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Bareilly News: रेखा ने निशुल्क इलाज के लिए शासन तक किया संघर्ष, ताकि हीमोफीलिया पीड़ितों को न पड़े भटकना

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sun, 08 Mar 2026 11:13 AM IST
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सार

बरेली की रेखा रानी ने हीमोफीलिया पीड़ित अपने बच्चे के दर्द को महसूस किया। इसके बाद उन्होंने इस रोग के निशुल्क इलाज के लिए शासन तक संघर्ष किया। आखिरकार उनका संघर्ष रंग लाया और वर्ष 2015 में जिला अस्पताल में हीमोफीलिया मरीजों के निशुल्क इलाज की सेवा शुरू हुई। 

Rekha fought till the government for free treatment of haemophilia
बेटे मानस के साथ रेखा रानी - फोटो : संवाद
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विस्तार

जीवन में कई बार ऐसे हालात बनते हैं जब इंसान खुद के साथ दूसरों की मदद के बारे में सोचने लगता है। बरेली की रेखा रानी ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने हीमोफीलिया पीड़ित अपने बच्चे के दर्द को महसूस किया। लाइलाज रोग के निशुल्क इलाज के लिए शासन तक संघर्ष किया।

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आखिरकार वर्ष 2015 में जिला अस्पताल में हीमोफीलिया मरीजों के निशुल्क इलाज यानी फैक्टर आठ की सेवा शुरू हुई। तभी इन्होंने जीवन रेखा हीमोफीलिया जन कल्याण समिति गठित की। 11 वर्षों में समिति से बरेली मंडल के 250 से ज्यादा पीड़ित जुड़कर निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले रहे हैं।
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रेखा रानी के मुताबिक, बेटा जब तीन माह का था तब जोड़ों में गांठ पड़ने लगी थीं। निजी अस्पताल में जांच कराई तो हीमोफीलिया का पता चला। बेटे को छह साल तक गोद में लेकर इलाज के लिए दिल्ली, लखनऊ जाते थे। इसी संघर्ष के दौरान बरेली मंडल में भी हीमोफीलिया फैक्टर आठ निशुल्क उपलब्धता के लिए शासन को पत्र भेजा, पर सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद बरेली मंडल के सरकारी, निजी अस्पतालों में संपर्क कर 40 पीड़ितों की सूची बनाकर शासन को भेजी तब उन्होंने फैक्टर आठ उपलब्ध कराया।

आनुवांशिक रोग है हीमोफीलिया, जागरूकता ही बचाव
खन्नू मोहल्ला निवासी रेखा रानी के मुताबिक, हीमोफीलिया आनुवांशिक रोग है। महिलाएं इसमें कैरियर होती हैं। बताया कि वे खुद कैरियर थीं तभी बेटे को हीमोफीलिया हुआ। इससे पूर्व उनकी नानी भी कैरियर थीं। इससे उनके मामा को और मौसी के बेटे को भी हीमोफीलिया था। भविष्य में अब कोई इस रोग के चपेट में न आए इसका प्रयास कर रही हैं। कहा कि विवाह पूर्व जेनेटिक टेस्ट कराएं तो इससे भविष्य सुरक्षित रहेगा।

एक पहल से 20 जिलों के पीड़ितों को मिली राहत
पहले इस रोग के प्रति जागरुकता कम थी पर रेखारानी के प्रयास से लोगों को बीमारी के बारे में पता है। अस्पताल में पहले न जांच होती थी, न दवा मिलती थी, पर अब सब निशुल्क है। पूर्व में वंचित 20 जिलों के पीड़ितों को राहत मिली है। जिला अस्पताल में अलग वार्ड, डॉक्टर तैनात हैं। हीमोफीलिया रोगी के जोड़ में सूजन, रक्तस्राव होता है। खून बहना न रुके तो जान जा सकती है। इसका सटीक इलाज बोनमैरो ट्रांसप्लांट है।

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