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फर्जी आईएएस विप्रा की कहानी: खुद ही कर लिया अपना प्रमोशन, एसयूवी पर लिखा एडीएम, लोगों से ऐसे की ठगी

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Wed, 29 Apr 2026 02:05 PM IST
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सार

बरेली में खुद को आईएएस अफसर बताने वाली विप्रा शर्मा को उसकी दो बहनों के साथ पुलिस ने गिरफ्तार किया है। तीनों बहनों पर लाखों रुपये की ठगी का आरोप है। पुलिस ने फर्जी आईएएस विप्रा से पूछताछ की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। 

Fake IAS Officer Vipra Promoted Herself Displayed ADM on Her SUV car in Bareilly
ठगी के आरोप में पकड़ी गईं तीनों बहनें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बरेली में फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा खुद को अफसरों जैसा ढालने के साथ ही लोगों से ठगी करती रही। रुतबा बढ़ाने के चक्कर में प्रमोशन का ढिंढोरा पीटकर खुद ही एसडीएम से एडीएम बन बैठी। एएसपी पंकज श्रीवास्तव व बारादरी थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह ने पूछताछ की तो विप्रा ने बताया कि उसके पिता कई साल पहले बरेली में सिंचाई विभाग के प्रशासनिक अधिकारी बनकर आए थे। गोल्डन ग्रीन पार्क में उन्होंने मकान बनाया। उसका बचपन यहीं बीता। विप्रा ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से इतिहास और अंग्रेजी में एमए किया। आगरा विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी करने का दावा भी किया, पर प्रमाण नहीं दे सकी।

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विप्रा ने बताया कि पिता चाहते थे कि बेटी प्रशासनिक अफसर बने, इसलिए उसने भी मन से पढ़ाई की। वर्ष 2012 से 2020 तक चार बार परीक्षा दी। कामयाबी नहीं हुई तो उसने खुद को अधिकारी मान लिया। बड़ी बहन शिखा ने विप्रा को  एसडीएम बताना शुरू कर दिया। विप्रा ने उन दिनों पुरानी काले रंग की कार खरीदी, जिस पर आगे एसडीएम लिखा था। उन दिनों उसने खुद को एसडीएम बताकर बेरोजगारों से ठगी की। 
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लखनऊ जाकर भेजते थे डाक, वेतन भी ऑनलाइन भेजा
विप्रा की ठगी की रकम तीनों बहनों के अलग-अलग खातों में जमा होती थी। विप्रा ने ठगी के रुपये से पहले पवन विहार में अपनी ममेरी बहन दीक्षा का आलीशान मकान तैयार कराया। इस मकान में ही तीनों बहनें फर्जी नियुक्ति पत्र छापती थीं। बहनों ने बेहद शातिराना तरीके से ठगी की। इनमें से ही कोई लखनऊ जाकर डाक के जरिये पत्र भेजती थी ताकि किसी को शक न हो। तीनों बहनों ने स्वीकार किया कि कुछ लोगों के खातों में उन्होंने कुछ महीने ऑनलाइन वेतन भी भेजा ताकि उनको सरकारी नौकरी का भरोसा हो जाए।

Fake IAS Officer Vipra Promoted Herself Displayed ADM on Her SUV car in Bareilly
आरोपी महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

सफेद एसयूवी खरीदकर बढ़ाया रुतबा, हूटर लगाया
विप्रा ने बताया कि दोनों बहनों ने काफी धन जमा कर लिया। फिर ठगी के धंधे में अपनी ममेरी बहन दीक्षा पाठक को भी शामिल कर लिया। दीक्षा कुंवारी है और उसके माता-पिता नहीं हैं। दीक्षा और शिखा ने लोगों को बताना शुरू किया कि विप्रा का प्रमोशन अब एसडीएम से एडीएम वित्त राजस्व पद पर हो गया है। तैनाती स्थल वह कभी गजरौला तो कभी अमरोहा बता देती थीं। ठगी के रुपये से इन्होंने करीब 27 लाख की एसयूवी खरीदी। इस कार पर बत्ती और हूटर लगाकर तीनों बहनें चलती थीं। कार पर आगे एडीएम एफआर भी लिखा था।

