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UP News: पिता की हत्या, मां ने दी गवाही, दोषी बेटे को उम्रकैद, कोर्ट ने एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Published by: Mukesh Kumar
Updated Thu, 19 Mar 2026 10:27 PM IST
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सार
बरेली में पिता की हत्या करने के दोषी बेटे को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पांच माह में सुनवाई पूरी कर बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया। दोषी पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
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विस्तार
बरेली के अपर सत्र न्यायाधीश/स्पेशल जज गैंगस्टर एक्ट तबरेज अहमद ने पिता की हत्या के दोषी नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव इनायतपुर निवासी छत्रपाल मौर्य को उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पांच माह में सुनवाई पूरी कर बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया है। प्रकरण में दोषी की मां रामदेई की गवाही अहम रही।
नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव इनायतपुर निवासी ताराचंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 11 अप्रैल 2025 को उसका बड़ा भाई छत्रपाल मौर्य शाम छह बजे शराब पीकर घर आया। इसके बाद वह अपने पिता लालाराम से झगड़ने लगा। विवाद बढ़ने पर छत्रपाल ने पिता लालाराम की गर्दन पर हंसिये से वार कर दिया। इससे उनकी मौत हो गई। विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर ली। फिलहाल, छत्रपाल जेल में है।
मां ने बेटे के खिलाफ दी गवाही
अभियोजन ने छत्रपाल के भाई ताराचंद्र, मां रामदेई और ताराचंद्र की पत्नी महेश्वरी समेत सात गवाह पेश किए गए। सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने मां पर आरोप मढ़ने की कोशिश की, पर वह कामयाब नहीं हो सका। मां रामदेई ने भी बेटे के खिलाफ गवाही दी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने छत्रपाल को दोषी करार देते हुए कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है।
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नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव इनायतपुर निवासी ताराचंद्र ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 11 अप्रैल 2025 को उसका बड़ा भाई छत्रपाल मौर्य शाम छह बजे शराब पीकर घर आया। इसके बाद वह अपने पिता लालाराम से झगड़ने लगा। विवाद बढ़ने पर छत्रपाल ने पिता लालाराम की गर्दन पर हंसिये से वार कर दिया। इससे उनकी मौत हो गई। विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर ली। फिलहाल, छत्रपाल जेल में है।
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मां ने बेटे के खिलाफ दी गवाही
अभियोजन ने छत्रपाल के भाई ताराचंद्र, मां रामदेई और ताराचंद्र की पत्नी महेश्वरी समेत सात गवाह पेश किए गए। सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने मां पर आरोप मढ़ने की कोशिश की, पर वह कामयाब नहीं हो सका। मां रामदेई ने भी बेटे के खिलाफ गवाही दी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने छत्रपाल को दोषी करार देते हुए कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है।
इस तरह चली सुनवाई
तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 11 जुलाई 2025 को आरोपपत्र पर प्रसंज्ञान लिया था। चार सितंबर 2025 को मामला सत्र न्यायालय को सुपुर्द किया गया। अभियुक्त के खिलाफ 15 अक्तूबर 2025 को आरोप विरचित किए गए। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई।
मां बोलीं- हत्यारे बेटे से कभी जेल में नहीं मिली
पिता की हत्या में दोषी छत्रपाल मौर्य को उम्रकैद की सजा पर उसकी मां रामदेई, भाई ताराचंद्र ने संतुष्टि जताई है। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला एकदम सही है। दोषी अब जेल से बाहर नहीं आना चाहिए। मां रामदेई ने बताया कि फिलहाल छत्रपाल जेल में है। जब से वह जेल गया है, उसकी पत्नी और बच्चों के अलावा कोई उससे मिलने नहीं गया। उसकी पत्नी सुनीता रुद्रपुर की एक फैक्टरी में नौकरी करती है।
छत्रपाल का 10 साल का बेटा शोभित कक्षा चार और पांच साल की बेटी गौरी कक्षा दो में रुद्रपुर में ही पढ़ते हैं। ताराचंद्र ने बताया कि घटना के दिन घर पर उसकी पत्नी महेश्वरी और मां रामदेई ही थीं। पत्नी ने पिता की हत्या के संबंध में उसको कॉल करके सूचना दी थी। जेल में वह छत्रपाल से कभी नहीं मिला। मां रामदेई ने बताया कि उनको पता ही नहीं लगा कि छत्रपाल को उम्रकैद हो गई है। यह बात उनको मीडिया के जरिये आज ही मालूम हुई है।
तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 11 जुलाई 2025 को आरोपपत्र पर प्रसंज्ञान लिया था। चार सितंबर 2025 को मामला सत्र न्यायालय को सुपुर्द किया गया। अभियुक्त के खिलाफ 15 अक्तूबर 2025 को आरोप विरचित किए गए। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई।
मां बोलीं- हत्यारे बेटे से कभी जेल में नहीं मिली
पिता की हत्या में दोषी छत्रपाल मौर्य को उम्रकैद की सजा पर उसकी मां रामदेई, भाई ताराचंद्र ने संतुष्टि जताई है। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला एकदम सही है। दोषी अब जेल से बाहर नहीं आना चाहिए। मां रामदेई ने बताया कि फिलहाल छत्रपाल जेल में है। जब से वह जेल गया है, उसकी पत्नी और बच्चों के अलावा कोई उससे मिलने नहीं गया। उसकी पत्नी सुनीता रुद्रपुर की एक फैक्टरी में नौकरी करती है।
छत्रपाल का 10 साल का बेटा शोभित कक्षा चार और पांच साल की बेटी गौरी कक्षा दो में रुद्रपुर में ही पढ़ते हैं। ताराचंद्र ने बताया कि घटना के दिन घर पर उसकी पत्नी महेश्वरी और मां रामदेई ही थीं। पत्नी ने पिता की हत्या के संबंध में उसको कॉल करके सूचना दी थी। जेल में वह छत्रपाल से कभी नहीं मिला। मां रामदेई ने बताया कि उनको पता ही नहीं लगा कि छत्रपाल को उम्रकैद हो गई है। यह बात उनको मीडिया के जरिये आज ही मालूम हुई है।
समाज को प्रभावित करता है इस तरह का अपराध
कोर्ट ने कहा कि न्यायालय का कर्तव्य है कि वह पीड़ित के अधिकारों का ध्यान रखे। पिता की हत्या जैसा अपराध समाज के बहुत बड़े वर्ग को प्रभावित करता है। अपराधी को दंड देने का उद्देश्य समाज में विधि का भय, शांति स्थापना व राज्य की विधि व्यवस्था बनाए रखना होता है।
कोर्ट ने कहा कि न्यायालय का कर्तव्य है कि वह पीड़ित के अधिकारों का ध्यान रखे। पिता की हत्या जैसा अपराध समाज के बहुत बड़े वर्ग को प्रभावित करता है। अपराधी को दंड देने का उद्देश्य समाज में विधि का भय, शांति स्थापना व राज्य की विधि व्यवस्था बनाए रखना होता है।