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UP News: जुलाई में सर्पदंश के बढ़े मामले, बरतें सावधानी; जानिए सांप डसे तो क्या करें... क्या न करें

Wed, 15 Jul 2026 06:22 PM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Wed, 15 Jul 2026 06:22 PM IST
सार

रसात के मौसम में सर्पदंश के मामले बढ़ गए हैं। बरेली जिला अस्पताल में जुलाई में 28 पीड़ित पहुंचे, जिनमें से एक की मौत हुई। समय पर उपचार मिलने से 27 मरीजों की जान बच गई। 

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Snakebite cases on the rise in Bareilly know what to do and what not to do if bitten
कोबरा सांप (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : संवाद

विस्तार

बरसात में सर्पदंश के मामले बढ़ने लगे हैं। बरेली के जिला अस्पताल में जनवरी से अब तक 56 सर्पदंश पीड़ित इलाज के लिए पहुंचे। इनमें से 28 मामले जुलाई के हैं। समय पर एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) लगने से 27 मरीजों की जान बच गई। देर से पहुंचे एक मरीज की मौत हुई।

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आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जिले में सर्पदंश के 136 मामले स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचे। इनमें से 11 लोगों की मौत हुई थी। इस वर्ष अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। दो मृतकों के आश्रितों को दैवीय आपदा राहत मद के तहत चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।
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मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अखिलेश्वर सिंह के मुताबिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), जिला अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम निशुल्क लगती है। सर्पदंश के बाद शुरुआती एक से तीन घंटे में अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है। समय पर इलाज से बचाव की संभावना बढ़ती है। झाड़फूंक, नीम की पत्ती चबाना आदि गतिविधि घातक हो सकती है।
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ये बरतें सावधानी
डॉ. अखिलेश्वर सिंह ने कहा कि खेत या झाड़ियों में जाते समय ऊंचे जूते पहनने, टॉर्च का इस्तेमाल करने, तेज कदमों से आवाज करते हुए गुजरें। 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जरूरी, सत्यापन के बाद मिलेगी आर्थिक मदद
दैवीय आपदा प्रभारी कुंवर अक्षत सिंह के मुताबिक, सर्पदंश से मृत्यु होने पर दैवीय आपदा राहत मद से आश्रितों को चार लाख रुपये की सहायता दी जाती है। इसके लिए मृत्यु की वजह सर्पदंश होना चिकित्सकीय और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से प्रमाणित होना चाहिए। संबंधित थाने और राजस्व विभाग के सत्यापन के बाद प्रस्ताव जिला प्रशासन के पास पहुंचता है। स्वीकृति मिलने पर राशि आश्रित के बैंक खाते में भेजी जाती है।

बारिश में इसलिए बढ़ते हैं सर्पदंश के मामले
- बारिश से बिल में पानी भरने से सांप निकलकर बाहर सूखी और सुरक्षित जगह पर आ जाते हैं।
- खरीफ सीजन में धान की रोपाई व अन्य कृषि कार्य होते हैं। यहां सांप छिपे हो सकते हैं।
- घास और झाड़ियां छिपने के लिए अनुकूल होती हैं। सांप यहां रहते हैं। खतरा भांपने पर डसते हैं।
- सांप का आहार चूहे, मेंढक होते हैं। इसकी तलाश में सांप आबादी और खेतों की ओर आ जाते हैं।
- रात में सांप नहीं दिखते। बिना रोशनी के पशुशाला में कतई न जाएं।

सांप काट ले तो करें ये उपाय
- मरीज को शांत रखें, अस्पताल पहुंचाएं।
- जहां सांप ने काटा हो, उस अंग को स्थिर रखें। हिलाएं नहीं।
- काटने का समय याद रखें, चिकित्सक को बताएं।
- चिकित्सकीय सलाह पर एंटी स्नेक वेनम लगवाएं।

ऐसा बिल्कुल न करें
- झाड़-फूंक, तांत्रिक के पास जाने में समय बर्बाद न करें।
- सर्पदंश के स्थान पर चीरा न लगाएं। मुंह से जहर निकालने का प्रयास भी न करें।
- सर्पदंश के स्थान पर कपड़ा, रस्सी न बांधें।
- बर्फ, मिट्टी, तेल, मिर्च, हल्दी या कोई भी घरेलू लेप न लगाएं।

बरेली और आसपास के जिलों में मिलने वाले विषैले सांप
कोबरा : खतरा महसूस होने पर फन फैलाने पर पीछे चश्मे की आकृति दिखती है। इनमें न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है जो तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। सांस अटकने लगती है और जल्द इलाज न मिले तो मौत हो सकती है।

कॉमन करैत : चमकीले काले, नीले-काले रंग का होता है और पीठ पर सफेद धारियां होती हैं। रात में निकलता है। इसमें भी न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है, लेकिन कोबरा से ज्यादा घातक होता है। काटने पर दर्द बेहद कम होता है। ये इंसान पर हमलावर होते हैं।

रसेल वाइपर या कोरिआला 
शरीर भारी और सुस्त होता है। गहरे भूरे रंग के छल्ले या गोल धब्बे होते हैं। कुकर की सीटी जैसी फुफकार मारता है। इसका हीमोटॉक्सिक जहर खून के थक्के जमने की क्षमता कम कर देता है। आंतरिक रक्तस्राव से मौत हो सकती है।

बिना जहर वाले सांप : अजगर, धामन या घोड़ा पछाड़, चेकर्ड कीलबैक (पानी का सांप) भी बारिश में निकलते हैं।

इन्हें मिली सहायता राशि
वर्ष 2025 में सर्पदंश की वजह से जान गंवाने वालों के आश्रितों प्रेमवती, हेमवती, भानु प्रताप, पुष्पा, मदनलाल, क्षत्रपाल, भावना देवी, श्याम चरन, दुर्गा, रक्षपाल, भूपदेवी को सहायता राशि मिली। वर्ष 2026 में भूरी देवी व नफरन शाह को आर्थिक मदद मुहैया कराई गई।

वर्ष 2026 में इनकी हुई मृत्यु
- भमोरा मकरंदपुर के 14 वर्षीय अरुण।
- भदपुरा बिजासन की 65 वर्षीय पार्वती देवी।
- नवाबगंज की 45 वर्षीय सुनीता।
- नवाबगंज के शाहपुर निवासी चार वर्षीय अंश।
- जकाती के 54 वर्षीय सुल्तान।

जिला अस्पताल पहुंचे पीड़ित
जनवरी में तीन, फरवरी में दो, मार्च में आठ, अप्रैल में दो, मई में चार, जून में नौ, जुलाई में 28।
 
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