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Basti News: यूपी महिला हैंडबाल टीम को मिला सिल्वर मेडल, बस्ती की बेटी चमकी
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नेशनल हैंडबॉल खिलाड़ी सुनीता राज स्रोत स्वयं
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बस्ती। बरेली के फ्यूचर विश्वविद्यालय में आयोजित 54वीं सीनियर महिला राष्ट्रीय हैंडबाल प्रतियोगिता में जिले की बेटी सुनीता राज ने अपने शानदार प्रदर्शन से न सिर्फ उत्तर प्रदेश टीम को उपविजेता बनने में मदद की, बल्कि संघर्ष और समर्पण की मिसाल भी पेश की।
खास बात यह रही कि टीम में शामिल खिलाड़ियों में सुनीता इकलौती जिले की खिलाड़ी थीं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले में सभी का ध्यान आकर्षित किया। बता दें कि 29 मार्च से तीन अप्रैल तक हुई चैंपियनशिप में यूपी के 18 सदस्यीय टीम में सुनीता ने जगह बनाई थी। उन्होंने खेल के जरिये खुद को तराशा। बताया कि प्रतियोगिता में देश की 30 टीमें शामिल थीं।
शहर के बड़ेवन निवासी सुनीता राज का सफर आसान नहीं रहा। मजदूर पिता की सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। वह रोजाना स्टेडियम तक साइकिल से पहुंचकर करीब चार घंटे अभ्यास करती हैं। पिछले 10 वर्षों से लगातार मेहनत कर रही सुनीता ने कभी भी घर की आर्थिक स्थिति को अपने खेल के बीच नहीं आने दिया।
वह बताती हैं कि डाइट या जूतों की जरूरत होने पर भी उन्होंने परिवार पर दबाव नहीं डाला, बल्कि प्रतियोगिताओं से मिली इनामी राशि और भाई की मदद से अपने खर्च पूरे किए। पिछले साल कड़ी मेहनत का फल मिला और वह सीआईएसएफ में कांस्टेबल पद पर तैनाती मिली।
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खास बात यह रही कि टीम में शामिल खिलाड़ियों में सुनीता इकलौती जिले की खिलाड़ी थीं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले में सभी का ध्यान आकर्षित किया। बता दें कि 29 मार्च से तीन अप्रैल तक हुई चैंपियनशिप में यूपी के 18 सदस्यीय टीम में सुनीता ने जगह बनाई थी। उन्होंने खेल के जरिये खुद को तराशा। बताया कि प्रतियोगिता में देश की 30 टीमें शामिल थीं।
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शहर के बड़ेवन निवासी सुनीता राज का सफर आसान नहीं रहा। मजदूर पिता की सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। वह रोजाना स्टेडियम तक साइकिल से पहुंचकर करीब चार घंटे अभ्यास करती हैं। पिछले 10 वर्षों से लगातार मेहनत कर रही सुनीता ने कभी भी घर की आर्थिक स्थिति को अपने खेल के बीच नहीं आने दिया।
वह बताती हैं कि डाइट या जूतों की जरूरत होने पर भी उन्होंने परिवार पर दबाव नहीं डाला, बल्कि प्रतियोगिताओं से मिली इनामी राशि और भाई की मदद से अपने खर्च पूरे किए। पिछले साल कड़ी मेहनत का फल मिला और वह सीआईएसएफ में कांस्टेबल पद पर तैनाती मिली।