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Basti News: जमींदोज नहीं किए गए जीर्ण-शीर्ण भवन, ढहने का खतरा बढ़ा
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प्रधान डाकघर जीर्ण-शीर्ण भवन में संचालित संवाद
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बस्ती। खंडहर हो चुके जर्जर भवन बरसात में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। नगर पालिका ने करीब पांच साल पहले 60 से अधिक भवनों को चिह्नित कर उनके स्वामियों को नोटिस जारी कर मकान खाली करने या मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यही वजह है कि इन जर्जर भवन अभी भी लोग निवास कर रहे और दुकानें संचालित हो रही हैं, इससे हादसे का खतरा बना हुआ है।
शहर में 60 से ज्यादा घर खंडहर बने चुके हैं। कुछ में नीचे दुकानें और ऊपर मकान हैं। जब तेज आंधी आती है तो अगल-बगल के लोग कांप उठते हैं, और घरों से बाहर निकल आते हैं, लेकिन इन घरों और दुकानों में रहने वाले बेफिक्र हैं। सस्ती किरायेदारी इनकी जान जोखिम में डाले हुए है। क्योंकि जिन मकानों में यह निश्चिंत भाव से रहते हैं। वह तकनीकी रूप से नगर पालिका की सूची में ध्वस्तीकरण योग्य हो चुके हैं, मगर करीब 10 लोग इसमें दुकान चला रहे हैं, जबकि इतने ही लोग इसमें किराए पर रहते हैं।
पांच साल पहले तेज बारिश में दो लोगों की मौत हो गई थी, और तीन लोग घायल हुए थे। इसके बाद भी अधिकारी नहीं चेते, सिर्फ मकान खाली कराने का नोटिस देकर खामोश हो गए। वहीं, जान जोखिम में डालकर लोग मौत के साए में जीने को राजी हैं। जानकारी के मुताबिक ज्यादातर घरों और दुकानों में किरायेदारी को लेकर विवाद है। यह विवाद लंबे समय से है। कम किराया होने के चलते इनमें रहने वाले लोग घरों को खाली नहीं करना चाहते हैं, लेकिन इन घरों के पड़ोसी परेशान हैं।
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अगर मकान गिरा तो नुकसान उनकी छतों को भी होगा। गांधीनगर में पड़ोसियों का कहना है कि कुछ दिन पहले देर रात आंधी आई थी, हम लोग परिवार के साथ बाहर निकल आए थे। नगर पालिका इन भवन मालिकों को नोटिस देकर भूल जाता है, जबकि जिला प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, महरीखांवा में बड़ा भवन जो जीर्ण-शीर्ण था, उसे भवन स्वामी जमींदोज करवा रहे, इससे आसपास रहने वाले राहत की सांस लिए हैं।
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जानमाल के खतरे की परवाह नहीं
गांधीनगर इलाके में कई जर्जर भवन हैं। शहर के सबसे भीड़-भाड़ वाले इलाके में शुमार गांधीनगर में रोज करीब 10 से 15 हजार लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन हर बार बरसात में अलर्ट जारी कर सिर्फ खानापूर्ति कर ली जाती है। इन भवनों में दुकान कर रहे लोगों को भी किसी तरह का डर नहीं है। गांधी नगर चौराहे के बीच में ही एक जर्जर भवन में करीब 10 से 12 दुकानें है। यह लोग बेफिक्री से व्यापार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मकान ऊपर से दिखने में जर्जर है, जबकि नींव इसकी बहुत मजबूत है। उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं लगता। यही हाल ओरीजोत मोड, गांधीनगर के दो अन्य आवास व दुकान, पुरानी के मंगल बाजार का है।
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सरकारी आवास व कार्यालय का भी हाल बेहाल
