{"_id":"69f7aeb484e40e73bc0ec32a","slug":"the-train-will-stop-if-the-loco-pilot-takes-a-nap-barabanki-news-c-315-1-brp1006-166330-2026-05-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: लोको पायलट के झपकी लेते ही रुक जाएगी ट्रेन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: लोको पायलट के झपकी लेते ही रुक जाएगी ट्रेन
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 04 May 2026 01:53 AM IST
विज्ञापन
वंदे भारत ट्रेन का संचालन करते लोको पायलट। रेलवे
विज्ञापन
बाराबंकी। रेल हादसों पर लगाम कसने के लिए रेलवे अब सुरक्षा के अगले स्तर पर पहुंचने की तैयारी में है। बाराबंकी से छपरा तक 425 किमी लंबे एनई रेलवे के मुख्य मार्ग की पटरियों व सिग्नल के बाद अब फोकस सीधे ट्रेन चालक की सतर्कता पर है।
‘कवच’ तकनीक लागू करने के बाद रेलवे एक ऐसा एआई आधारित सिस्टम विकसित कर रहा है, जो ड्राइवर की झपकती आंखों को पढ़कर संभावित खतरे को पहले ही टाल देगा। ‘कवच’ के बाद यह तकनीक सुरक्षा के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
बाराबंकी से छपरा तक का रेलखंड बहुत व्यस्त रूट है। इस ट्रैक पर पहले से ही ‘कवच’ सिस्टम लगाया जा रहा है, जो ट्रेनों के बीच टक्कर की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगा देता है। इसमें जीपीएस और रेडियो फ्रिक्वेंसी तकनीक का इस्तेमाल कर ट्रेनों की टक्कर को रोका जाता है। यह तकनीकी बदलाव साफ दिखने लगा है।
अब इसके साथ ही एक नई चालक सहायता प्रणाली जोड़ने की तैयारी है। रेल अधिकारियों के अनुसार यह अत्याधुनिक उपकरण सीधे लोको पायलट के केबिन में लगाया जाएगा और ट्रेन के ब्रेक सिस्टम से जुड़ा रहेगा। इसमें लगे सेंसर और कैमरे ड्राइवर की आंखों की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे।
जैसे ही सिस्टम को लगेगा कि चालक की सतर्कता कम हो रही है या उसे झपकी आ रही है, तुरंत अलर्ट जारी होगा। अगर चेतावनी के बावजूद ड्राइवर प्रतिक्रिया नहीं देता, तो यह सिस्टम खुद ही ट्रेन की रफ्तार कम करते हुए उसे रोक देगा।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक पर पिछले वर्ष जून में निर्णय लिया गया था और अब यह परीक्षण के अंतिम चरण में है। बाराबंकी स्टेशन के अधीक्षक अरुण रायदाजा के अनुसार, रेलवे सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। नए एआई सिस्टम को पहले चरण में 20 इंजनों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाया जाएगा। इसके परिणाम संतोषजनक रहने पर इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
-- -
ट्रैक की सेहत भी अब एआई के भरोसे
रेलवे केवल ड्राइवर ही नहीं, बल्कि पटरियों की सेहत पर भी हाईटेक नजर रखने जा रहा है। निरीक्षण वाहनों में अब ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार (जीपीआर) से लैस एआई डिवाइस लगाए जाएंगे। यह तकनीक ट्रैक की नींव के भीतर की खामियों को भी पहचान सकेगी, जो सामान्य निरीक्षण में दिखाई नहीं देतीं। इससे संभावित खतरे को पहले ही चिह्नित कर समय रहते मरम्मत संभव हो सकेगी।
Trending Videos
‘कवच’ तकनीक लागू करने के बाद रेलवे एक ऐसा एआई आधारित सिस्टम विकसित कर रहा है, जो ड्राइवर की झपकती आंखों को पढ़कर संभावित खतरे को पहले ही टाल देगा। ‘कवच’ के बाद यह तकनीक सुरक्षा के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाराबंकी से छपरा तक का रेलखंड बहुत व्यस्त रूट है। इस ट्रैक पर पहले से ही ‘कवच’ सिस्टम लगाया जा रहा है, जो ट्रेनों के बीच टक्कर की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगा देता है। इसमें जीपीएस और रेडियो फ्रिक्वेंसी तकनीक का इस्तेमाल कर ट्रेनों की टक्कर को रोका जाता है। यह तकनीकी बदलाव साफ दिखने लगा है।
अब इसके साथ ही एक नई चालक सहायता प्रणाली जोड़ने की तैयारी है। रेल अधिकारियों के अनुसार यह अत्याधुनिक उपकरण सीधे लोको पायलट के केबिन में लगाया जाएगा और ट्रेन के ब्रेक सिस्टम से जुड़ा रहेगा। इसमें लगे सेंसर और कैमरे ड्राइवर की आंखों की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे।
जैसे ही सिस्टम को लगेगा कि चालक की सतर्कता कम हो रही है या उसे झपकी आ रही है, तुरंत अलर्ट जारी होगा। अगर चेतावनी के बावजूद ड्राइवर प्रतिक्रिया नहीं देता, तो यह सिस्टम खुद ही ट्रेन की रफ्तार कम करते हुए उसे रोक देगा।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक पर पिछले वर्ष जून में निर्णय लिया गया था और अब यह परीक्षण के अंतिम चरण में है। बाराबंकी स्टेशन के अधीक्षक अरुण रायदाजा के अनुसार, रेलवे सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। नए एआई सिस्टम को पहले चरण में 20 इंजनों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाया जाएगा। इसके परिणाम संतोषजनक रहने पर इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
ट्रैक की सेहत भी अब एआई के भरोसे
रेलवे केवल ड्राइवर ही नहीं, बल्कि पटरियों की सेहत पर भी हाईटेक नजर रखने जा रहा है। निरीक्षण वाहनों में अब ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार (जीपीआर) से लैस एआई डिवाइस लगाए जाएंगे। यह तकनीक ट्रैक की नींव के भीतर की खामियों को भी पहचान सकेगी, जो सामान्य निरीक्षण में दिखाई नहीं देतीं। इससे संभावित खतरे को पहले ही चिह्नित कर समय रहते मरम्मत संभव हो सकेगी।
