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Basti News: गैर आवासीय भवनों के किराये की नई दरें लागू
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नगर बाजार। उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास विभाग की ओर से जारी असाधारण गजट के तहत प्रदेश की सभी नगर पंचायतों में गैर आवासीय भवनों के मासिक किराये की नई दर व्यवस्था लागू कर दी गई है। भवनों को उनके उपयोग के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसी वर्गीकरण के आधार पर अब संपत्तियों का वार्षिक मूल्यांकन और संपत्ति कर निर्धारित किया जाएगा।
नई व्यवस्था में पहली श्रेणी में छात्रावास, सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान, तरणताल, क्रीड़ा केंद्र, व्यायामशाला, शारीरिक स्वास्थ्य केंद्र, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रेक्षागृह, संगीत व नृत्य केंद्र, सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक इकाइयां तथा शहर से बाहर स्थित एकल पर्दे वाले सिनेमाघर शामिल हैं। इसके अलावा छोटी चाय, दूध, फल-सब्जी, फोटोस्टेट, धोबी, दर्जी और नाई की दुकानों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। इन पर आवासीय भवनों के बराबर किराया दर लागू होगी।
दूसरी श्रेणी में दवा की दुकान, विभिन्न प्रकार के वाणिज्यिक परिसर, स्थापित बाजारों की दुकानें, टेंट हाउस, भवन निर्माण सामग्री की दुकानें और निजी कोचिंग संस्थान शामिल किए गए हैं। इन पर आवासीय भवनों की तुलना में अधिक किराया दर निर्धारित की गई है। तीसरी श्रेणी में सरकारी, अर्धसरकारी और निजी कार्यालय भवन, सार्वजनिक उपक्रम, निगम व बोर्ड के कार्यालय, क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, जांच केंद्र, पैथोलॉजी लैब, नर्सिंग होम और चिकित्सालय शामिल हैं।
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इसके अलावा तकनीकी विश्वविद्यालय, मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रबंधन एवं विधि संस्थान समेत व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, गोदाम, सामुदायिक भवन, कल्याण मंडप, विवाह स्थल, सभागार, मध्यम व बड़े उद्योग, रेस्टोरेंट, होटल और पर्यटन इकाइयों को भी इस श्रेणी में रखा गया है।
अधिशासी अधिकारी कृति सिंह ने बताया कि गजट में नगर पंचायतों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित किराया गुणांक को घटाने या बढ़ाने का अधिकार दिया गया है। इसके लिए नगर पंचायत बोर्ड को प्रस्ताव पारित करना होगा।
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नई व्यवस्था में पहली श्रेणी में छात्रावास, सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान, तरणताल, क्रीड़ा केंद्र, व्यायामशाला, शारीरिक स्वास्थ्य केंद्र, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रेक्षागृह, संगीत व नृत्य केंद्र, सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक इकाइयां तथा शहर से बाहर स्थित एकल पर्दे वाले सिनेमाघर शामिल हैं। इसके अलावा छोटी चाय, दूध, फल-सब्जी, फोटोस्टेट, धोबी, दर्जी और नाई की दुकानों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। इन पर आवासीय भवनों के बराबर किराया दर लागू होगी।
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दूसरी श्रेणी में दवा की दुकान, विभिन्न प्रकार के वाणिज्यिक परिसर, स्थापित बाजारों की दुकानें, टेंट हाउस, भवन निर्माण सामग्री की दुकानें और निजी कोचिंग संस्थान शामिल किए गए हैं। इन पर आवासीय भवनों की तुलना में अधिक किराया दर निर्धारित की गई है। तीसरी श्रेणी में सरकारी, अर्धसरकारी और निजी कार्यालय भवन, सार्वजनिक उपक्रम, निगम व बोर्ड के कार्यालय, क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, जांच केंद्र, पैथोलॉजी लैब, नर्सिंग होम और चिकित्सालय शामिल हैं।
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इसके अलावा तकनीकी विश्वविद्यालय, मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज, प्रबंधन एवं विधि संस्थान समेत व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, गोदाम, सामुदायिक भवन, कल्याण मंडप, विवाह स्थल, सभागार, मध्यम व बड़े उद्योग, रेस्टोरेंट, होटल और पर्यटन इकाइयों को भी इस श्रेणी में रखा गया है।
अधिशासी अधिकारी कृति सिंह ने बताया कि गजट में नगर पंचायतों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित किराया गुणांक को घटाने या बढ़ाने का अधिकार दिया गया है। इसके लिए नगर पंचायत बोर्ड को प्रस्ताव पारित करना होगा।