निजी, पट्टा छोड़ दीजिए, यहां सरकारी कार्यालय और आवास की भी दयनीय स्थिति है। जिला अस्पताल का आवासीय भवन, कृषि कार्यालय, स्टेडियम कॉलोनी आवासीय भवन, प्रधान डाकघर बस्ती, कचहरी डाकघर, गांधीनगर गांधी आश्रम भवन, पुराना बीएसए ऑफिस भवन, खैर कॉलोनी के कई आवास जर्जर हैं। ये भवन 80 से 100 साल के हो चुके हैं। जीर्ण-शीर्ण भवन होने के बावजूद इसमें कार्यालय चल रहे और कर्मचारी व अधिकारी उसमें निवास भी कर रहे। बारिश में लोग डरे-सहमे रहते हैं। बताते हैं कि जिनके अधीन भवन है वह ध्यान नहीं देते। ऐसे में कभी भी बड़ा खतरा हो सकता है। प्लास्टर, ईंट तक छोड़कर गिर रहे, सरिया दिखती है। आंकड़ों के अनुसार, 10 से अधिक सरकारी आवासीय भवन जर्जर और जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं।
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लोग बोले
हादसे के बाद प्रशासन जागेगा। डर लगता है कि अगर कभी तेज हवा या आंधी में हादसा हुआ और भवन गिरा तो रिश्तेदार के परिवार को नुकसान हो सकता है। जीर्ण-शीर्ण भवन को गिराकर नया बनाया जाए।
-आदित्य वर्मा, स्थानीय नागरिक
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प्रशासन को जर्जर भवन की चिंता नहीं। लंबे समय से गांधीनगर चौराहे का भवन जर्जर है। भीड़ भी खूब होती है। अगर यह गिर गया तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। अन्य भवन भी जर्जर हैं।
-विकास सिंह, स्थानीय नागरिक
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कोट
कुछ भवन नपा के अधीन नहीं हैं, जो भवन पुराने व जर्जर हैं, ऐसे करीब 60 लोगों को पूर्व में नोटिस जारी किया गया था। फिर से सर्वे कराकर चिह्नित कर नोटिस जारी किया जाएगा। सरकारी भवन कई विभागों के अधीन है, ऐसे में वहां हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
-अंगद गुप्ता, ईओ नगर पालिका, बस्ती।
कोट
पीडब्ल्यूडी के अधीन जो भवन हैं, उसका सर्वे कराया जाएगा। भवन निर्माण खंड को निर्देश दिए जाएंगे कि मरम्मत लायक भवन का प्रस्ताव बनाकर उसे सुधार जाए। जो भवन ध्वस्तीकरण लायक होंगे, उस पर नये सिरे से कार्रवाई होगी।
-आनंद कुमार, चीफ इंजीनियर, पीडब्यूडी, बस्ती।
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शहर में 60 से ज्यादा घर खंडहर बने चुके हैं। कुछ में नीचे दुकानें और ऊपर मकान हैं। जब तेज आंधी आती है तो अगल-बगल के लोग कांप उठते हैं, और घरों से बाहर निकल आते हैं, लेकिन इन घरों और दुकानों में रहने वाले बेफिक्र हैं। सस्ती किरायेदारी इनकी जान जोखिम में डाले हुए है। क्योंकि जिन मकानों में यह निश्चिंत भाव से रहते हैं। वह तकनीकी रूप से नगर पालिका की सूची में ध्वस्तीकरण योग्य हो चुके हैं, मगर करीब 10 लोग इसमें दुकान चला रहे हैं, जबकि इतने ही लोग इसमें किराए पर रहते हैं।
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पांच साल पहले तेज बारिश में दो लोगों की मौत हो गई थी, और तीन लोग घायल हुए थे। इसके बाद भी अधिकारी नहीं चेते, सिर्फ मकान खाली कराने का नोटिस देकर खामोश हो गए। वहीं, जान जोखिम में डालकर लोग मौत के साए में जीने को राजी हैं। जानकारी के मुताबिक ज्यादातर घरों और दुकानों में किरायेदारी को लेकर विवाद है। यह विवाद लंबे समय से है। कम किराया होने के चलते इनमें रहने वाले लोग घरों को खाली नहीं करना चाहते हैं, लेकिन इन घरों के पड़ोसी परेशान हैं।
