अमर उजाला संवाद: बरेली में सड़कों पर कुत्तों का आतंक, छतों पर बंदर मचा रहे उत्पात, लोगों ने गिनाईं समस्याएं
बरेली के पॉश इलाकों में कुत्तों और बंदरों से लोग परेशान हैं। छतों पर बंदर उत्पात मचाते हैं तो सड़कों पर कुत्तों का आतंक है। ये बातें गांधी उद्यान व रामपुर बाग वार्ड के लोगों ने मंगलवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में कहीं।
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बरेली के प्रेम पार्क में मंगलवार को अमर उजाला की तरफ से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें गांधी उद्यान व रामपुर बाग वार्ड के लोग पहुंचे। उन्होंने अपनी समस्याओं की लंबी फेहरिस्त गिनाई। बंदरों, कुत्तों व छुट्टा पशुओं की समस्या को उठाया। कहा कि सड़कों पर चलते समय कुत्तों की तरफ बंदर झपट्टा मारते हैं, इनके आतंक के कारण छत पर जाना मुश्किल हो गया है। महिलाओं ने कहा कि चौराहों पर सुंदरीकरण के नाम पर चबूतरे बनाए जा रहे हैं जो जाम का मुख्य कारण बन रहे हैं।
नगर के वीआईपी इलाकों में रामपुर बाग व गांधी उद्यान वार्ड की गिनती होती है। यहां पर तमाम बड़े अधिकारियों के आवास व कॉलोनियां हैं। इसके बाद भी यहां पर जनसुविधाओं के नाम पर लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। गांधी उद्यान वार्ड में 15 हजार की आबादी व करीब 10 हजार मतदाता हैं।
रामपुर बाग वार्ड में भी लगभग इतनी ही आबादी और मतदाता होंगे। इन वार्डों में बंदर के खौफ से हर कोई परेशान दिखा। किसी ने कहा कि बागवानी बंदर उजाड़ रहे हैं। घरों के बाहर लोगों का बैठना मुश्किल है। छत पर सूखने के लिए कपड़े डालो तो बंदर उठा ले जाते हैं या फिर फाड़ देते हैं। इसके लिए नगर निगम की तरफ से कोई सुधि न लेने से लोगों में निराशा है।
लोगों ने साझा की समस्या
संगीतकार गुरुदीप सिंह ने बताया कि किसी व्यक्ति ने अगर सड़क पर कूड़ा फेंक दिया तो सफाई कर्मचारी कहते हैं कि नगर पालिका से कहलवाएं, तब उठाएंगे। स्ट्रीट लाइट में ऑन-ऑफ की ऑटोमेटिक व्यवस्था न होने पर दिन में भी ये जलती रहती हैं। टैग लगे छुट्टा पशु भी सड़क पर घूम रहे हैं। दरवाजे पर गोबर कर रहे हैं।
सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर अरुण शर्मा ने कहा कि अमर उजाला की तरफ से समस्या को सुना जा रहा है, वहीं अधिकारी हमारी सुनते तक नहीं हैं। इससे हमारी समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों को चाहिए कि वे लोगों के बीच आकर उनकी परेशानी पर ध्यान दें।
सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि सड़क पर कुत्तों की तरह बंदर भी झपट्टा मारते हैं। कुछ जगहों पर तो लोगों ने अपने पालतू कुत्ते तक सड़क पर छोड़ दिए हैं। नगर निगम और वन विभाग को चाहिए कि कुत्तों और बंदरों की पकड़ने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाए।
इन्होंने गिनाई अपनी समस्याएं
सबा खान, तुबा अहमद, श्वेता शर्मा, रागिनी अग्रवाल, कंचन शर्मा, शिक्षक रवि शर्मा, डॉ. सत्येंद्र पाल, सुधीर मित्तल जैन, हरिशंकर अग्रवाल आदि ने अपनी समस्याएं गिनाईं।