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Basti News: शीतल नीर और मिलावटी पनीर, बिगड़ जाएगा शरीर
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बोतल बंद पानी।
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बस्ती। सहालग के सीजन में शीतल नीर और सफेद पनीर संभल कर खाएं-पीएं। कहीं इसके सेवन से सेहत न बिगड़ जाए। चूंकि, मिलावटखोर आमजन की सेहत का ख्याल रखने के बजाय खुद के आमदनी को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में खराब पनीर और पानी की सप्लाई कर दे रहे हैं। इसके सेवन से सेहत बिगड़ सकती है।
बता दें कि सहालग सीजन में वैसे भी पनीर की खपत दो से तीन गुना तक बढ़ जाती। हालांकि दूध उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं होती, मगर बिचौलिए डिमांड के आधार पर आपूर्ति का वादा कर लेते हैं और बाहरी पनीर से मांग पूरी कर देते हैं। ऐसा चार गुना मुनाफा कमाने के लालच में करते हैं।
बताते हैं कि 35 से 40 क्विंटल पनीर की खपत थी, जो अब यह खपत 150 क्विंटल तक पहुंच गई है। लोकल दुकानदार 270-280 रुपये किलो पनीर दे रहे हैं, जिसमें मिलावट की आशंका है।
वहीं दुकानों पर पनीर 350 से 400 रुपये किलो बिक रहा है। ऐसे में मिलावटखोर पनीर में मिलावट कर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिले में दूध का उत्पादन रोजाना 10 हजार लीटर के करीब बताई जा रही है, जबकि इससे इतर पनीर की खपत जिले में अधिक हो गई है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए मिलावटखोर मिलावट करके से बाज नहीं आ रहे हैं। इसका खुलासा रिपोर्ट में भी हो चुका है।
बताते हैं कि सहालग में लोग खाने में पनीर ज्यादा पसंद करते हैं। शादी में पनीर की मांग रहती है। इसका फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं। बाहर से मिलावटी पनीर मंगा रहे हैं। जो पाउडर, रिफाइंड समेत अन्य मिलावटी सामग्री से तैयार होता है। इसकी कीमत 120 रुपये के करीब होती है और मिलावटखोर इसे 220 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में बेच रहे हैं। जहां बाजार में इसकी कीमत 270 से 280 पहुंच जाती है।
शादी विवाह में लोग सस्ते के चक्कर में इसकी खरीदारी भी कर रहे हैं, हालांकि खरीदते समय इसे पहचानना मुश्किल होता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग में आई पनीर की रिपोर्ट में विदेशी वसा रिफाइंड की पुष्टि हुई है। इसके सेवन से पेट में कई रोग पैदा हो सकते हैं।
विभाग का कहना है कि दिसंबर में गनेशपुर में एक बिना नंबर प्लेट के आटो में मिलावटी पनीर लेकर चालक जा रहा था, तभी पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान उसे पकड़ लिया था। जांच में कई किलो पनीर जब्त करके नष्ट कराया गया था। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था, अब आई जांच रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि हुई है।
पनीर में विदेशी वसा रिफाइंड समेत अन्य तत्व पाया गया है, जिसके सेवन से सेहत खराब हो सकती है। वहीं, नवंबर में रोडवेज स्थित फैक्टरी से लिए गए पनीर सैंपल भी फेल आया है। असुरक्षित श्रेणी में है। उसमें भी विदेशी वसा पाया गया है। वहीं, जिले के दो फैक्टरी से लिए गए बोतलबंद पानी में भी कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। दोनों पानी की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है।
सेवन से दस्त व उल्टी का खतरा : जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. विजय तिवारी का कहना है कि पनीर मिलावटी है तो उससे कई बीमारियां हो सकती हैं, मिलावटी पनीर से पेट दर्द, उल्टी, डायरिया, एलर्जी, और लिवर-किडनी को नुकसान हो सकता है। लंबे समय तक सेवन करने पर हार्मोनल असंतुलन और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे मरीज अक्सर आते हैं, जांच के बाद दवा दी जाती है।
पानी प्लांट के जांच में भी ढिलाई, नौ में से छह की ही हुई जांच : विभागीय आंकड़ों की बात करें तो जनपद में नौ फैक्टरी संचालित हैं, जहां पर पानी बोतल में पैक करके बाजार में भेजते हैं। विभाग जांच में भी ढिलाई कर रहा है।
