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Bareilly: यहां छात्र सीख रहे ड्रोन और अंतरिक्ष विज्ञान की तकनीक, शिक्षा के नए आयाम लिख रहा ये सरकारी स्कूल

Sun, 16 Aug 2026 08:56 AM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sun, 16 Aug 2026 08:56 AM IST
सार

बरेली के छावनी क्षेत्र का आरएन टैगोर इंटर कॉलेज शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम गढ़ रहा है। यहां स्थापित ड्रोन और रोबोटिक्स लैब आकर्षण का केंद्र हैं। इस लैब में कक्षा छह से ही छात्र ड्रोन और अंतरिक्ष विज्ञान की तकनीक सीख रहे है। 

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Modern lab in a government school students here are learning drone and space science technologies
आरएन टैगोर इंटर कॉलेज में स्थापित खगोल विज्ञान लैब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली के छावनी क्षेत्र में शिक्षा का एक नया और अनूठा अध्याय लिखा जा रहा है, जहां सरकारी स्कूल आधुनिकता और तकनीकी उन्नति के मामले में बड़े-बड़े कॉन्वेंट स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहे हैं। शहर के प्रतिष्ठित आरएन टैगोर इंटर कॉलेज में अब शिक्षा केवलता किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के छात्र छठी कक्षा से ही अंतरिक्ष विज्ञान, रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी के बारे में पढ़ समझ रहे हैं। 

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पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था को नवाचार के जीवंत केंद्रों में बदलने की इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में बचपन से ही वैज्ञानिक जिज्ञासा और आलोचनात्मक सोच को विकसित करना है। बरेली छावनी बोर्ड के इस अनूठे प्रयास के तहत स्कूल परिसर में एक सर्वसुविधायुक्त खगोल विज्ञान केंद्र और अत्याधुनिक ड्रोन व रोबोटिक्स लैब की स्थापना की गई है। यहां छात्रों को केवल सैद्धांतिक बातें नहीं पढ़ाई जातीं, बल्कि प्रयोग और प्रत्यक्ष अवलोकन के जरिए ब्रह्मांड के रहस्यों और अंतरिक्ष विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों से रूबरू कराया जाता है।
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ड्रोन और रोबोटिक्स लैब आकर्षण का केंद्र
ड्रोन और रोबोटिक्स लैब इस विद्यालय का सबसे बड़ा आकर्षण बन चुकी हैं। यहां नियुक्त विशेष प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में छात्र अपने नन्हे हाथों से तकनीकी मॉडल तैयार कर रहे हैं। विद्यार्थियों ने अब तक ड्रोन के शुरुआती हिस्सों को खुद असेंबल करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, रोबोटिक्स लैब में बच्चों ने असाधारण रचनात्मकता का परिचय देते हुए कई उपयोगी मॉडल बनाए हैं, जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाले हादसों को रोकने वाली सेंसर-युक्त विशेष लाइटें भी शामिल हैं। 

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लैब में शिक्षक और छात्र-छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

शिक्षकों का कहना है कि यदि सही दिशा और संसाधन मिलें, तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी देश का भविष्य संवारने वाली तकनीकों में अपनी अमिट छाप छोड़ सकते हैं। इस प्रयोगशाला के माध्यम से छात्र अब पाठ्यपुस्तकों से बाहर निकलकर ग्रहों, तारों, अंतरिक्ष मिशनों और खगोलीय घटनाओं का सीधा अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। 

प्रधानाचार्य वंदना मिश्रा ने बताया कि इस प्रकार की व्यावहारिक और अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा प्रणाली छात्रों में विश्लेषणात्मक कौशल को मजबूत करती है। जब बच्चे इतनी कम उम्र में व्यावहारिक विज्ञान से जुड़ते हैं, तो उनका आत्मविश्वास और समस्या-समाधान का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। 

जल संरक्षण पर भी होगा काम 
कैंट बोर्ड की सीईओ डॉ. तनु जैन ने बताया कि इस योजना उद्देश्य विद्यार्थियों के अंदर छीपी हुई प्रतिभा को एक अच्छा मंच देना है। तरह तरह की लैब के साथ स्कूल का विकास किया गया है। अब आगे विद्यालय में रेन वाटर हार्वेस्टिंग समेत अन्य निर्माण की योजना पर किया जा रहा है।

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