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अगर मकान गिरा तो नुकसान उनकी छतों को भी होगा। गांधीनगर में पड़ोसियों का कहना है कि कुछ दिन पहले देर रात आंधी आई थी, हम लोग परिवार के साथ बाहर निकल आए थे। नगर पालिका इन भवन मालिकों को नोटिस देकर भूल जाता है, जबकि जिला प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, महरीखांवा में बड़ा भवन जो जीर्ण-शीर्ण था, उसे भवन स्वामी जमींदोज करवा रहे, इससे आसपास रहने वाले राहत की सांस लिए हैं।
जानमाल के खतरे की परवाह नहीं
गांधीनगर इलाके में कई जर्जर भवन हैं। शहर के सबसे भीड़-भाड़ वाले इलाके में शुमार गांधीनगर में रोज करीब 10 से 15 हजार लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन हर बार बरसात में अलर्ट जारी कर सिर्फ खानापूर्ति कर ली जाती है। इन भवनों में दुकान कर रहे लोगों को भी किसी तरह का डर नहीं है। गांधी नगर चौराहे के बीच में ही एक जर्जर भवन में करीब 10 से 12 दुकानें है। यह लोग बेफिक्री से व्यापार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मकान ऊपर से दिखने में जर्जर है, जबकि नींव इसकी बहुत मजबूत है। उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं लगता। यही हाल ओरीजोत मोड, गांधीनगर के दो अन्य आवास व दुकान, पुरानी के मंगल बाजार का है।
सरकारी आवास व कार्यालय का भी हाल बेहाल
निजी, पट्टा छोड़ दीजिए, यहां सरकारी कार्यालय और आवास की भी दयनीय स्थिति है। जिला अस्पताल का आवासीय भवन, कृषि कार्यालय, स्टेडियम कॉलोनी आवासीय भवन, प्रधान डाकघर बस्ती, कचहरी डाकघर, गांधीनगर गांधी आश्रम भवन, पुराना बीएसए ऑफिस भवन, खैर कॉलोनी के कई आवास जर्जर हैं। ये भवन 80 से 100 साल के हो चुके हैं। जीर्ण-शीर्ण भवन होने के बावजूद इसमें कार्यालय चल रहे और कर्मचारी व अधिकारी उसमें निवास भी कर रहे। बारिश में लोग डरे-सहमे रहते हैं। बताते हैं कि जिनके अधीन भवन है वह ध्यान नहीं देते। ऐसे में कभी भी बड़ा खतरा हो सकता है। प्लास्टर, ईंट तक छोड़कर गिर रहे, सरिया दिखती है। आंकड़ों के अनुसार, 10 से अधिक सरकारी आवासीय भवन जर्जर और जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं।
लोग बोले
हादसे के बाद प्रशासन जागेगा। डर लगता है कि अगर कभी तेज हवा या आंधी में हादसा हुआ और भवन गिरा तो रिश्तेदार के परिवार को नुकसान हो सकता है। जीर्ण-शीर्ण भवन को गिराकर नया बनाया जाए।
-आदित्य वर्मा, स्थानीय नागरिक
प्रशासन को जर्जर भवन की चिंता नहीं। लंबे समय से गांधीनगर चौराहे का भवन जर्जर है। भीड़ भी खूब होती है। अगर यह गिर गया तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है। अन्य भवन भी जर्जर हैं।
-विकास सिंह, स्थानीय नागरिक
कोट
कुछ भवन नपा के अधीन नहीं हैं, जो भवन पुराने व जर्जर हैं, ऐसे करीब 60 लोगों को पूर्व में नोटिस जारी किया गया था। फिर से सर्वे कराकर चिह्नित कर नोटिस जारी किया जाएगा। सरकारी भवन कई विभागों के अधीन है, ऐसे में वहां हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
-अंगद गुप्ता, ईओ नगर पालिका, बस्ती।
कोट
पीडब्ल्यूडी के अधीन जो भवन हैं, उसका सर्वे कराया जाएगा। भवन निर्माण खंड को निर्देश दिए जाएंगे कि मरम्मत लायक भवन का प्रस्ताव बनाकर उसे सुधार जाए। जो भवन ध्वस्तीकरण लायक होंगे, उस पर नये सिरे से कार्रवाई होगी।
-आनंद कुमार, चीफ इंजीनियर, पीडब्यूडी, बस्ती।