बताया गया कि सिर्फ छह फैक्टरी पर जांच हुई, तीन की जांच नहीं हो पाई है। बताया गया कि वह बंद करके कहीं चले गए थे। इससे मामला संदिग्ध दिख रहा है। वहीं, यहीं पर संचालित दो फैक्टरी से लिए गए पानी के सैंपल फेल हो गए हैं। पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है।
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बता दें कि सहालग सीजन में वैसे भी पनीर की खपत दो से तीन गुना तक बढ़ जाती। हालांकि दूध उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं होती, मगर बिचौलिए डिमांड के आधार पर आपूर्ति का वादा कर लेते हैं और बाहरी पनीर से मांग पूरी कर देते हैं। ऐसा चार गुना मुनाफा कमाने के लालच में करते हैं।
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बताते हैं कि 35 से 40 क्विंटल पनीर की खपत थी, जो अब यह खपत 150 क्विंटल तक पहुंच गई है। लोकल दुकानदार 270-280 रुपये किलो पनीर दे रहे हैं, जिसमें मिलावट की आशंका है।
वहीं दुकानों पर पनीर 350 से 400 रुपये किलो बिक रहा है। ऐसे में मिलावटखोर पनीर में मिलावट कर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिले में दूध का उत्पादन रोजाना 10 हजार लीटर के करीब बताई जा रही है, जबकि इससे इतर पनीर की खपत जिले में अधिक हो गई है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए मिलावटखोर मिलावट करके से बाज नहीं आ रहे हैं। इसका खुलासा रिपोर्ट में भी हो चुका है।
बताते हैं कि सहालग में लोग खाने में पनीर ज्यादा पसंद करते हैं। शादी में पनीर की मांग रहती है। इसका फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं। बाहर से मिलावटी पनीर मंगा रहे हैं। जो पाउडर, रिफाइंड समेत अन्य मिलावटी सामग्री से तैयार होता है। इसकी कीमत 120 रुपये के करीब होती है और मिलावटखोर इसे 220 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में बेच रहे हैं। जहां बाजार में इसकी कीमत 270 से 280 पहुंच जाती है।
शादी विवाह में लोग सस्ते के चक्कर में इसकी खरीदारी भी कर रहे हैं, हालांकि खरीदते समय इसे पहचानना मुश्किल होता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग में आई पनीर की रिपोर्ट में विदेशी वसा रिफाइंड की पुष्टि हुई है। इसके सेवन से पेट में कई रोग पैदा हो सकते हैं।
विभाग का कहना है कि दिसंबर में गनेशपुर में एक बिना नंबर प्लेट के आटो में मिलावटी पनीर लेकर चालक जा रहा था, तभी पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान उसे पकड़ लिया था। जांच में कई किलो पनीर जब्त करके नष्ट कराया गया था। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था, अब आई जांच रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि हुई है।
पनीर में विदेशी वसा रिफाइंड समेत अन्य तत्व पाया गया है, जिसके सेवन से सेहत खराब हो सकती है। वहीं, नवंबर में रोडवेज स्थित फैक्टरी से लिए गए पनीर सैंपल भी फेल आया है। असुरक्षित श्रेणी में है। उसमें भी विदेशी वसा पाया गया है। वहीं, जिले के दो फैक्टरी से लिए गए बोतलबंद पानी में भी कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। दोनों पानी की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है।
सेवन से दस्त व उल्टी का खतरा : जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. विजय तिवारी का कहना है कि पनीर मिलावटी है तो उससे कई बीमारियां हो सकती हैं, मिलावटी पनीर से पेट दर्द, उल्टी, डायरिया, एलर्जी, और लिवर-किडनी को नुकसान हो सकता है। लंबे समय तक सेवन करने पर हार्मोनल असंतुलन और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे मरीज अक्सर आते हैं, जांच के बाद दवा दी जाती है।
पानी प्लांट के जांच में भी ढिलाई, नौ में से छह की ही हुई जांच : विभागीय आंकड़ों की बात करें तो जनपद में नौ फैक्टरी संचालित हैं, जहां पर पानी बोतल में पैक करके बाजार में भेजते हैं। विभाग जांच में भी ढिलाई कर रहा है।
बताया गया कि सिर्फ छह फैक्टरी पर जांच हुई, तीन की जांच नहीं हो पाई है। बताया गया कि वह बंद करके कहीं चले गए थे। इससे मामला संदिग्ध दिख रहा है। वहीं, यहीं पर संचालित दो फैक्टरी से लिए गए पानी के सैंपल फेल हो गए हैं। पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है।
