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Barabanki News: प्रसूताओं पर भारी पड़ रही बेहोशी के डॉक्टरों की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 31 Jan 2026 12:38 AM IST
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बाराबंकी। जिला महिला अस्पताल पिछले एक साल से अधिक समय से बेहोशी के डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। इस कारण मरीजों को हो रही परेशानी के बाद भी इस समस्या का स्थाई हल नहीं निकल पा रहा है। हालांकि राहत दिलवाने के लिए अस्पताल प्रशासन की तरफ से शासन को लगातार पत्र भेजकर रिक्त पदों पर डॉक्टर की तैनाती किए जाने का अनुरोध किया जा रहा है। बेहोशी के स्थाई डॉक्टर की तैनाती न हो पाने से रात में यदि किसी प्रसूता की हालत बिगड़ती है तो ऑनकॉल डॉक्टर भी हाथ खड़े कर देते हैं। ऐसे में प्रसूता को रेफर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से 350 प्रसूताएं इलाज व जांच के लिए आती हैं। यहां करीब 20 से 25 प्रसव आपरेशन से और करीब 10 से 15 संस्थागत प्रसव (सामान्य) होते हैं। जिले का एक मात्र महिला अस्पताल होने के बावजूद यहां पर एक भी बेहोशी के डॉक्टर की तैनाती नहीं है। डॉ. रविकिशोर के सेवानिवृत्त हो जानेे के बाद से यहां पर नियमित चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अस्पताल प्रशासन को बेहोशी के दो डॉक्टर जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ऑनकॉल तैनात करने पड़े हैं।
इसके साथ ही सीएमओ ने संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर में तैनात एक चिकित्सक को भी सहयोग के लिए महिला अस्पताल से संबद्ध किया है। इसके बावजूद जब प्रसूता की हालत बिगड़ती है और आवश्यकता पड़ती है तो बेहोशी देने वाले डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते हैं। इससे मरीजों के साथ ही अस्पताल प्रशासन को भी आए दिन परेशानी उठाना पड़ती है।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि महिला अस्पताल में बेहोशी का कोई नियमित डॉक्टर नहीं है जिससे आए दिन प्रसूताओं की सर्जरी को लेकर समस्या खड़ी हो जाती है। बेहोशी के डॉक्टर की तैनाती के लिए लगातार शासन को पत्र लिखने के बावजूद रिक्त पद पर कोई तैनाती नहीं की गई है।
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जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से 350 प्रसूताएं इलाज व जांच के लिए आती हैं। यहां करीब 20 से 25 प्रसव आपरेशन से और करीब 10 से 15 संस्थागत प्रसव (सामान्य) होते हैं। जिले का एक मात्र महिला अस्पताल होने के बावजूद यहां पर एक भी बेहोशी के डॉक्टर की तैनाती नहीं है। डॉ. रविकिशोर के सेवानिवृत्त हो जानेे के बाद से यहां पर नियमित चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अस्पताल प्रशासन को बेहोशी के दो डॉक्टर जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ऑनकॉल तैनात करने पड़े हैं।
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इसके साथ ही सीएमओ ने संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर में तैनात एक चिकित्सक को भी सहयोग के लिए महिला अस्पताल से संबद्ध किया है। इसके बावजूद जब प्रसूता की हालत बिगड़ती है और आवश्यकता पड़ती है तो बेहोशी देने वाले डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते हैं। इससे मरीजों के साथ ही अस्पताल प्रशासन को भी आए दिन परेशानी उठाना पड़ती है।
जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि महिला अस्पताल में बेहोशी का कोई नियमित डॉक्टर नहीं है जिससे आए दिन प्रसूताओं की सर्जरी को लेकर समस्या खड़ी हो जाती है। बेहोशी के डॉक्टर की तैनाती के लिए लगातार शासन को पत्र लिखने के बावजूद रिक्त पद पर कोई तैनाती नहीं की गई है।
