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Basti News: केवाईसी और बुकिंग के उलझन में उपभोक्ता...घंटों कतार में लग रहे
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:49 PM IST
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- शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की एजेंसियों पर उमड़ रही है भीड़, शिकायत भी बेअसर
बस्ती। जिले में रसोई गैस की किल्लत और तकनीकी खामियों ने उपभोक्ताओं के साथ होटल-रेस्टोरेंट संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गैस एजेंसियों पर अव्यवस्था के चलते उपभोक्ताओं और स्टाफ के बीच लगातार नोकझोंक हो रही है। बुकिंग से लेकर ई-केवाईसी तक के लिए लोगों को घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। वहीं, शिकायत भी बेअसर दिख रहा है।
शहर के रहमतगंज निवासी इकबाल अहमद ने बताया कि कोतवाली के पास स्थित गैस एजेंसी पर बुकिंग के बाद पर्ची कटवाने गए थे। 18 मार्च को बुकिंग थी, फिर भी पर्ची नहीं मिली। दूसरे दिन भी गए, लेकिन जिम्मेदार पर्ची काटने के बजाय झगड़ा करने लगे। इसकी शिकायत अब मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की है।
मनहनडीह गांव निवासी अमरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि वह 20 दिन से गैस सिलिंडर की पर्ची कटवाने के लिए दौड़ रहे हैं। स्टेशन रोड स्थित एजेंसी पर अव्यवस्था इतनी कि गैस मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं, गौरा निवासी राजेश ने बताया कि 15 दिन से सिलिंडर के लिए चक्कर लगा रहे हैं। पासबुक है। बुकिंग भी कर दी है, बावजूद इसके डिलीवरी नहीं हो रही है। इसके अलावा, तुर्कहिया के राधेश्याम ने बताया कि दो दिन कतार में लगने के बाद पासबुक जमा हुआ है। अभी टोकन मिलेगा, फिर पर्ची कटेगी। इसके बाद गैस मिलेगा कि नहीं यह भी पता नहीं है।
यही नहीं अन्य उपभोक्ताओं का कहना है कि विभिन्न गैस एजेंसियों पर अव्यवस्था का आलम है। मालवीय रोड स्थित गैस एजेंसी में उपभोक्ता स्टाफ के साथ भिड़ते नजर आए। यही हाल सिविल लाइंस क्षेत्र में रहा। उपभोक्ताओं का आरोप है कि ई-केवाईसी कराने के लिए कई घंटे खड़ा होना पड़ रहा है, फिर भी काम नहीं हो रहा। कभी उन्हें गोदाम भेजा जाता है तो कभी मुख्य कार्यालय।
इसके अलावा रेलवे स्टेशन रोड, मड़वानगर, मूड़घाट स्थित एजेंसी पर भी यही हाल है। कभी-कभी वेबसाइट सर्वर डाउन होने और केवाईसी प्रक्रिया ठप होने के कारण उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच जमकर विवाद हो रहा है। पुलिस तक बुलानी पड़ रही है। वहीं, आपूर्ति विभाग की निगरानी में गैस सिलिंडर बंटवाने का भी दावा फेल नजर आ रहा है।
होटल संचालकों ने ली राहत की सांस, कोयले का भी सहारा
पिछले कई दिनों से व्यावसायिक गैस सिलिंडर की किल्लत झेल रहे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को मंगलवार के दिन सप्लाई मिलने पर कुछ राहत मिली है। हालांकि, अनिश्चितता को देखते हुए कई दुकानदारों ने बैकअप के तौर पर कोयले का स्टॉक भी जमा कर लिया है, ताकि चूल्हे ठंडे न पड़ें। डीजल भट्ठी भी मंगवा लिए हैं। एक होटल कारोबारी ने बताया कि 1600 रुपये वाला व्यावसायिक गैस सिलिंडर 25 सौ रुपये में लेना पड़ रहा है। न देने पर वह भी नहीं मिलेगा। गैस एजेंसियों पर बुकिंग को लेकर अभी भी भारी मारामारी बनी हुई है।
शहर से कस्बों तक लंबी वेटिंग, 22 से 25 दिन का इंतजार
गैस की यह किल्लत केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि कस्बों और गांवों में स्थिति और भी गंभीर है। गायघाट क्षेत्र के निवासी बालजी ने बताया कि उन्होंने 15 मार्च को ऑनलाइन सिलिंडर बुक किया था, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी डिलीवरी नहीं हुई। गनेशपुर की राधिका ने बताया कि 26 फरवरी को आखिरी सिलिंडर मिला था। 23 मार्च को जब दोबारा बुकिंग की कोशिश की, तो सिस्टम ने बुकिंग स्वीकार नहीं की। उन्हें मैसेज मिला कि 12 अप्रैल से पहले सिलिंडर बुक नहीं हो सकेगा। यानी एक रिफिल के लिए उपभोक्ताओं को डेढ़ महीने तक का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि जिले में 40 एजेंसियां क्रियाशील हैं। बावजूद इसके गैस की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है।
गैस सिलिंडर आपूर्ति की स्थिति पर विभागीय टीमें नजर रख रही हैं। एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि स्टॉक की स्थिति को साझा करें। बुकिंग और ई-केवाईसी सामस्या आ रही है। इसी के चलते एजेंसी स्टाफ के साथ नोकझोंक हो रही है। ऐसी शिकायत मिल रही है। - विमल कुमार शुक्ल, डीएसओ, बस्ती।
- बुकिंग करने के बाद चार दिन से रेलवे स्टेशन स्थित गैस एजेंसी पर कतार में लग रहे हैं। जब तक नंबर आता है, पर्ची बनना बंद हो जाता है। रसोई गैस खत्म हो जाने का पर्ची बनाकर वापस कर दिया जाता है। इससे भोजन का संकट खड़ा हो गया है। - राजन कसौधन, पुरानी बस्ती
20 मार्च को गैस सिलिंडर के लिए बुकिंग कराए थे। तब से पटेल चौक स्थित एजेंसी पर जाकर गैस के लिए चक्कर लगा रहे हैं। इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कतार में लगने के बाद भी पर्ची नहीं कट पा रही है। अव्यवस्था हावी है। - पलालू, नई कॉलोनी, बस्ती
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बस्ती। जिले में रसोई गैस की किल्लत और तकनीकी खामियों ने उपभोक्ताओं के साथ होटल-रेस्टोरेंट संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गैस एजेंसियों पर अव्यवस्था के चलते उपभोक्ताओं और स्टाफ के बीच लगातार नोकझोंक हो रही है। बुकिंग से लेकर ई-केवाईसी तक के लिए लोगों को घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। वहीं, शिकायत भी बेअसर दिख रहा है।
शहर के रहमतगंज निवासी इकबाल अहमद ने बताया कि कोतवाली के पास स्थित गैस एजेंसी पर बुकिंग के बाद पर्ची कटवाने गए थे। 18 मार्च को बुकिंग थी, फिर भी पर्ची नहीं मिली। दूसरे दिन भी गए, लेकिन जिम्मेदार पर्ची काटने के बजाय झगड़ा करने लगे। इसकी शिकायत अब मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की है।
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मनहनडीह गांव निवासी अमरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि वह 20 दिन से गैस सिलिंडर की पर्ची कटवाने के लिए दौड़ रहे हैं। स्टेशन रोड स्थित एजेंसी पर अव्यवस्था इतनी कि गैस मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं, गौरा निवासी राजेश ने बताया कि 15 दिन से सिलिंडर के लिए चक्कर लगा रहे हैं। पासबुक है। बुकिंग भी कर दी है, बावजूद इसके डिलीवरी नहीं हो रही है। इसके अलावा, तुर्कहिया के राधेश्याम ने बताया कि दो दिन कतार में लगने के बाद पासबुक जमा हुआ है। अभी टोकन मिलेगा, फिर पर्ची कटेगी। इसके बाद गैस मिलेगा कि नहीं यह भी पता नहीं है।
