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UP News: युद्ध की आग से तपा कोलतार, कीमतों में उछाल से बरेली में 800 करोड़ के विकास कार्यों पर असर

सौरभ श्रीवास्तव, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Mon, 23 Mar 2026 04:30 PM IST
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सार

पश्चिमी एशिया में छिड़े युद्ध का असर अब विकास कार्यों पर भी पड़ने लगा है। युद्ध के कारण कोलतार की कीमत दोगुनी हो गई है। इससे बरेली जिले में विभिन्न विभागों के करीब 800 करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका है।

Surge in Coal Tar Prices Impacts rs 800 Crore Development Works in Bareilly
कोतवाली के पास कोलतार डालकर बनाई गई सड़क - फोटो : संवाद
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विस्तार

पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से कोलतार की कीमतों में 40 हजार रुपये प्रति टन तक का उछाल आया है। फरवरी में जो कोलतार जीएसटी समेत 42,800 रुपये प्रति टन के भाव पर उपलब्ध था, अब उसके दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं। मथुरा और पानीपत की रिफाइनरी से होने वाली आपूर्ति भी प्रभावित है। आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। अकेले बरेली जिले में ही विभिन्न विभागों के करीब 800 करोड़ के विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका है।

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इस अनपेक्षित महंगाई का सबसे ज्यादा खामियाजा उन ठेकेदारों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने पुराने रेट पर टेंडर लिए थे। अब महंगे दामों पर कोलतार खरीदना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। आलम यह है कि अग्रिम भुगतान करने के बावजूद रिफाइनरियों से मांग के अनुरूप माल नहीं मिल पा रहा है। शहर और आसपास के इलाकों में सड़क निर्माण, पेंट उद्योग और अन्य कार्यों के लिए प्रतिदिन करीब एक हजार टन कोलतार की जरूरत होती है। इसका बड़ा हिस्सा सड़कों के निर्माण में खप जाता है। ईरान और ओमान जैसे देशों से आयात बंद होने के कारण बाजार में इसकी भारी किल्लत पैदा हो गई है।
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ठेकेदारों ने दिया अल्टीमेटम 
वित्तीय वर्ष की समाप्ति करीब होने के कारण लोक निर्माण, एनएचएआई, नगर निगम, सेतु निगम और बीडीए जैसे विभागों के सड़क से जुड़े निर्माण कार्यों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ठेकेदार किसी तरह पुराने स्टॉक से आधा-अधूरा काम निपटाकर भुगतान पाने की जुगत में हैं, ताकि मार्च क्लोजिंग तक कुछ राहत मिल सके। हालांकि, ठेकेदारों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि कीमतें स्थिर नहीं हुईं और आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो एक अप्रैल से काम बाधित हो सकता है।

इस तरह प्रभावित हो रहे विकास कार्य
नगर निगम के ठेकेदार अमित खंडेलवाल ने बताया कि एक किलोमीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण में करीब सात मीट्रिक टन कोलतार की जरूरत होती है। यानी पुराने भाव 42,800 प्रति टन के हिसाब से यह 29.96 लाख रुपये लगता था। अब इतने कोलतार की कीमत 57.96 लाख रुपये तक पहुंच गई है। अकेले कोलतार की कीमत दोगुनी होने से लागत भी दोगुनी हो गई है।

पीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता भगत सिंह ने बताया कि जिस दर से टेंडर हुए हैं, ठेकेदारों को उसी पर काम करना होगा। जब नए टेंडर होंगे तो नई दरों का निर्धारण किया जाएगा। नगर निगम के एक्सईएन राजीव राठी ने कहा कि रिवाइज एस्टीमेट के लिए अभी कोई प्रार्थना पत्र नहीं आया है। जो पुराने ठेके हैं, उन्हें निर्धारित शर्तों पर ही पूरा कराया जाएगा। 

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