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Basti News: कलवारी-टांडा पुल से शुरू हुआ आवागमन, 55 किमी घूमकर जाने से मिलेगी निजात
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:51 PM IST
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- 12 सितंबर 2025 को मरम्मत के लिए बंद कर दिया गया था पुल
- वाराणसी, प्रयागराज, सुल्तानपुर, जौनपुर आदि जिलों के लोगों को मिलेगी सहूलियत
- सात माह से अधिक का लगा समय
बहादुरपुर (बस्ती)। दो जनपदों को आपस में जोड़ने वाले कलवारी-टांडा पुल का मरम्मत कार्य करीब सात माह बाद पूरा होने के बाद अब पूरी तरह से आवागमन बहाल करने पर सहमति बन गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसके लिए बैरियर को हटवाते हुए पुल के दोनों छोर पर मिट्टी के लगे ढेर को देर शाम हटवा दिया गया। इसके बाद देर शाम से ही आवागमन शुरू हो गया है। मरम्मत कार्य के चलते बस्ती जाने वाले यात्रियों को बिड़हर घाट पुल से होकर 55 से 60 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी
बता दें कि, 12 सितंबर 2025 में पुल मरम्मत कार्य शुरू किया था, लेकिन निर्धारित समय पर पूरा न होने के कारण बस्ती-अंबेडकरनगर जनपद के निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मामला सदन तक पहुंचने के बाद कार्य में तेजी आई, मगर मरम्मत कार्य पूर्ण करने में तीन माह के बजाय सात माह लगा दिए।
लुंबिनी-दुद्धी नेशनल हाईवे-28 पर स्थित यह पुल दोनों जिलों को जोड़ता है। पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 12 सितंबर से इसे बंद कर दिया था और रूट डायवर्जन लागू किया था। मरम्मत कार्य के चलते बस्ती जाने वाले यात्रियों को बिड़हल घाट पुल से होकर 55 से 60 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के समय में निर्माण कार्य की सुस्ती से लोगों में नाराजगी रही। लगभग सवा दो किलोमीटर लंबा पुल वर्ष 2006 में सेतु निगम की ओर 1.19 अरब रुपये की लागत से बनाया गया था। बाद में इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी एनएचएआई को सौंपी गई थी।
व्यापारियों ने बताया कि पुल बंद होने से टांडा के व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कई जिलों को जोड़ने वाला यह पुल केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। बताया कि पुल बंद होने से यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा था, अब इससे राहत मिली है। रोडवेज बसों को भी अब इसी मार्ग से आने-जाने का मौका मिल गया है। अभी तक ये बसें विकल्प मार्ग से होकर गुजरती थीं। इससे किराया, समय और तेल का नुकसान हो रहा था। डिपो के अधिकारी भी इसको लेकर काफी चिंतित थे। अब बस्ती-टांडा, अकबरपुर की सीधी सेवा का लाभ यात्रियों को मिल जाएगा।
चार पहिया के साथ भारी वाहनों का आवागमन शुरू
चार पहिया अभी तक जैसे-तैसे आ जा रहे थे। बड़े वाहनों का आवागमन बंद होने के कारण वाराणसी, प्रयागराज, सुल्तानपुर, जौनपुर, आजमगढ़ आदि जिलों को जाने वालों वाहनों को संतकबीरनगर के बिड़हर और अयोध्या होकर जाने में लगभग 55 से 60 किलोमीटर अधिक दूरी तय करना पड़ता था। मरम्मत के कारण पुल पर लाइट की व्यवस्था निर्माण एजेंसी की ओर से कर दिया। जिसकी मांग लंबे समय से आने जाने वाले कर रहे थे। लाइट न होने के कारण ठंडक की रात में पुल पर जाना कई बार दुर्घटना कारण बन जाता था। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लाइट लगने से अब किसी भी समय आने जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार देर शाम से पूरी तरह से आवागमन बहाल कर दिया गया।
लंबे इंतजार के बाद ही सही मगर पुल से आवागमन बहाल होने से दोनों तरफ के लोगों को लाभ मिलेगा। सबसे अधिक लाभ व्यवसायियों को होगा, जिन्हें सामानों की खरीदारी के लिए बिड़हर होकर टांडा जाना पड़ता था। अब उनका समय और पैसा दोनों बचेगा। - रामपति यादव, गोड़ियाजोत
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पुल पर आवागमन शुरू होने से नौकरीपेशा लोगों के लिए एक से दूसरे जनपद में पहुंचाना आसान हो जाएगा। अब तक अधिकतर लोग चार पहिया वाहन पुल के दोनों छोर पर खड़ाकर पैदल पार करते थे। पुल से आवागमन बहाल होने से काफी राहत मिल गई है। - सुरेश चौहान, मिश्रौलिया
मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद लोगों के लिए पुल खोल दिया गया है। छोटे-बड़े वाहन का आवागमन शुरू हो गया है। - एसएन तिवारी, साइट इंजीनियर, एनएचएआई
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- वाराणसी, प्रयागराज, सुल्तानपुर, जौनपुर आदि जिलों के लोगों को मिलेगी सहूलियत
- सात माह से अधिक का लगा समय
बहादुरपुर (बस्ती)। दो जनपदों को आपस में जोड़ने वाले कलवारी-टांडा पुल का मरम्मत कार्य करीब सात माह बाद पूरा होने के बाद अब पूरी तरह से आवागमन बहाल करने पर सहमति बन गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसके लिए बैरियर को हटवाते हुए पुल के दोनों छोर पर मिट्टी के लगे ढेर को देर शाम हटवा दिया गया। इसके बाद देर शाम से ही आवागमन शुरू हो गया है। मरम्मत कार्य के चलते बस्ती जाने वाले यात्रियों को बिड़हर घाट पुल से होकर 55 से 60 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी
बता दें कि, 12 सितंबर 2025 में पुल मरम्मत कार्य शुरू किया था, लेकिन निर्धारित समय पर पूरा न होने के कारण बस्ती-अंबेडकरनगर जनपद के निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मामला सदन तक पहुंचने के बाद कार्य में तेजी आई, मगर मरम्मत कार्य पूर्ण करने में तीन माह के बजाय सात माह लगा दिए।
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लुंबिनी-दुद्धी नेशनल हाईवे-28 पर स्थित यह पुल दोनों जिलों को जोड़ता है। पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 12 सितंबर से इसे बंद कर दिया था और रूट डायवर्जन लागू किया था। मरम्मत कार्य के चलते बस्ती जाने वाले यात्रियों को बिड़हल घाट पुल से होकर 55 से 60 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों के समय में निर्माण कार्य की सुस्ती से लोगों में नाराजगी रही। लगभग सवा दो किलोमीटर लंबा पुल वर्ष 2006 में सेतु निगम की ओर 1.19 अरब रुपये की लागत से बनाया गया था। बाद में इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी एनएचएआई को सौंपी गई थी।
व्यापारियों ने बताया कि पुल बंद होने से टांडा के व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कई जिलों को जोड़ने वाला यह पुल केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। बताया कि पुल बंद होने से यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा था, अब इससे राहत मिली है। रोडवेज बसों को भी अब इसी मार्ग से आने-जाने का मौका मिल गया है। अभी तक ये बसें विकल्प मार्ग से होकर गुजरती थीं। इससे किराया, समय और तेल का नुकसान हो रहा था। डिपो के अधिकारी भी इसको लेकर काफी चिंतित थे। अब बस्ती-टांडा, अकबरपुर की सीधी सेवा का लाभ यात्रियों को मिल जाएगा।
चार पहिया के साथ भारी वाहनों का आवागमन शुरू
चार पहिया अभी तक जैसे-तैसे आ जा रहे थे। बड़े वाहनों का आवागमन बंद होने के कारण वाराणसी, प्रयागराज, सुल्तानपुर, जौनपुर, आजमगढ़ आदि जिलों को जाने वालों वाहनों को संतकबीरनगर के बिड़हर और अयोध्या होकर जाने में लगभग 55 से 60 किलोमीटर अधिक दूरी तय करना पड़ता था। मरम्मत के कारण पुल पर लाइट की व्यवस्था निर्माण एजेंसी की ओर से कर दिया। जिसकी मांग लंबे समय से आने जाने वाले कर रहे थे। लाइट न होने के कारण ठंडक की रात में पुल पर जाना कई बार दुर्घटना कारण बन जाता था। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लाइट लगने से अब किसी भी समय आने जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार देर शाम से पूरी तरह से आवागमन बहाल कर दिया गया।
लंबे इंतजार के बाद ही सही मगर पुल से आवागमन बहाल होने से दोनों तरफ के लोगों को लाभ मिलेगा। सबसे अधिक लाभ व्यवसायियों को होगा, जिन्हें सामानों की खरीदारी के लिए बिड़हर होकर टांडा जाना पड़ता था। अब उनका समय और पैसा दोनों बचेगा। - रामपति यादव, गोड़ियाजोत
पुल पर आवागमन शुरू होने से नौकरीपेशा लोगों के लिए एक से दूसरे जनपद में पहुंचाना आसान हो जाएगा। अब तक अधिकतर लोग चार पहिया वाहन पुल के दोनों छोर पर खड़ाकर पैदल पार करते थे। पुल से आवागमन बहाल होने से काफी राहत मिल गई है। - सुरेश चौहान, मिश्रौलिया
मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद लोगों के लिए पुल खोल दिया गया है। छोटे-बड़े वाहन का आवागमन शुरू हो गया है। - एसएन तिवारी, साइट इंजीनियर, एनएचएआई