{"_id":"69f243abdc0c6c738202d856","slug":"gas-supply-system-is-not-back-on-track-long-queues-at-agencies-basti-news-c-207-1-bst1005-157754-2026-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: पटरी पर नहीं लौटी गैस आपूर्ति व्यवस्था...एजेंसियों पर लग रही लंबी कतार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: पटरी पर नहीं लौटी गैस आपूर्ति व्यवस्था...एजेंसियों पर लग रही लंबी कतार
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 29 Apr 2026 11:15 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
- दो सप्ताह तक नहीं आ रहा हैं नंबर, टोकन, पर्ची फिर डिलीवरी तक में झोल
- एक घंटे में ही खपा दे रहे हैं भरा सिलिंडर, मायूस लौट रहे उपभोक्ता
- देर रात से तपती दोपहर तक कतार में खड़े लोग, फिर भी गैस मिलना मुश्किल
बस्ती। जिले में गैस सिलिंडर की आपूर्ति व्यवस्था करीब डेढ़ माह बीतने के बाद भी पटरी पर नहीं लौट सकी है। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ताओं को बाउचर कटवाने, केवाईसी कराने और सिलिंडर लेने के लिए दिनभर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। इधर, कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति भी सीमित होने से हाहाकार जैसे हालत बन गए हैं। जिलेभर में रसोई गैस सिलिंडर की स्थिति गंभीर हो गई है।
दक्षिण दरवाजा-स्टेशन रोड स्थित, मालवीय रोड, रौतापार, जिला अस्पताल, पटेल चौक, कटरा स्थित एजेंसी समेत जिले की सभी 40 एजेंसियों पर अब भी उपभोक्ता लंबी लाइनों में लगने को मजबूर हैं। कॉमर्शियल गैस की कमी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है। अधिकतर व्यवसायी अब घरेलू गैस सिलिंडरों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे घरेलू सिलिंडरों की किल्लत और बढ़ गई है। इस स्थिति का फायदा उठाकर कई जगहों पर कालाबाजारी शुरू हो गई है। आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ रही हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि कई दिनों तक एजेंसियों के चक्कर लगाने के बावजूद न तो समय पर बाउचर कट पा रहा है और न ही सिलिंडर मिल रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से व्यवस्था सुधार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। वहीं, अब विद्यालयों में बनने वाले मध्याह्न भोजन पर भी रसोई गैस किल्लत की मार पड़ने वाली है। कई विद्यालयों के अध्यापक परेशान हैं कि उन्हें गैस नहीं मिल रहा है।
ओरीजोत के डॉ. राकेश मणि का कहना है कि 15 दिन पहले बुकिंग की थी, अभी तक सिलिंडर नहीं मिला है। एजेंसी पर न पर्ची कट रही है न ही होम डिलीवरी कर रहे हैं। बहादुरपुर के शुभम का कहना है कि विद्यालय में सिलिंडर खत्म हो गया है। नगर बाजार स्थिति एजेंसी पर गए तो नियम कानून बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का स्पष्ट आदेश है कि विद्यालयों में गैस की आपूर्ति निर्वाद की जाए। बाजवूद इसके गैस नहीं मिल रहा है। इससे भोजन बनने में संकट आएगा। इसी प्रकार एक विद्यालय के कर्मी खुद लाइन में लगकर सिलिंडर लेने पहुंचे थे, मगर वह भी नहीं प्राप्त किए।
बहादुरपुर के नितेश सिंह व शिव प्रताप ने बताया कि कई दिनों से लाइन में लगने के बाद भी सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं, एक-एक एजेंसी पर तीन से चार सौ सिलिंडर आ रहा है, इससे एक ही घंटे में सिलिंडर बंट जा रहा है। इससे तमाम उपभोक्ता मायूस होकर लौट जा रहे, फिर दूसरे दिन आकर लाइन में लग रहे हैं। रात 11 बजे से तपती दोपहरिया में खड़े होने के मजबूर हैं। बताते हैं कि टोकन, पर्ची और सिलिंडर डिलीवरी तक में झोल है, जबकि प्रशासन का दावा है कि आसानी से सिलिंडर मिल रहा, मगर एजेंसियों के बाहर और गोदाम पर लग रही कतार दावे को झूठा साबित कर रहा है।
