सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   bareilly zari-zardozi and bamboo-cane craftsmanship are shining on the global stage

UP: वैश्विक मंच पर चमक रही जरी-जरदोजी और बांस-बेंत की कारीगरी, गली से निकल ग्लोबन बने बरेली के उत्पाद

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 15 Jan 2026 01:57 PM IST
विज्ञापन
सार

बरेली शहर को कोई झुमका सिटी कहता है तो कुछ लोग सुरमे का शहर। हालांकि, जिले की वास्तविक पहचान जरी और बांस-बेंत की कारीगरी से होती है। बरसों से यह इस शहर का बड़ा कारोबार और हजारों परिवारों के जीवनयापन का जरिया बना हुआ है। शहर की गलियों में बने उत्पाद विदेशियों को भी लुभा रहे हैं। एक जिला एक उत्पाद योजना के जरिये इनको वैश्विक पहचान मिल रही है। अमर उजाला के स्थापना दिवस के खास मौके पर आपको बताते हैं इन उत्पादों के गली से ग्लोबल बनने तक की कहानी....।

bareilly zari-zardozi and bamboo-cane craftsmanship are shining on the global stage
जरी का काम करतीं युवतियां - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

बरेली में जरी-जरदोजी की सुनहरी कढ़ाई शहर की गलियों से निकलकर अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रही है। करीब 40 देशों में जरी-जरदोजी उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है। विदेशी ग्राहक इस कला को भारतीय संस्कृति और आधुनिकता के बेहतरीन मिश्रण के रूप में देखते हैं। सरकारी आंकड़ों में जरी के चार हजार से ज्यादा बड़े कारीगर पंजीकृत हैं। 

Trending Videos


जिले के करीब दो लाख लोग दस्तकारी से जुड़े हैं। बरेली शहर समेत फरीदपुर, फतेहगंज पश्चिमी, मीरगंज, बहेड़ी जरी के हब हैं। सात निर्यातक कारीगरी को ग्लोबल बना रहे हैं। निर्यातकों के मुताबिक, जरी उत्पादों का सर्वाधिक निर्यात खाड़ी देशों को होता है। दुबई इसका सेल्स प्वॉइंट है। चार साल पूर्व मिस वेनेजुएला ने बरेली में बना जरी इवनिंग गाउन पहना था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


एक दशक पहले बरेली से जरी कारोबार सिमटने लगा था, पर ऑनलाइन कारोबार से वैश्विक बाजार मिला तो मांग बढ़ी और कारीगरों के जीवन स्तर में सुधार हुआ। अब यूएई, यूरोप, चीन, तुर्किये, कोलंबिया, कंबोडिया, वियतनाम, जर्मनी, कनाडा, मैसेडोनिया आदि देशों में जरी उत्पाद निर्यात हो रहे हैं।

bareilly zari-zardozi and bamboo-cane craftsmanship are shining on the global stage
बेंत से फर्नीचर तैयार करता कारीगर - फोटो : अमर उजाला
परंपरा में मिली आधुनिकता तो बांस बेंत को मिला नया आकार
प्लास्टिक, प्लाईवुड की चमक के बीच फीकी पड़ती बरेली की बांस-बेंत कारीगरी को सहेजने के लिए हस्तशिल्पी परंपरा और आधुनिकता के मिश्रण से उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इससे बांस-बेंत के फर्नीचरों की मांग बढ़ रही है और कला को आर्थिक सहारा मिल रहा है। दो दशक पहले सिर्फ बांस मंडी में सौ से ज्यादा कारोबारी थे। कद्रदानों की बेरुखी से कारोबार सिमटने लगा था। लिहाजा, कारीगर अब ग्राहकों की मांग के अनुसार गिफ्ट बास्केट, मिरर फ्रेम, लैंप शेड, कप-प्लेट, जग, मग, केतली, बोतल, गमले, सोफा, कुर्सी, टेबल, डायनिंग सेट, सजावटी सामान, वॉल हैंगिंग आदि बना रहे हैं। 

राज्य दक्षता पुरस्कार से सम्मानित कारोबारी नत्थू हुसैन के मुताबिक, इन उत्पाद का सही रखरखाव हो तो ये वर्षों तक बरकरार रहते हैं। सरकारी आंकड़ों में करीब दो हजार कारीगर हैं। असम, त्रिपुरा के बांस से उत्पाद बनते हैं। पुराना शहर, सीबीगंज, पदारथपुर, ठिरिया, उड़ला जागीर, आलमपुर, फतेहगंज पश्चिमी, नवाबगंज में बांस के उत्पाद बन रहे हैं। बेंत से बनी बास्केट की मांग केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में सर्वाधिक है। उत्पाद यूरोप, फिलिपींस, डेनमार्क सहित अन्य देशों को भी निर्यात हो रहे हैं। सलाना दस करोड़ का टर्नओवर है।

bareilly zari-zardozi and bamboo-cane craftsmanship are shining on the global stage
शोरूम में रखा फर्नीचर - फोटो : अमर उजाला

विदेश में धूम मचा रही रॉकिंग चेयर
ब्रिटिश शासनकाल से ही बरेली के फर्नीचर की अलग पहचान रही है। बॉलीवुड में बरेली के फर्नीचर पर एक फिल्म ''स्वामी'' भी बन चुकी है। सिकलापुर में सौ वर्षों से फर्नीचर का कारोबार हो रहा है। कुमार टॉकिज, शाहदाना समेत जिले में बड़े पैमाने पर फर्नीचर का काम होता है। रॉकिंग चेयर (शीशम से बनी अर्धचंद्राकार कुर्सी) रईसों की पहली पसंद है। दूसरे देशों में भी इसकी खूब मांग है।

शहर में करीब 12 हजार कामगार फर्नीचर तराश रहे हैं। 80 फीसदी कार्य हाथों से होता है। फर्नीचर कारोबारी अमित अग्रवाल के मुताबिक उत्तराखंड के नजदीक होने से साल, सागौन, शीशम की लकड़ी पर्याप्त मात्रा में मिलती है। लिहाजा, फर्नीचर सस्ता और टिकाऊ होता है। तराई क्षेत्र की लकड़ी में घुन और दीमक भी कम लगते हैं। करीब 500 लोग फर्नीचर का कारोबार कर रहे हैं। इनमें 50 बड़े कारोबारी हैं। सलाना टर्नओवर करीब सौ करोड़ का है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed