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Bhadohi News: 32 साल में पांचवीं बार बदलेगा भदोही जिले का नाम

Thu, 30 Jul 2026 01:39 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 01:39 AM IST
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Bhadohi district's name to change for the fifth time in 32 years
ज्ञानपुर। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार एक बार फिर भदोही जिले का नाम संत रविदास नगर करने जा रही है। 32 साल में जिले का पांचवीं बार नाम बदलेगा। मखमली कालीनों के लिए विश्व प्रसिद्ध भदोही नब्बे के दशक में वाराणसी जिले की एक तहसील रही। उसी दौरान प्रदेश में छोटे जिलों की मांग तेज हुई। भदोही को भी नया जिला बनाने को लेकर विभिन्न संगठनों ने आवाज बुलंद की। एक दशक से चल रही मांग 1994 में पूरी हुई। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 जून 1994 को भदोही को अलग जिला बनाया। वाराणसी से कटकर भदोही प्रदेश का 66वां जिला बना। पहली बार 1997 में भाजपा और बसपा की गठबंधन सरकार में भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर किया गया। इसी बीच निर्यातकों की मांग पर 1999 में भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता ने संत रविदास नगर भदोही कर दिया था। यानी नाम के आगे भदोही लगा दिया था।
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2012 में सपा की सरकार बनी और 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संत रविदास नगर से बदलकर भदोही कर दिया। अब भाजपा की सरकार संत रविदास नगर करने जा रही है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी से इसकी घोषणा की।भाजपा के लिए महापुरुषों का सम्मान सबसे सर्वोपरी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा पर एक बड़ा फैसला लेकर देश के संत का सम्मान किया है। संत शिरोमणि रविदास के नाम पर जनपद का नाम होने से वैश्विक पटल पर जिले का नाम प्रकाशित होगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार का हार्दिक आभार। - डॉ. विनोद बिंद, सांसद, भाजपा, भदोही।
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सरकार केवल नाम बदलने की राजनीति कर मुख्य मुद्दों से भटकाने का काम कर रही है। संत शिरोमणि के नाम विद्यालय समेत अन्य संस्थाएं खोलकर सम्मान दिया जा सकता है। विश्व पटल पर कालीन व्यवसाय की पहचान भदोही के नाम से है। नाम बदलने से विदेशों में भ्रम की स्थिति बनेगी। - जाहिद जमाल बेग, विधायक, सपा, भदोही।
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सरकार के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी सामाजिक समरसता, समानता और मानवता के महान प्रतीक हैं, लेकिन केवल नाम परिवर्तन से जनपद की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। सरकार को बुनकरों, किसानों, युवाओं, छात्रों और व्यापारियों की समस्याओं के समाधान, रोजगार सृजन पर भी गंभीरता से कार्य करना चाहिए। - वसीम अंसारी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस।

बहन जी के फैसले को दोबारा लागू करने और संत रविदास जैसे सामाजिक न्याय के महापुरुष को सम्मान देने के इस फैसले का पार्टी स्वागत करती है। यह पूरे देश के सम्मान की बात है। बहन मायावती ने देश के शीर्ष संत को सम्मान देने के लिए काफी पहले यह फैसला लिया था, लेकिन राजनीति द्वेष से उसे बदल दिया गया था। - जय प्रकाश चौधरी, जिलाध्यक्ष, बसपा।
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