{"_id":"6a53ea7251d124dbd10c7768","slug":"police-to-tighten-legal-noose-around-operatives-based-abroad-data-being-scrutinized-basti-news-c-207-1-bst1006-162212-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: विदेश में रह रहे गुर्गों पर पुलिस कसेगी कानूनी शिकंजा, खंगाल रही डाटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: विदेश में रह रहे गुर्गों पर पुलिस कसेगी कानूनी शिकंजा, खंगाल रही डाटा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस्ती। शेयर ट्रेडिंग के नाम पर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह को पकड़ने के बाद बस्ती पुलिस की माथा पच्ची बढ़ गई है। इस गिरोह के कई गुर्गे दिल्ली, राजस्थान से लेकर नेपाल, कंबोडिया और दुबई में हैं। इन पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस अब इनका डाटा खंगालने में जुटी हुई है। गिरफ्तार सरगना एवं तीन गुर्गों ने गिरोह के कुछ सक्रिय सदस्यों के नाम भी उगले हैं।
गिरोह के सरगना से अलग-अलग नाम की फर्जी कंपनी/फर्म के बैंक अकाउंट और जीएसटी से मिले अन्य गुर्गों के विवरण एवं साक्ष्य भी पुलिस संकलित करने में जुटी है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पुलिस आगे चलकर दूसरे राज्यों और विदेशों में रहने वाले गिरोह के गुर्गों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है। पुलिस सूत्रों के अनुसार अभी और भी गिरोह के कई सक्रिय सदस्यों की पृष्ठभूमि बस्ती और संतकबीरनगर जिले से जुड़ी हुई है। मौजूदा समय में इनका ठौर ठिकाना विदेशों होने की पुष्टि हुई है।
पुलिस इनके मूल निवास से लेकर अस्थायी पते की पूरी कुंडली खंगालने में जुटी हुई है। पुलिस गिरोह के अन्य गुर्गों की आईडी, फोन ईएमआई, बैंक एकाउंट एवं अन्य महत्वपूर्ण डाटा के जरिये उनकी गतिविधियों का पता लगाने में जुट गई है। साइबर सेल, स्वॉट, सर्विलांस एवं विभाग के अन्य तकनीकी जानकार पूरी शिद्दत से छानबीन कर रहे हैं। पुलिस का मानना हैं कि साइबर ठगी का यह बड़ा नेटवर्क है। देश के विभिन्न राज्यों से लेकर विदेशों तक इनका साइबर ठगी का धंधा संचालित हो रहा है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -
ठगी के रुपये में 15 से 20 प्रतिशत मिलता था कमीशन
बस्ती पुलिस ने करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना समेत जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है उनकी अच्छी खासी कमाई थी। जांच पड़ताल में पता चला कि यह पूरा नेटवर्क कमीशन के आधार पर संचालित हो रहा था। फर्जी फर्म के नाम पर बैंक अकाउंट खोलने वाले से लेकर निवेश के नाम पर ग्राहक देने वाले एजेंटों को साइबर ठगी की काली कमाई में 15 से 20 प्रतिशत कमीशन मिलता रहा। गिरोह के पकड़े गए तीन गुर्गे बस्ती जिले के हैं। नगर थाना क्षेत्र के कठौतिया गांव निवासी प्रभात चौधरी (31) की उसके गांव में सामान्य युवक की तरह पहचान थी। परिवार भी मध्यमवर्गीय है। बड़े गिरोह में उसका नाम आने के बाद गांव के लोग भी हैरान हैं। वहीं दो अन्य आरोपी चंद्रकेतु (38) और श्यामजी चौधरी (30) निवासीगण भिरवास, थाना कलवारी भी गांव में सरल अंदाज में रहते थे। साइबर ठगी के रुपयों से यह सभी आई फोन, एंड्रायड मोबाइल और बाइक दिखावे के लिए रखते थे। ताकि कोई इन पर शक न कर सकें। जबकि संतकबीरनगर जिले के बखिरा थाना के रमवापुर गांव के रहने वाले गिरोह के सरगना के पास भी इसके अतिरिक्त अन्य किसी संपत्ति का ब्योरा नहीं मिला है। पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों द्वारा काली कमाई से अर्जित संपत्ति के बारे में भी छानबीन की जा रही है।
-- -- -- -- -- -
54 करोड़ रुपये की ठगी का मिला साक्ष्य
जांच में पुलिस को अभी तक ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के जरिये 54 करोड़ रुपये के साइबर ठगी करने का साक्ष्य मिला है। भारत स्टेशनर्स एवं इंफार्मेशन सेंटर के नाम से खुलवाए गए दो बैंक खाते इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा में संचालित है। इन बैंक खातों में एक साल के भीतर एक करोड़ रुपये क्रेडिट होना पाया गया है। जबकि प्रभात इंटर प्राइजेट के नाम से तीन खाते अलग-अलग बैंकों में खुलवाए गए थे। इसमें एक वर्ष के भीतर डेढ़ करोड़ रुपये क्रेडिट हुआ है। इसके पहले के लेनदेन के विवरण में कुल 54 करोड़ रुपये साइबर ठगी का मामला पकड़ में आ चुका है।
