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Basti News: किल्लत के बीच सहालग में बढ़ी खपत तो सूख गए आधे से अधिक पेट्रोल पंप
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गांधीनगर मार्ग पर स्थित बंद पेट्रोल पंप। संवाद
- फोटो : 1
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बस्ती। जिले में डीजल-पेट्रोल की पहले से किल्लत चल रही है। इधर, सहालग में गाड़ियों के अधिक चलने से डीजल-पेट्रोल की खपत बढ़ गई है। इसकी वजह से अधिकांश पेट्रोल पंप ड्राई होते जा रहे हैं। संचालकों का कहना है कि 50 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल पंपों पर डीजल-पेट्रोल उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि विभाग जिले में महज 15 पंप बंद होने की बात कर रहा है। जबकि सच्चाई इससे इतर है।
सोमवार की शाम से ही शहर मालवीय मार्ग पर तीन पंप, गांधी नगर मार्ग पर दो पंप, दक्षिण, दरवाजा, रेलवे स्टेशन और कचहरी स्थित पंप डीजल-पेट्रोल के अभाव में बंद कर दिए गए। मंगलवार को केवल कचहरी स्थित पेट्रोल पंप पर ही डीजल-पेट्रोल मिल रहा था। बाकी पंप बंद पाए गए। जानकारों का कहना है कि रसोई गैस की तरह अब डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति में भी पचास प्रतिशत से अधिक की कटौती की जा रही है। इस्राइल-ईरान युद्ध के शुरूआती दौर में ही पेट्रोलियम कंपनियों ने क्रेडिट व्यवस्था खत्म कर दी है।
इस वजह से कम पूंजी वाले पेट्रोल पंप मालिक टूट गए। उन्हें अपना पंप बंद रखना पड़ रहा है। अधिक बिक्री करने वाले पंप संचालक किसी तरह एडवांस भुगतान भेजकर डिपो से इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करते रहे। अब यह कठिन हो गया है। संचालकों का कहना है कि एडवांस भुगतान के साथ डिमांड भेजने के कम से कम तीन दिन बाद डीजल-पेट्रोल से भरा टैंकर मुहैया हो रहा है। पहले की तरह त्वरित आपूर्ति न होने से पेट्रोल पंप ड्राई पड़ जा रहे हैं।
बताया यह भी जा रहा हैं कि ऑयल डिपो से रूटवार दस में से एक दो पंप पर ही डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में संबंधित क्षेत्र की भीड़ एक ही पंप पर टूट पड़ रही है। जिससे कुछ घंटों के वितरण में डीजल-पेट्रोल खत्म हो जा रहा है।
यदि सभी पंपों पर नियमित आपूर्ति हो तो किसी एक जगह भीड़ नहीं एकत्र होने पाएगी। जिले में कुल 183 पेट्रोल पंप हैं। जानकारों के अनुसार 100 से अधिक पंप डिपो से आपूर्ति न पाने की वजह से बंद हो गए हैं।
एडवांस भुगतान के साथ डिमांड भेजकर तीन से चार दिन तक डीजल-पेट्रोल के टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है। पेट्रोल पंप संचालक संबंधित कंपनियों के अधिकारियों से लगातार संपर्क कर रहे हैं लेकिन, उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है।
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सोमवार की शाम से ही शहर मालवीय मार्ग पर तीन पंप, गांधी नगर मार्ग पर दो पंप, दक्षिण, दरवाजा, रेलवे स्टेशन और कचहरी स्थित पंप डीजल-पेट्रोल के अभाव में बंद कर दिए गए। मंगलवार को केवल कचहरी स्थित पेट्रोल पंप पर ही डीजल-पेट्रोल मिल रहा था। बाकी पंप बंद पाए गए। जानकारों का कहना है कि रसोई गैस की तरह अब डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति में भी पचास प्रतिशत से अधिक की कटौती की जा रही है। इस्राइल-ईरान युद्ध के शुरूआती दौर में ही पेट्रोलियम कंपनियों ने क्रेडिट व्यवस्था खत्म कर दी है।
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इस वजह से कम पूंजी वाले पेट्रोल पंप मालिक टूट गए। उन्हें अपना पंप बंद रखना पड़ रहा है। अधिक बिक्री करने वाले पंप संचालक किसी तरह एडवांस भुगतान भेजकर डिपो से इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करते रहे। अब यह कठिन हो गया है। संचालकों का कहना है कि एडवांस भुगतान के साथ डिमांड भेजने के कम से कम तीन दिन बाद डीजल-पेट्रोल से भरा टैंकर मुहैया हो रहा है। पहले की तरह त्वरित आपूर्ति न होने से पेट्रोल पंप ड्राई पड़ जा रहे हैं।
बताया यह भी जा रहा हैं कि ऑयल डिपो से रूटवार दस में से एक दो पंप पर ही डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में संबंधित क्षेत्र की भीड़ एक ही पंप पर टूट पड़ रही है। जिससे कुछ घंटों के वितरण में डीजल-पेट्रोल खत्म हो जा रहा है।
यदि सभी पंपों पर नियमित आपूर्ति हो तो किसी एक जगह भीड़ नहीं एकत्र होने पाएगी। जिले में कुल 183 पेट्रोल पंप हैं। जानकारों के अनुसार 100 से अधिक पंप डिपो से आपूर्ति न पाने की वजह से बंद हो गए हैं।
एडवांस भुगतान के साथ डिमांड भेजकर तीन से चार दिन तक डीजल-पेट्रोल के टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है। पेट्रोल पंप संचालक संबंधित कंपनियों के अधिकारियों से लगातार संपर्क कर रहे हैं लेकिन, उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है।

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