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Bareilly News: साढ़े तीन घंटे चली रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी ने बचाई आदित्य की जान और मुस्कान

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 01:42 AM IST
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Reconstructive surgery lasted three and a half hoursSaved Aditya's life and smile
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बरेली। मांझे से गंभीर घायल आदित्य वीर सिंह की साढ़े तीन घंटे चली प्लास्टिक सर्जरी (रिकंस्ट्रक्टिव) से जान बची, साथ ही चेहरे की मुस्कान भी बरकरार रहेगी। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि पहली बार बरेली में मांझे से घायल होने पर टांकों के बजाय सीधे तौर पर किसी की सर्जरी हुई है। इससे जख्म के निशान नहीं दिखेंगे।


आमतौर पर लोग कटने-फटने की स्थिति में टांके लगवाने को पर्याप्त समझते हैं, लेकिन इस मामले में चेहरे से गर्दन तक गहरे जख्म और बाएं हाथ की छोटी ऊंंगली की नसें भी कट गई थीं। इससे ऊंगली भी लटक गई थी। परिजन के मुताबिक आदित्य घायल होने के बाद सिर्फ इलाज के लिए यानी टांके लगवाने खून से लथपथ निजी अस्पताल पहुंचा था। पर यहां जख्म पर टांकों की चुभन के बजाय रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की गई। युवक के चेहरे पर ऊपर के होंठ से लेकर गर्दन तक आठ-नौ इंच लंबा गहरा घाव था। टांके लगाते तो इसके गहरे जख्म के निशान मिटने मुश्किल थे।
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प्लास्टिक सर्जन डॉ. कौशल कुमार के मुताबिक ऐसी स्थिति में टांके के बजाय त्वचा, मांसपेशियों, टिश्यू और नसों की परत-दर-परत मरम्मत की जाती है। इससे सर्जरी के बाद निशान नजर नहीं आते। इसी वजह से युवक की सर्जरी में करीब साढ़े तीन घंटे का वक्त लगा और सफल रहा।
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जहां था जख्म, वहीं के लिए टिश्यू, अन्य अंग सुरक्षित

डॉ. कुमार के अनुसार इस सर्जरी में पहले चोट की गहराई और प्रभावित हिस्से की जांच की गई। त्वचा, मांसपेशियों, नसों, रक्तवाहिकाओं और अन्य टिश्यू की क्षति के आकलन के बाद माइक्रोसर्जरी तकनीकी से उन्हें जोड़ा गया। इसमें शरीर के अन्य अंगों के ऊतकों का प्रयोग नहीं होता। कांट-छांट नहीं करनी पड़ती। जहां जख्म होता है, उन्हीं के टिश्यू का प्रयोग करते हैं। कहा कि रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी सिर्फ मरीज की जान बचाने के साथ, चेहरे की प्राकृतिक बनावट और अंगों की कार्यक्षमता सुरक्षित रहती है। सर्जरी का खर्च न्यूनतम 25 हजार से शुरू है।


जिला अस्पतालों में प्लास्टिक सर्जन का पद रिक्त

रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी फिलहाल निजी अस्पतालों में ही हो रही है। सरकारी अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन नहीं हैं। जिला अस्पताल में एक पद है वह भी तीन साल से रिक्त है। जले, झुलसे मरीजों को जनरल सर्जन ही देख रहे हैं। स्वस्थ होने पर मरीज आर्थिक क्षमता के अनुसार प्लास्टिक सर्जरी कराते हैं। एडी एसआईडी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक रिक्त पद पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा है। अभी तक कोई जवाब नहीं मिला।
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