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Barabanki News: साइबर अपराधियों तक बैंक खाते पहुंचाने वाले तीन गिरफ्तार

संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Tue, 07 Apr 2026 01:42 AM IST
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Three arrested for providing bank accounts to cyber criminals
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बाराबंकी। क्या आप भी सरकारी योजना के लाभ के लिए किसी को अपना पासबुक या आधार कार्ड सौंप रहे हैं? रुक जाइए, आप साइबर अपराधियों के सबसे बड़े हथियार यानी ''म्यूल अकाउंट'' के शिकार हो सकते हैं। बाराबंकी पुलिस ने एक ऐसे ही सनसनीखेज गिरोह का पर्दाफाश किया है जो महज 15,000 रुपये के लालच में मासूम ग्रामीणों के बैंक खाते पुणे के साइबर ठगों को बेच रहा था। पुलिस जांच में अब तक ऐसे 16 खातों का खुलासा हो चुका है, जिनका इस्तेमाल देश भर में साइबर ठगी के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
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गोकुलपुर सैनी गांव निवासी चंद्रदीप की शिकायत ने इस काले कारोबार की परतें खोल दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि लक्ष्मणपुरी कॉलोनी निवासी वैभव सिंह, देवा के मजीबपुर निवासी आलोक शर्मा और सतरिख क्षेत्र के करखा निवासी अभिषेक कुमार ने सरकारी योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनका बैंक खाता खुलवाया। आरोपियों ने पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। कुछ समय बाद जब खाते में संदिग्ध लेनदेन शुरू हुआ, तब ठगी का एहसास हुआ।
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पुलिस की गिरफ्त में आए 19-20 साल के तीन युवक वैभव सिंह, आलोक शर्मा और अभिषेक कुमार कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि ''म्यूल अकाउंट'' सप्लाई करने वाले इस रैकेट के अहम प्यादे हैं। ये युवक गांव-गांव जाकर लोगों को सरकारी मदद दिलाने का सब्जबाग दिखाते थे। जैसे ही कोई ग्रामीण झांसे में आता, ये उसका बैंक खाता खुलवाते और चालाकी से उसमें अपना मोबाइल नंबर लिंक कर देते। खाता खुलते ही पासबुक और एटीएम कार्ड अपने कब्जे में ले लेते और उसे महाराष्ट्र के पुणे में बैठे मास्टरमाइंड को 15,000 रुपये प्रति खाते के कमीशन पर बेच देते थे। इस खेल का मास्टरमाइंड पुणे में बैठकर टेलीग्राम के जरिए इस नेटवर्क को चला रहा है।
शहर कोतवाल सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी युवक लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाते थे। खातों में फर्जी मोबाइल नंबर लिंक कर देते थे। फिर इन खातों को म्यूल खाते के रूप में साइबर अपराधियों को सौंप देते थे।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह महाराष्ट्र के पुणे में बैठे एक शातिर व्यक्ति से टेलीग्राम के जरिए जुड़ा था। शातिरों द्वारा हर खाते के बदले युवकों को करीब 15,000 रुपये दिए जाते थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ रिपाेर्ट दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही इस पूरे नेटवर्क के सरगना तक पहुंचने के लिए पुलिस की टीमें महाराष्ट्र में सक्रिय हो गई हैं।
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म्यूल खातों पर निर्भर है साइबर ठग



दरअसल, साइबर ठगों को रकम इधर से उधर करने के लिए बैंक खातों की जरूरत होती है। खाते कैसे भी मिले। इसके लिए वे बाकायदा कमीशन देते हैं। ऐसे खातों को ही म्यूल अकाउंट कहा जाता है। जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से आई रकम को ट्रांसफर और छिपाने के लिए किया जाता है।


अनजान व्यक्ति से खाता मत खुलवाएं
एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि इस गिरोह के तार महाराष्ट्र से जुड़े हैं। वहां बैठे सरगना तक पहुंचने के लिए टीमें सक्रिय हैं और पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। साइबर ठग अब गांव-शहर के आम लोगों को निशाना बनाकर उनके बैंक खातों को ही अपराध का हथियार बना रहे हैं। इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाता न खुलवाएं। अपनी पासबुक, एटीएम या ओटीपी किसी को न दें। सरकारी योजना के नाम पर मिलने वाले लालच से सतर्क रहें।
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