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Basti News: मनोरमा संगम तट पर मेले की तैयारी शुरू, दूर से आते हैं श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 30 Mar 2026 11:49 PM IST
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- लालगंज में संगम तट पर हर साल लगता है पांच दिवसीय मनवर मेला
- पौराणिक महत्व को समेटे है लालगंज, स्नान को आते हैं श्रद्धालु
लालगंज (बस्ती)। लालगंज कुआनो-मनोरमा संगम तट पर पांच दिवसीय मनवर मेला बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। पौराणिक महत्व को समेटे इस स्थल पर स्नान के लिए लोग सुदूर से आते हैं। बताते हैं कि, चैत्र पूर्णिमा पर यहां स्नान और बाबा मोक्षेश्वर नाथ की पूजा से पाप नष्ट होते हैं।
महर्षि उद्यालक मुनि की तपोभूमि कुआनो मनोरमा नदी के पावन संगम तट पर पांच दिवसीय मनवर मेला को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। यहां प्रदेश के कई जनपदों के दुकानदार अपनी दुकान लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। पौराणिक मान्यता है कि, चैत्र शुक्ल चतुर्दशी तिथि को प्रभु श्रीराम ने मिथिला से वापस आते समय अनुज लक्ष्मण और माता सीता के साथ इसी संगम तट पर लिट्टी चोखे का आहार कर रात्रि विश्राम किए थे।
मान्यता है कि, चैत्र पूर्णिमा के दिन कुआनो मनोरमा संगम में स्नान करके बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा-अर्चना की थी। तभी से मान्यता चली आ रही है कि संगम में स्नान कर व बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से मनुष्य के सभी पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
बताया गया कि आज भी श्रद्धालु इस संगम तट के तीनों घाटों पर चतुर्दशी को लिट्टी चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। रात्रि विश्राम कर पूर्णिमा का स्नान करते है। बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा-अर्चना करके पुण्य अर्जित करते है। इस संगम तट पर चैत्र पूर्णिमा का स्नान तथा बैसाख प्रतिपदा और द्वितीया तिथि पर मेले का विशेष महत्व है।
दो अप्रैल को संगम स्नान
पं. देवस्य मिश्रा के अनुसार, इस वर्ष तिथियों का क्षय होने के कारण एक अप्रैल को सुबह 6.13 बजे सूर्योदय होगा, जबकि पूर्णिमा तिथि 6.32 के बाद लग रही है। बृहस्पतिवार को सूर्योदय काल के बाद 6.56 बजे तक पूर्णिमा तिथि का भोग काल रहेगा। इस लिए धर्म शास्त्र और पौराणिक मान्यता के अनुसार चैत्र पूर्णिमा पर कुआनो मनोरमा संगम स्नान दो अप्रैल को ही किया जाना चाहिए।
नदी में जलकुंभी व घाटों की नहीं हुई सफाई
मेला की तैयारियों को देखते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि पौराणिक मेला लगने में दो दिन शेष रह गए हैं। नदी में जलकुंभी और शैवाल का अंबार है। संगम तट पर बने घाटों की साफ-सफाई भी अभी नहीं की गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी मेला की तैयारियों को लेकर बहुत ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मेला समिति भी ध्यान नहीं दे रही है। लोगों ने सफाई की मांग की है।
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लालगंज (बस्ती)। लालगंज कुआनो-मनोरमा संगम तट पर पांच दिवसीय मनवर मेला बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। पौराणिक महत्व को समेटे इस स्थल पर स्नान के लिए लोग सुदूर से आते हैं। बताते हैं कि, चैत्र पूर्णिमा पर यहां स्नान और बाबा मोक्षेश्वर नाथ की पूजा से पाप नष्ट होते हैं।
महर्षि उद्यालक मुनि की तपोभूमि कुआनो मनोरमा नदी के पावन संगम तट पर पांच दिवसीय मनवर मेला को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। यहां प्रदेश के कई जनपदों के दुकानदार अपनी दुकान लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। पौराणिक मान्यता है कि, चैत्र शुक्ल चतुर्दशी तिथि को प्रभु श्रीराम ने मिथिला से वापस आते समय अनुज लक्ष्मण और माता सीता के साथ इसी संगम तट पर लिट्टी चोखे का आहार कर रात्रि विश्राम किए थे।
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मान्यता है कि, चैत्र पूर्णिमा के दिन कुआनो मनोरमा संगम में स्नान करके बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा-अर्चना की थी। तभी से मान्यता चली आ रही है कि संगम में स्नान कर व बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से मनुष्य के सभी पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
बताया गया कि आज भी श्रद्धालु इस संगम तट के तीनों घाटों पर चतुर्दशी को लिट्टी चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। रात्रि विश्राम कर पूर्णिमा का स्नान करते है। बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा-अर्चना करके पुण्य अर्जित करते है। इस संगम तट पर चैत्र पूर्णिमा का स्नान तथा बैसाख प्रतिपदा और द्वितीया तिथि पर मेले का विशेष महत्व है।
दो अप्रैल को संगम स्नान
पं. देवस्य मिश्रा के अनुसार, इस वर्ष तिथियों का क्षय होने के कारण एक अप्रैल को सुबह 6.13 बजे सूर्योदय होगा, जबकि पूर्णिमा तिथि 6.32 के बाद लग रही है। बृहस्पतिवार को सूर्योदय काल के बाद 6.56 बजे तक पूर्णिमा तिथि का भोग काल रहेगा। इस लिए धर्म शास्त्र और पौराणिक मान्यता के अनुसार चैत्र पूर्णिमा पर कुआनो मनोरमा संगम स्नान दो अप्रैल को ही किया जाना चाहिए।
नदी में जलकुंभी व घाटों की नहीं हुई सफाई
मेला की तैयारियों को देखते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि पौराणिक मेला लगने में दो दिन शेष रह गए हैं। नदी में जलकुंभी और शैवाल का अंबार है। संगम तट पर बने घाटों की साफ-सफाई भी अभी नहीं की गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी मेला की तैयारियों को लेकर बहुत ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मेला समिति भी ध्यान नहीं दे रही है। लोगों ने सफाई की मांग की है।