कोट
साइबर ठगी का यह बड़ा नेटवर्क है। पुलिस के इसके तह तक पहुंचने की कोशिश में है। गिरोह से जुड़े सभी सक्रिय सदस्यों का डाटा संकलित किया जा रहा है। इनके बारे में अन्य विवरण भी जुटाए जा रहे हैं। साक्ष्य संकलन की कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस गिरोह के अन्य गुर्गों पर भी शिकंजा कसेगी।
-सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी, सीओ सिटी।
विज्ञापन
गिरोह के सरगना से अलग-अलग नाम की फर्जी कंपनी/फर्म के बैंक अकाउंट और जीएसटी से मिले अन्य गुर्गों के विवरण एवं साक्ष्य भी पुलिस संकलित करने में जुटी है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पुलिस आगे चलकर दूसरे राज्यों और विदेशों में रहने वाले गिरोह के गुर्गों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है। पुलिस सूत्रों के अनुसार अभी और भी गिरोह के कई सक्रिय सदस्यों की पृष्ठभूमि बस्ती और संतकबीरनगर जिले से जुड़ी हुई है। मौजूदा समय में इनका ठौर ठिकाना विदेशों होने की पुष्टि हुई है।
विज्ञापन
पुलिस इनके मूल निवास से लेकर अस्थायी पते की पूरी कुंडली खंगालने में जुटी हुई है। पुलिस गिरोह के अन्य गुर्गों की आईडी, फोन ईएमआई, बैंक एकाउंट एवं अन्य महत्वपूर्ण डाटा के जरिये उनकी गतिविधियों का पता लगाने में जुट गई है। साइबर सेल, स्वॉट, सर्विलांस एवं विभाग के अन्य तकनीकी जानकार पूरी शिद्दत से छानबीन कर रहे हैं। पुलिस का मानना हैं कि साइबर ठगी का यह बड़ा नेटवर्क है। देश के विभिन्न राज्यों से लेकर विदेशों तक इनका साइबर ठगी का धंधा संचालित हो रहा है।
विज्ञापन
ठगी के रुपये में 15 से 20 प्रतिशत मिलता था कमीशन
बस्ती पुलिस ने करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना समेत जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है उनकी अच्छी खासी कमाई थी। जांच पड़ताल में पता चला कि यह पूरा नेटवर्क कमीशन के आधार पर संचालित हो रहा था। फर्जी फर्म के नाम पर बैंक अकाउंट खोलने वाले से लेकर निवेश के नाम पर ग्राहक देने वाले एजेंटों को साइबर ठगी की काली कमाई में 15 से 20 प्रतिशत कमीशन मिलता रहा। गिरोह के पकड़े गए तीन गुर्गे बस्ती जिले के हैं। नगर थाना क्षेत्र के कठौतिया गांव निवासी प्रभात चौधरी (31) की उसके गांव में सामान्य युवक की तरह पहचान थी। परिवार भी मध्यमवर्गीय है। बड़े गिरोह में उसका नाम आने के बाद गांव के लोग भी हैरान हैं। वहीं दो अन्य आरोपी चंद्रकेतु (38) और श्यामजी चौधरी (30) निवासीगण भिरवास, थाना कलवारी भी गांव में सरल अंदाज में रहते थे। साइबर ठगी के रुपयों से यह सभी आई फोन, एंड्रायड मोबाइल और बाइक दिखावे के लिए रखते थे। ताकि कोई इन पर शक न कर सकें। जबकि संतकबीरनगर जिले के बखिरा थाना के रमवापुर गांव के रहने वाले गिरोह के सरगना के पास भी इसके अतिरिक्त अन्य किसी संपत्ति का ब्योरा नहीं मिला है। पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों द्वारा काली कमाई से अर्जित संपत्ति के बारे में भी छानबीन की जा रही है।
54 करोड़ रुपये की ठगी का मिला साक्ष्य
जांच में पुलिस को अभी तक ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के जरिये 54 करोड़ रुपये के साइबर ठगी करने का साक्ष्य मिला है। भारत स्टेशनर्स एवं इंफार्मेशन सेंटर के नाम से खुलवाए गए दो बैंक खाते इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा में संचालित है। इन बैंक खातों में एक साल के भीतर एक करोड़ रुपये क्रेडिट होना पाया गया है। जबकि प्रभात इंटर प्राइजेट के नाम से तीन खाते अलग-अलग बैंकों में खुलवाए गए थे। इसमें एक वर्ष के भीतर डेढ़ करोड़ रुपये क्रेडिट हुआ है। इसके पहले के लेनदेन के विवरण में कुल 54 करोड़ रुपये साइबर ठगी का मामला पकड़ में आ चुका है।
कोट
साइबर ठगी का यह बड़ा नेटवर्क है। पुलिस के इसके तह तक पहुंचने की कोशिश में है। गिरोह से जुड़े सभी सक्रिय सदस्यों का डाटा संकलित किया जा रहा है। इनके बारे में अन्य विवरण भी जुटाए जा रहे हैं। साक्ष्य संकलन की कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस गिरोह के अन्य गुर्गों पर भी शिकंजा कसेगी।
-सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी, सीओ सिटी।