यही नहीं अन्य उपभोक्ताओं का कहना है कि विभिन्न गैस एजेंसियों पर अव्यवस्था का आलम है। मालवीय रोड स्थित गैस एजेंसी में उपभोक्ता स्टाफ के साथ भिड़ते नजर आए। यही हाल सिविल लाइंस क्षेत्र में रहा। उपभोक्ताओं का आरोप है कि ई-केवाईसी कराने के लिए कई घंटे खड़ा होना पड़ रहा है, फिर भी काम नहीं हो रहा। कभी उन्हें गोदाम भेजा जाता है तो कभी मुख्य कार्यालय।
इसके अलावा रेलवे स्टेशन रोड, मड़वानगर, मूड़घाट स्थित एजेंसी पर भी यही हाल है। कभी-कभी वेबसाइट सर्वर डाउन होने और केवाईसी प्रक्रिया ठप होने के कारण उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच जमकर विवाद हो रहा है। पुलिस तक बुलानी पड़ रही है। वहीं, आपूर्ति विभाग की निगरानी में गैस सिलिंडर बंटवाने का भी दावा फेल नजर आ रहा है।
होटल संचालकों ने ली राहत की सांस, कोयले का भी सहारा
पिछले कई दिनों से व्यावसायिक गैस सिलिंडर की किल्लत झेल रहे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को मंगलवार के दिन सप्लाई मिलने पर कुछ राहत मिली है। हालांकि, अनिश्चितता को देखते हुए कई दुकानदारों ने बैकअप के तौर पर कोयले का स्टॉक भी जमा कर लिया है, ताकि चूल्हे ठंडे न पड़ें। डीजल भट्ठी भी मंगवा लिए हैं। एक होटल कारोबारी ने बताया कि 1600 रुपये वाला व्यावसायिक गैस सिलिंडर 25 सौ रुपये में लेना पड़ रहा है। न देने पर वह भी नहीं मिलेगा। गैस एजेंसियों पर बुकिंग को लेकर अभी भी भारी मारामारी बनी हुई है।
शहर से कस्बों तक लंबी वेटिंग, 22 से 25 दिन का इंतजार
गैस की यह किल्लत केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि कस्बों और गांवों में स्थिति और भी गंभीर है। गायघाट क्षेत्र के निवासी बालजी ने बताया कि उन्होंने 15 मार्च को ऑनलाइन सिलिंडर बुक किया था, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी डिलीवरी नहीं हुई। गनेशपुर की राधिका ने बताया कि 26 फरवरी को आखिरी सिलिंडर मिला था। 23 मार्च को जब दोबारा बुकिंग की कोशिश की, तो सिस्टम ने बुकिंग स्वीकार नहीं की। उन्हें मैसेज मिला कि 12 अप्रैल से पहले सिलिंडर बुक नहीं हो सकेगा। यानी एक रिफिल के लिए उपभोक्ताओं को डेढ़ महीने तक का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि जिले में 40 एजेंसियां क्रियाशील हैं। बावजूद इसके गैस की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है।
गैस सिलिंडर आपूर्ति की स्थिति पर विभागीय टीमें नजर रख रही हैं। एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि स्टॉक की स्थिति को साझा करें। बुकिंग और ई-केवाईसी सामस्या आ रही है। इसी के चलते एजेंसी स्टाफ के साथ नोकझोंक हो रही है। ऐसी शिकायत मिल रही है। - विमल कुमार शुक्ल, डीएसओ, बस्ती।
- बुकिंग करने के बाद चार दिन से रेलवे स्टेशन स्थित गैस एजेंसी पर कतार में लग रहे हैं। जब तक नंबर आता है, पर्ची बनना बंद हो जाता है। रसोई गैस खत्म हो जाने का पर्ची बनाकर वापस कर दिया जाता है। इससे भोजन का संकट खड़ा हो गया है। - राजन कसौधन, पुरानी बस्ती
20 मार्च को गैस सिलिंडर के लिए बुकिंग कराए थे। तब से पटेल चौक स्थित एजेंसी पर जाकर गैस के लिए चक्कर लगा रहे हैं। इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कतार में लगने के बाद भी पर्ची नहीं कट पा रही है। अव्यवस्था हावी है। - पलालू, नई कॉलोनी, बस्ती