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संशोधित : अब एमआरआई जांच के लिए नहीं लगानी पड़ेगी दूसरे शहरों की दौड़
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जिला अस्पताल बस्ती संवाद
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बस्ती। मंडल के मरीजों को जल्द ही एमआरआई जांच के लिए लखनऊ, गोरखपुर या अन्य शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत निजी संस्था के सहयोग से जिला अस्पताल बस्ती और संयुक्त जिला अस्पताल संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में 1.5 टेस्ला (टी) क्षमता की एमआरआई मशीन स्थापित की जाएगी। शासन स्तर से प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही स्थापना की प्रक्रिया शुरू होगी।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। इनमें औसतन तीन से छह मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें एमआरआई जांच की आवश्यकता पड़ती है। जिले में यह सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों को निजी केंद्रों या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
जिला अस्पताल में इलाज कराने आई आरती ने बताया कि एमआरआई के लिए लखनऊ जाना पड़ता है, जिससे पूरा दिन खर्च हो जाता है। वहीं मो. सलमान का कहना है कि महिलाओं और बुजुर्गों के लिए दूसरे शहर जाकर जांच कराना काफी कठिन होता है। अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को समय पर जांच और उपचार मिल सकेगा।
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आधुनिक जांच की मिलेगी सुविधा
एमआरआई के माध्यम से मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, नसों, स्लिप डिस्क, जोड़ों, लिगामेंट, मांसपेशियों, ट्यूमर तथा शरीर के अंदरूनी अंगों की सटीक जांच की जाती है। वर्तमान में निजी केंद्रों पर इस जांच के लिए चार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। जिला अस्पताल में मशीन लगने के बाद मरीजों को यह सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगी और आर्थिक बोझ भी कम होगा।
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मशीन के लिए तैयार किए जाएंगे जरूरी संसाधन
एमआरआई मशीन के लिए जिला अस्पताल परिसर में ग्राउंड फ्लोर पर भवन तैयार किया जाएगा। यहां 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति, 15 केवीए का ऑटोमेटिक जनरेटर, जल निकासी, शोर-रहित वातावरण और अन्य तकनीकी मानकों की व्यवस्था की जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है।
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मेडिकल कॉलेज में भवन तैयार, मशीन का इंतजार जारी
बस्ती मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय, कैली में एमआरआई मशीन का इंतजार करीब आठ वर्षों से जारी है। वर्ष 2018 में यहां मशीन स्थापना की योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से भवन का निर्माण कराया गया था। वर्ष 2022 में भी शासन ने मशीन उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक मशीन नहीं लग सकी। इससे मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल से रोजाना करीब 50 मरीजों को एमआरआई जांच के लिए निजी केंद्रों या दूसरे शहरों में भेजना पड़ रहा है।
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कोट
जमीन चिह्नित करके शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया था। सूची में नाम आया है, एमआरआई मशीन लगने से मरीजों को फायदा होगा। सभी प्रक्रिया पूर्ण है।
-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
कोट
संतकबीरनगर और जिला अस्पताल बस्ती तथा सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन लगने से लाभ होगा। सूची में दोनों अस्पतालों का नाम आया है। आगे की प्रक्रिया शासन स्तर से होनी है।
-डॉ. नीरज पांडेय, एडी हेल्थ, बस्ती मंडल, बस्ती।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। इनमें औसतन तीन से छह मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें एमआरआई जांच की आवश्यकता पड़ती है। जिले में यह सुविधा उपलब्ध न होने से मरीजों को निजी केंद्रों या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
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जिला अस्पताल में इलाज कराने आई आरती ने बताया कि एमआरआई के लिए लखनऊ जाना पड़ता है, जिससे पूरा दिन खर्च हो जाता है। वहीं मो. सलमान का कहना है कि महिलाओं और बुजुर्गों के लिए दूसरे शहर जाकर जांच कराना काफी कठिन होता है। अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को समय पर जांच और उपचार मिल सकेगा।
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आधुनिक जांच की मिलेगी सुविधा
एमआरआई के माध्यम से मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, नसों, स्लिप डिस्क, जोड़ों, लिगामेंट, मांसपेशियों, ट्यूमर तथा शरीर के अंदरूनी अंगों की सटीक जांच की जाती है। वर्तमान में निजी केंद्रों पर इस जांच के लिए चार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। जिला अस्पताल में मशीन लगने के बाद मरीजों को यह सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगी और आर्थिक बोझ भी कम होगा।
मशीन के लिए तैयार किए जाएंगे जरूरी संसाधन
एमआरआई मशीन के लिए जिला अस्पताल परिसर में ग्राउंड फ्लोर पर भवन तैयार किया जाएगा। यहां 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति, 15 केवीए का ऑटोमेटिक जनरेटर, जल निकासी, शोर-रहित वातावरण और अन्य तकनीकी मानकों की व्यवस्था की जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए भूमि चिह्नित कर प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है।
मेडिकल कॉलेज में भवन तैयार, मशीन का इंतजार जारी
बस्ती मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय, कैली में एमआरआई मशीन का इंतजार करीब आठ वर्षों से जारी है। वर्ष 2018 में यहां मशीन स्थापना की योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से भवन का निर्माण कराया गया था। वर्ष 2022 में भी शासन ने मशीन उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक मशीन नहीं लग सकी। इससे मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल से रोजाना करीब 50 मरीजों को एमआरआई जांच के लिए निजी केंद्रों या दूसरे शहरों में भेजना पड़ रहा है।
कोट
जमीन चिह्नित करके शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया था। सूची में नाम आया है, एमआरआई मशीन लगने से मरीजों को फायदा होगा। सभी प्रक्रिया पूर्ण है।
-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
कोट
संतकबीरनगर और जिला अस्पताल बस्ती तथा सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन लगने से लाभ होगा। सूची में दोनों अस्पतालों का नाम आया है। आगे की प्रक्रिया शासन स्तर से होनी है।
-डॉ. नीरज पांडेय, एडी हेल्थ, बस्ती मंडल, बस्ती।