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बरेली: अमर उजाला भविष्य ज्योति कार्यक्रम का आगाज, छात्रों को मिली करियर की नई दिशा

अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Fri, 22 May 2026 02:45 PM IST
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सार

अमर उजाला के 'भविष्य ज्योति' कार्यक्रम का शुक्रवार को आगाज हुआ। विद्यार्थियों को करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यक्तित्व विकास से जुड़े महत्वपूर्ण टिप्स प्राप्त किए।

Amar Ujala's Bhavishya Jyoti program was launched on Friday
अमर उजाला भविष्य ज्योति कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने और उन्हें सही करियर मार्गदर्शन के उद्देश्य से आयोजित अमर उजाला के 'भविष्य ज्योति' कार्यक्रम का शुक्रवार को आगाज हुआ। विद्यार्थियों को करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यक्तित्व विकास से जुड़े महत्वपूर्ण टिप्स प्राप्त किए।



वक्ताओं ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और सही मार्गदर्शन भी सफलता के लिए जरूरी है। छात्रों को समय प्रबंधन, आत्मविश्वास बढ़ाने और तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, विद्यार्थियों को विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी देते हुए कहा कि अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार क्षेत्र चुनना चाहिए। 
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मौजूद विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई छात्रों ने कहा कि उन्हें अपने भविष्य को लेकर नई सोच और स्पष्ट दिशा मिली है। आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्थाएं भी बेहतर रहीं।
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एकाग्रता और सफलता के लिए स्क्रीनटाइम घटाएं विद्यार्थी
एसपी सिटी मानुष पारीक ने विद्यार्थियों को मोबाइल का जरूरत पर ही इस्तेमाल का सुझाव दिया। कहा कि सुभाषनगर के एक व्यक्ति ने 15 साल के बेटे को मोबाइल की लत से छुटकारा दिलाने का अनुरोध किया। क्योंकि वह कोई बात नहीं सुनता और एप में गेम खेलकर रुपए कमाने की बात कहता है। एसी स्थिति में पुलिस का नहीं बल्कि अभिभावक को ही ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, बच्चे का स्क्रीनटाइम 11 घंटे का मिला। जो सामान्य से 10 गुना अधिक है।

बताया कि तमाम शोध से पता चला है कि तीन साल के बच्चे को मोबाइल नहीं देना चाहिए। इससे ऑटिज्म की आशंका बढ़ती है। इसके अलावा एकाग्रता, लक्ष्य निर्धारण में कमी आती है। निराशा बढ़ती है। सेहत पर भी दुष्प्रभाव होता है। डिजिटल इंडिया में बच्चों को पढ़ाई के दौरान फोन से कोई काम नहीं है। इसलिए इससे दूर रहें। बढ़ती नकारात्मकता की वजह भी यही है। मेधावियों को भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

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