इंजीनियर पति से हो चुका तलाक
एएसपी ने बताया कि विप्रा की शादी बदायूं में केमिकल इंजीनियर से वर्ष 2017 में हुई थी। हालांकि, शादी ज्यादा दिन नहीं टिकी। वर्ष 2020 में उसने पति से तलाक ले लिया और पिता के घर ही रहने लगी। शिखा ने समाजशास्त्र से एमए किया है। उसकी शादी बरेली में ही हुई है और पति किसी कंपनी में मैनेजर है। दीक्षा ने शहर के निजी कॉलेज से एमएससी की है।

यूट्यूबर भी सिस्टर गैंग के संपर्क में, जांच शुरू
पुलिस को शक है कि इस गैंग में कुछ पुरुष सदस्य भी शामिल हैं। कुछ यूट्यूबर भी इनके सहयोगी बताए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इन्हीं में से एक से इनका रुपये के लेनदेन का विवाद हो गया था। इसके बाद विप्रा व शिखा को कुछ लोगों ने ब्लैकमेल कर वसूली भी की। ऑनलाइन लेनदेन में भी इस तरह की गतिविधियां स्पष्ट हुई हैं।

ऐसे पकड़ी गई तीनों बहनें 
आठ साल तक सिविल सेवाओं की तैयारी के बावजूद सफलता नहीं मिली तो विप्रा शर्मा खुद को आईएएस अधिकारी मान बैठी। खुद को एडीएम बताकर बेरोजगार युवाओं से कई लाख रुपये ठगने के आरोप में उसे और उसकी दो बहनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से 4.5 लाख रुपये नकदी, उप्र सरकार लिखी लग्जरी कर, सात चेकबुक, चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। उनके छह खातों में 55 लाख रुपये फ्रीज भी किए गए हैं।

एएसपी पंकज श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि प्रीति लॉयल व तीन अन्य लोगों ने बारादरी थाने में शिखा पाठक व उसकी बहन विप्रा शर्मा आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रीति लॉयल के मुताबिक शिखा ने उससे संपर्क बढ़ाया। उसने अपनी बहन डॉ. विप्रा शर्मा को गजरौला में तैनात अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बताया। दोनों बहनों ने सचिवालय में ऊंची पहुंच का दावा कर बेरोजागरों को कंप्यूटर ऑपरेटर व विभिन्न विभागों में चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया।

प्रीति लॉयल ने अपने परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद को भी इस बारे में बताया। सरकारी नौकरी के लालच में इन सभी ने कई बार में करीब 11 लाख रुपये इन बहनों को दे दिए। इसके बाद विप्रा शर्मा ने आयुक्त एंव सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ अनुभाग-4 में तैनाती का फर्जी नियुक्तिपत्र बनाकर चारों लोगों को ई-मेल, डाक और वाट्सएप के जरिये भेज दिया। जब ये लोग नौकरी करने लखनऊ के विभूति खंड पहुंचे तो पता लगा कि नियुक्तिपत्र फर्जी हैं।

प्रीति की शिकायत पर बारादरी पुलिस ने रविवार को रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। छानबीन की तो पता चला कि खुद को आईएएस बताकर विप्रा अपनी कार पर एडीएम एफआर लिखवाकर और नीली बत्ती लगाकर रौब झाड़ती है। पुलिस ने सोमवार को ग्रेटर ग्रीन पार्क निवासी डॉ. विप्रा शर्मा, शिखा शर्मा और पवन विहार निवासी उनकी ममेरी बहन दीक्षा पाठक को गिरफ्तार कर लिया।

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