जितनी आपूर्ति मिल रही है, उसे बंटवाया जा रहा है। एजेंसियों पर मनमानी न हो इसके लिए निगरानी की जा रही है। निरीक्षक की ड्यूटी लगाई गई है, जहां से शिकायत मिल रही है कार्रवाई की जा रही है। - विमल कुमार शुक्ल, डीएसओ, बस्ती।
-- -
Trending Videos
- एक घंटे में ही खपा दे रहे हैं भरा सिलिंडर, मायूस लौट रहे उपभोक्ता
- देर रात से तपती दोपहर तक कतार में खड़े लोग, फिर भी गैस मिलना मुश्किल
बस्ती। जिले में गैस सिलिंडर की आपूर्ति व्यवस्था करीब डेढ़ माह बीतने के बाद भी पटरी पर नहीं लौट सकी है। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ताओं को बाउचर कटवाने, केवाईसी कराने और सिलिंडर लेने के लिए दिनभर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। इधर, कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति भी सीमित होने से हाहाकार जैसे हालत बन गए हैं। जिलेभर में रसोई गैस सिलिंडर की स्थिति गंभीर हो गई है।
दक्षिण दरवाजा-स्टेशन रोड स्थित, मालवीय रोड, रौतापार, जिला अस्पताल, पटेल चौक, कटरा स्थित एजेंसी समेत जिले की सभी 40 एजेंसियों पर अब भी उपभोक्ता लंबी लाइनों में लगने को मजबूर हैं। कॉमर्शियल गैस की कमी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है। अधिकतर व्यवसायी अब घरेलू गैस सिलिंडरों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे घरेलू सिलिंडरों की किल्लत और बढ़ गई है। इस स्थिति का फायदा उठाकर कई जगहों पर कालाबाजारी शुरू हो गई है। आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उपभोक्ताओं का कहना है कि कई दिनों तक एजेंसियों के चक्कर लगाने के बावजूद न तो समय पर बाउचर कट पा रहा है और न ही सिलिंडर मिल रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से व्यवस्था सुधार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। वहीं, अब विद्यालयों में बनने वाले मध्याह्न भोजन पर भी रसोई गैस किल्लत की मार पड़ने वाली है। कई विद्यालयों के अध्यापक परेशान हैं कि उन्हें गैस नहीं मिल रहा है।
ओरीजोत के डॉ. राकेश मणि का कहना है कि 15 दिन पहले बुकिंग की थी, अभी तक सिलिंडर नहीं मिला है। एजेंसी पर न पर्ची कट रही है न ही होम डिलीवरी कर रहे हैं। बहादुरपुर के शुभम का कहना है कि विद्यालय में सिलिंडर खत्म हो गया है। नगर बाजार स्थिति एजेंसी पर गए तो नियम कानून बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का स्पष्ट आदेश है कि विद्यालयों में गैस की आपूर्ति निर्वाद की जाए। बाजवूद इसके गैस नहीं मिल रहा है। इससे भोजन बनने में संकट आएगा। इसी प्रकार एक विद्यालय के कर्मी खुद लाइन में लगकर सिलिंडर लेने पहुंचे थे, मगर वह भी नहीं प्राप्त किए।
बहादुरपुर के नितेश सिंह व शिव प्रताप ने बताया कि कई दिनों से लाइन में लगने के बाद भी सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं, एक-एक एजेंसी पर तीन से चार सौ सिलिंडर आ रहा है, इससे एक ही घंटे में सिलिंडर बंट जा रहा है। इससे तमाम उपभोक्ता मायूस होकर लौट जा रहे, फिर दूसरे दिन आकर लाइन में लग रहे हैं। रात 11 बजे से तपती दोपहरिया में खड़े होने के मजबूर हैं। बताते हैं कि टोकन, पर्ची और सिलिंडर डिलीवरी तक में झोल है, जबकि प्रशासन का दावा है कि आसानी से सिलिंडर मिल रहा, मगर एजेंसियों के बाहर और गोदाम पर लग रही कतार दावे को झूठा साबित कर रहा है।
जितनी आपूर्ति मिल रही है, उसे बंटवाया जा रहा है। एजेंसियों पर मनमानी न हो इसके लिए निगरानी की जा रही है। निरीक्षक की ड्यूटी लगाई गई है, जहां से शिकायत मिल रही है कार्रवाई की जा रही है। - विमल कुमार शुक्ल, डीएसओ, बस्ती।
