, हादसे के दौरान शहजान ने अपनी मां नसरीन फातिमा को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी। उसने घबराई आवाज में बताया था कि उसका दम घुट रहा है। उसे बचा लिया जाए। बेटे का दर्द सुनकर परिवार के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पिता मोहम्मद इमरान ने बताया कि जिस स्थान पर बच्चे और लोग फंसे हुए थे, वहां से बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। दम घुटने के कारण उनके बेटे की मौत हो गई।शहजान परिवार का सबसे छोटे और इकलौते पुत्र थे। उसकी बड़ी बहन अर्शी फातिमा का विवाह फतेहपुर, दूसरी बहन रूमाना फातिमा का निकाह दिल्ली में हुआ है। सबसे छोटी बहन इरम फातिमा स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। स्वयं शहजान भी बीकॉम के छात्र थे और अपने बेहतर भविष्य के सपने संजो रहे थे।
पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मंगलवार को अम्मार का शव शहर के लखपेड़ाबाग स्थित आवास पर पहुंचा तो कोहराम मच गया। मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पैतृक गांव के कब्रिस्तान में नम आंखों और भारी गम के बीच अम्मार को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे में शामिल हर शख्स की जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी कि ईश्वर परिवार को दुख सहने की शक्ति दे।
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1:45 बजे हुई थी बात
दोस्त फैज अहमद खान ने बताया कि अम्मार उनका इकलौता मित्र था। फैज के मुताबिक, अम्मार हेड हॉपर ग्राफिक डिजाइन कंपनी में ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर दो साल से नौकरी करता था। रविवार को उसकी आखिरी बार अपने दोस्त से मुलाकात हुई थी। सोमवार को फैज को लखनऊ से कोई सामान मंगाना था, इसलिए दोपहर 1:45 बजे उसने अम्मार से बात की थी। उसे क्या पता था कि अपने दोस्त से ये उसकी आखिरी बातचीत होगी।
नवंबर में होना था भाई-बहन का निकाह
पिता मंसूर आलम ने बताया कि नवंबर में अम्मार व उसकी बहन का निकाह भी तय था। उसी की तैयारी में परिवार लगा था। इस हादसे में सबकुछ छिन गया। अम्मार के पिता की कुरौली में वेल्डिंग की दुकान है।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार स्तब्ध
मोहल्ला काजीपुर निवासी 21 वर्षीय शहजान तीन बहनों में अकेले भाई थे। उनकी असमय मौत से पूरा परिवार स्तब्ध है। शहजान भी हेड हॉपर ग्राफिक डिजाइन कंपनी में ग्राफिक डिजाइन का एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स कर रहे थे। मंगलवार को शहजान का भी गांव में अंतिम संस्कार किया गया।
शहजान के पिता मोहम्मद इमरान पिछले 15 वर्षों से दुबई में नौकरी करते हैं। उनका परिवार 20 वर्षों से जानकीपुरम (बीकेटी) में रह रहा है। वह बकरीद के अवसर पर छुट्टी लेकर परिवार के साथ समय बिताने के लिए घर आए थे। परिवार को क्या पता था कि यह खुशी का समय उनके इकलौते बेटे के साथ बिताए गए आखिरी पल साबित होंगे।
परिजनों के अनुसार, हादसे के दौरान शहजान ने अपनी मां नसरीन फातिमा को फोन कर मदद की गुहार लगाई थी। उसने घबराई आवाज में बताया था कि उसका दम घुट रहा है। उसे बचा लिया जाए। बेटे का दर्द सुनकर परिवार के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पिता मोहम्मद इमरान ने बताया कि जिस स्थान पर बच्चे और लोग फंसे हुए थे, वहां से बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। दम घुटने के कारण उनके बेटे की मौत हो गई।शहजान परिवार का सबसे छोटे और इकलौते पुत्र थे। उसकी बड़ी बहन अर्शी फातिमा का विवाह फतेहपुर, दूसरी बहन रूमाना फातिमा का निकाह दिल्ली में हुआ है। सबसे छोटी बहन इरम फातिमा स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। स्वयं शहजान भी बीकॉम के छात्र थे और अपने बेहतर भविष्य के सपने संजो रहे थे।