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Bareilly News: युरिडा के निर्देशों की अनदेखी, ठेकेदार की मनमानी से हुआ सीएम ग्रिड का काम
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बरेली। सीएम ग्रिड के तहत 57 करोड़ रुपये की योजना में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और तकनीकी नियमों को दरकिनार कर निर्माण करने पर अर्बन सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (युरिडा) की ओर से पूर्व में कई बार निरीक्षण कर दिशा-निर्देश और विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी ने अनदेखी की। आरोप है कि कार्यदायी संस्था ने गुणवत्ता पर ध्यान देने के बजाय केवल अपना भुगतान हासिल करने की जल्दबाजी में नियमों की उल्लंघन होता रहा।
युरिडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह की ओर से वर्ष 2024 में सड़क परियोजनाओं में विद्युत एवं सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए स्पष्ट एसओपी जारी की गई थी। इसके लिए बाकायदा ठेकेदारों और अभियंताओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था, जिसमें इंजीनियरों को स्वयं मौके पर रहकर निगरानी करने के निर्देश थे। इसके बावजूद स्टेडियम रोड और कुष्ठ आश्रम रोड पर निर्माण के दौरान खामियां मिली जो सीधे तौर पर तकनीकी मानकों के उल्लंघन को दर्शाती हैं। यहां सीवर इंस्पेक्शन चेंबर के भीतर से ही पेयजल लाइन गुजार दी गई है, जिससे अब पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। इस खुलासे के बाद नगर निगम के गलियारों में कार्यदायी एजेंसी अनमोल एसोसिएट्स की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान नगर निगम के कुछ इंजीनियरों पर अनुचित दबाव भी बनाया गया था, जिसके चलते ठेकेदार ने निर्धारित मानकों की परवाह न करते हुए अपनी सुविधानुसार काम को अंजाम दिया। कई स्तरों पर आपत्तियां दर्ज होने के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे अब न केवल निर्माण एजेंसी बल्कि मॉनिटरिंग से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में है। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि कार्यदायी एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है, जवाब का इंतजार है। इसके बाद उच्च स्तरीय जांच की जाएगी कि किन परिस्थितियों में युरिडा के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ। यदि जांच में गड़बड़ी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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युरिडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह की ओर से वर्ष 2024 में सड़क परियोजनाओं में विद्युत एवं सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए स्पष्ट एसओपी जारी की गई थी। इसके लिए बाकायदा ठेकेदारों और अभियंताओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था, जिसमें इंजीनियरों को स्वयं मौके पर रहकर निगरानी करने के निर्देश थे। इसके बावजूद स्टेडियम रोड और कुष्ठ आश्रम रोड पर निर्माण के दौरान खामियां मिली जो सीधे तौर पर तकनीकी मानकों के उल्लंघन को दर्शाती हैं। यहां सीवर इंस्पेक्शन चेंबर के भीतर से ही पेयजल लाइन गुजार दी गई है, जिससे अब पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। इस खुलासे के बाद नगर निगम के गलियारों में कार्यदायी एजेंसी अनमोल एसोसिएट्स की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान नगर निगम के कुछ इंजीनियरों पर अनुचित दबाव भी बनाया गया था, जिसके चलते ठेकेदार ने निर्धारित मानकों की परवाह न करते हुए अपनी सुविधानुसार काम को अंजाम दिया। कई स्तरों पर आपत्तियां दर्ज होने के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे अब न केवल निर्माण एजेंसी बल्कि मॉनिटरिंग से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में है। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि कार्यदायी एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है, जवाब का इंतजार है। इसके बाद उच्च स्तरीय जांच की जाएगी कि किन परिस्थितियों में युरिडा के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ। यदि जांच में गड़बड़ी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।