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Barabanki News: अप्रशिक्षितों के हाथों है पंजीकृत अस्पतालों की कमान
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 29 Mar 2026 01:28 AM IST
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बाराबंकी। पंजीकृत अस्पतालों का संचालन अप्रशिक्षितों के द्वारा किया जा रहा है लेकिन जिम्मेदारों द्वारा इसे गंभीरता से न लिया जाना मरीजों की जान पर भारी पड़ जाता है। कई बार इनके गलत इलाज से मरीज की जान भी चली जाती है।
जिले में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या करीब 320 के आसपास है लेकिन इनमें से 50 प्रतिशत अस्पताल ऐसे हैं, जिनका संचालन उन लोगों द्वारा किया जाता है जो अप्रशिक्षित है। इनसे सिर्फ दूसरे अस्पतालों में कार्य करने के अनुभव के आधार पर कार्य लिया जाता है। स्थिति यह है कि अस्पताल का पंजीकरण जिनके नाम से वह कभी अस्पताल आते हैं जिनके द्वारा अस्पताल का संचालन किया जाता है उन्हें मेडिकल की एबीसीडी नहीं आती है यही वजह है कि इनका सहयोग लिया जाता है जो दूसरे अस्पतालों में कार्य कर चुके होते हैं।
बिना देखे कर दिया गया पंजीकरण
दरियाबाद के रानीकटरा, कोटवाधाम, खजुरी, अकबरपुर, मियागंज सहित अन्य चौराहों पर कई पंजीकृत अस्पताल है लेकिन इनमें मौजूद चिकित्सकों के पास कोई डिग्री नहीं है। वहीं मदारपुर, रानीपुरवा, मरौचा, बरौलिया, बदोसराय, मरकामऊ चौराहों पर पंजीकृत अस्पताल संचालित है लेकिन यहां अप्रशिक्षितों से काम लिया जा रहा है।
जरुरत पड़ने पर बुलाए जाते हैं डॉक्टर
रामसनेहीघाट। दिलोना बाइपास में भिटरिया के पास स्थित सुशीला हॉस्पिटल का पंजीकरण डॉ. गोकरन के नाम पर है लेकिन संचालन राहुल द्वारा किया जाता है। इनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों को बुलाया जाता है। यहीं हाल सैदखानपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित एसएन हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर का है। यहां भी आवश्यकता पड़ने पर ही चिकित्सकों को बुलाया जाता है। कुछ दिन पूर्व यहां पर इलाज के दौरान जच्चा बच्चा की मौत भी हो चुकी है।
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. एलबी गुप्ता ने बताया कि जिले में संचालित सभी अस्पतालों की समय-समय पर जांच की जाती है। अभी कुछ दिन पूर्व ऐसे कई अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। इसके बाद भी शिकायत मिलती है तो जांच की जाएगी।
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जिले में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या करीब 320 के आसपास है लेकिन इनमें से 50 प्रतिशत अस्पताल ऐसे हैं, जिनका संचालन उन लोगों द्वारा किया जाता है जो अप्रशिक्षित है। इनसे सिर्फ दूसरे अस्पतालों में कार्य करने के अनुभव के आधार पर कार्य लिया जाता है। स्थिति यह है कि अस्पताल का पंजीकरण जिनके नाम से वह कभी अस्पताल आते हैं जिनके द्वारा अस्पताल का संचालन किया जाता है उन्हें मेडिकल की एबीसीडी नहीं आती है यही वजह है कि इनका सहयोग लिया जाता है जो दूसरे अस्पतालों में कार्य कर चुके होते हैं।
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बिना देखे कर दिया गया पंजीकरण
दरियाबाद के रानीकटरा, कोटवाधाम, खजुरी, अकबरपुर, मियागंज सहित अन्य चौराहों पर कई पंजीकृत अस्पताल है लेकिन इनमें मौजूद चिकित्सकों के पास कोई डिग्री नहीं है। वहीं मदारपुर, रानीपुरवा, मरौचा, बरौलिया, बदोसराय, मरकामऊ चौराहों पर पंजीकृत अस्पताल संचालित है लेकिन यहां अप्रशिक्षितों से काम लिया जा रहा है।
जरुरत पड़ने पर बुलाए जाते हैं डॉक्टर
रामसनेहीघाट। दिलोना बाइपास में भिटरिया के पास स्थित सुशीला हॉस्पिटल का पंजीकरण डॉ. गोकरन के नाम पर है लेकिन संचालन राहुल द्वारा किया जाता है। इनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों को बुलाया जाता है। यहीं हाल सैदखानपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित एसएन हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर का है। यहां भी आवश्यकता पड़ने पर ही चिकित्सकों को बुलाया जाता है। कुछ दिन पूर्व यहां पर इलाज के दौरान जच्चा बच्चा की मौत भी हो चुकी है।
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. एलबी गुप्ता ने बताया कि जिले में संचालित सभी अस्पतालों की समय-समय पर जांच की जाती है। अभी कुछ दिन पूर्व ऐसे कई अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। इसके बाद भी शिकायत मिलती है तो जांच की जाएगी।