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Basti News: आयुर्वेदिक अस्पताल व डीओ कार्यालय निर्माण के लिए भेजा गया नया प्रस्ताव
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बस्ती। शहर के कोर्ट एरिया में बने आयुर्वेदिक अस्पताल को जल्द ही किराये के भवन से छुटकारा मिलेगा। इसके लिए पहल की गई है। पूर्व में अधिग्रहीत की गई भूमि पर आयुर्वेदिक अस्पताल के साथ डीओ कार्यालय भवन के निर्माण की उम्मीद जगी है। इसके लिए स्थानीय स्तर से 99 लाख रुपये का आगणन तैयार करके शासन को अनुमोदन के लिए भेजा गया है।
आयुर्वेद पद्धति से लोगों का उपचार हो इसके लिए शासन ने वर्ष शहर में 1991 में कोर्ट एरिया में 15 शैय्यायुक्त राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की सौगात दी गई थी। शुरुआती दिनों में तो इस अस्पताल की स्थिति ठीक थी, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में धीरे-धीरे यहां मरीज आने कम होने लगे। पहले जहां प्रतिदिन दो सौ की ओपीडी होती थी, वही यह आंकड़ा सिमटकर पचास से भी कम पर आ गया है। 28 वर्षों से यह अस्पताल किराए के भवन में चल रहा है, इसकी इमारत तक जर्जर हो गई है।
परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था न होने से मजबूरन लोग हैंडपंप का दूषित जल पी रहे हैं। यहां 15 शैय्या में सिर्फ सात ही बेड ही बचे हैं, बाकी कंडम हो चुके हैं। यही नहीं पर्याप्त जगह न होने से महत्वपूर्ण सामान भी बेतरतीब ढंग से रखे हुए हैं। कई दवाओं पर भी संकट है। मगर, अब इस अस्पताल की दशा सुधारने के लिए नए भवन के निर्माण की कार्ययोजना बन गई है। इस पर 99 लाख रुपये का बजट खर्च होने की उम्मीद है। किराये के इसी अस्पताल के प्रथम तल पर संचालित क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय को भी भवन मिल जाएगा।
अस्पताल और कार्यालय दोनों को किराये के भवन से छुटकारा मिल जाएगा। भवन भी बदरंग हो चुका है। सीलन आ जाती है। अस्पताल जैसा न दिखने से मरीज भी कम आते हैं।
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आयुर्वेद पद्धति से लोगों का उपचार हो इसके लिए शासन ने वर्ष शहर में 1991 में कोर्ट एरिया में 15 शैय्यायुक्त राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की सौगात दी गई थी। शुरुआती दिनों में तो इस अस्पताल की स्थिति ठीक थी, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में धीरे-धीरे यहां मरीज आने कम होने लगे। पहले जहां प्रतिदिन दो सौ की ओपीडी होती थी, वही यह आंकड़ा सिमटकर पचास से भी कम पर आ गया है। 28 वर्षों से यह अस्पताल किराए के भवन में चल रहा है, इसकी इमारत तक जर्जर हो गई है।
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परिसर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था न होने से मजबूरन लोग हैंडपंप का दूषित जल पी रहे हैं। यहां 15 शैय्या में सिर्फ सात ही बेड ही बचे हैं, बाकी कंडम हो चुके हैं। यही नहीं पर्याप्त जगह न होने से महत्वपूर्ण सामान भी बेतरतीब ढंग से रखे हुए हैं। कई दवाओं पर भी संकट है। मगर, अब इस अस्पताल की दशा सुधारने के लिए नए भवन के निर्माण की कार्ययोजना बन गई है। इस पर 99 लाख रुपये का बजट खर्च होने की उम्मीद है। किराये के इसी अस्पताल के प्रथम तल पर संचालित क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय को भी भवन मिल जाएगा।
अस्पताल और कार्यालय दोनों को किराये के भवन से छुटकारा मिल जाएगा। भवन भी बदरंग हो चुका है। सीलन आ जाती है। अस्पताल जैसा न दिखने से मरीज भी कम आते हैं।
