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Bareilly News: चिकित्सक ने महिला के ऑपरेशन में बरती लापरवाही, देना होगा एक लाख रुपये का मुआवजा
Wed, 15 Jul 2026 05:21 PM IST
Mukesh Kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Published by: Mukesh Kumar
Updated Wed, 15 Jul 2026 05:21 PM IST
सार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने एक निजी अस्पताल के चिकित्सक को चिकित्सीय लापरवाही का दोषी माना। आयोग ने शाहजहांपुर निवासी तस्लीम जहां को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
बरेली के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने सोमवार को शहर के निजी अस्पताल के चिकित्सक पर उपचार में चिकित्सीय लापरवाही (मेडिकल नेग्लिजेंस) का दोष मानते हुए पीड़ित महिला को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। शाहजहांपुर निवासी तस्लीम जहां ने आयोग में वाद दायर कर आरोप लगाया था कि अक्तूबर 2022 में उन्हें पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) के ऑपरेशन के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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चिकित्सक ने पहले दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) विधि से ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन बाद में ओपन सर्जरी की गई। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान असावधानी के कारण उनके दाहिने कूल्हे का बड़ा हिस्सा जल गया, जिससे गंभीर बर्न इंजरी हुई। पीड़िता का कहना था कि उपचार और मानसिक व शारीरिक पीड़ा के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और बाद में भी इलाज पर खर्च करना पड़ा। मामले में चिकित्सक और बीमा कंपनी ने सभी आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि ऑपरेशन निर्धारित चिकित्सीय मानकों के अनुसार किया गया था। मरीज की स्थिति को देखते हुए ओपन सर्जरी करनी पड़ी।
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दो माह में देना होगा मुआवजा
निर्णय आयोग के अध्यक्ष राधेश्याम यादव एवं सदस्य प्रशांत मिश्रा ने दोनों पक्षों की दलीलें, मेडिकल रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि ऑपरेशन के दौरान अपेक्षित सावधानी नहीं बरती गई और मरीज के कूल्हे पर हुई बर्न इंजरी चिकित्सीय लापरवाही का परिणाम है। आयोग ने अपने आदेश में द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया है कि प्रोफेशनल डॉक्टर इंडेम्निटी पॉलिसी के तहत पीड़ित को एक लाख रुपये का मुआवजा दो माह के भीतर उपलब्ध कराया जाए। आदेश का पालन न होने पर निर्णय की तिथि से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।
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