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सिस्टम में सेंध : आवासीय को कृषि, पक्की सड़क को कच्ची दिखाकर लगाया राजस्व का चूना

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 27 Feb 2026 01:25 AM IST
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Breach in the system: Revenue was fudged by classifying residential land as agricultural and paved roads as unpaved.
जिला निबंधन कार्यालय ज्ञानपुर। संवाद
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ज्ञानपुर।
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जिले में जमीन की रजिस्ट्री में स्टांप चोरी थम नहीं रही है। 10 महीने में 162 बैनामों में 1.91 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी सामने आई है। अप्रैल 2025 से अब तक हुई 951 रजिस्ट्री के अभिलेखों की जांच में 162 लेखापत्रों में कमियां मिली हैं। एआईजी स्टांप ने खरीदारों को नोटिस भेजकर जुर्माना भरने के निर्देश दिए, लेकिन खरीदारों ने जुर्माना नहीं जमा किया है। जिस पर अब खरीदारों के खिलाफ कोर्ट में वाद दाखिल किया गया है। जिले के ज्ञानपुर, औराई और भदोही तहसील में उप निबंधन कार्यालय बने हैं। जहां पर संपत्तियों (जमीन, मकान आदि) की रजिस्ट्री होती है। इसमें शासन की ओर से स्टांप तय है। संपत्ति बेचने और खरीदने वाले विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत करके जमीन की संरचना को गलत दिखाकर स्टांप शुल्क बचा लेते हैं। इससे राजस्व का नुकसान होता है। चकरोड, पक्की अथवा कच्ची सड़क, आबादी के पास की संपत्ति की रजिस्ट्री पर सर्किल रेट के अलावा अतिरिक्त स्टांप लगता है। इसके अलावा संबंधित भूमि में मकान, अर्धनिर्मित भवन अथवा बाग और पेड़ मौजूद हो तो भी स्टांप शुल्क अधिक लगता है। अधिकारी भूमि रजिस्ट्री के दौरान इन तथ्यों को छिपाकर कम स्टांप शुल्क में बैनामा कर देते हैं। इसे स्टांप चोरी माना जाता है। जिले में तथ्यों को छिपाकर रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या अधिक है। निबंधन विभाग के मुताबिक अप्रैल 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक 951 रजिस्ट्री की जांच की गई। डीएम शैलेष कुमार, एडीएम समेत अन्य अधिकारियों की टीम ने लेखों की मौके पर पहुंचकर जांच किया। इसमें 162 रजिस्ट्री में एक करोड़ 91 लाख की स्टांप चोरी पकड़ी गई।
केस एक

डीएम शैलेष कुमार ने जुलाई 2025 में भदोही के हरियावं में रजिस्ट्री की जांच की गई तो स्टांप में 217.84 हेक्टेयर जमीन दिखाई गई जबकि मौके पर जमीन 784.2 हेक्टेयर मिली। यहां पर करीब 31 लाख की स्टांप चोरी पकड़ी गई।
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केस दो
नवंबर 2025 में भदोही के जल्लापुर और हरियावं में रजिस्ट्री का भौतिक सत्यापन किया गया। दोनों स्थानों पर 39.78 लाख की स्टांप चोरी पकड़ी गई। हरियावं में कृषि कार्य की जगह प्लाटिंग होती मिली। डीएम ने दोनों मामलों में वाद दाखिल करके मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए।

रजिस्ट्री के दौरान स्टांप की चोरी करने के लिए आबादी की जमीन को परती की भूमि दिखाकर रजिस्ट्री कराकर स्टांप की चोरी की जाती हैं। बैनामे में लगाए गए स्टांप की स्थलीय जांच की गई तो यह तथ्य सामने आए। 162 विलेख में एक करोड़ 91 लाख की स्टांप चोरी पकड़ी गई। सभी अभिलेखों पर स्टांप वाद के मुकदमे दाखिल किए गए हैं। लोगों से अपील है कि वह स्टांप की चोरी से बचें। - पंकज कुमार सिंह, एआईजी स्टांप।

उपनिबंधक कार्यालयों की स्थिति

तहसील निरीक्षण कमियां स्टांप चोरी

ज्ञानपुर 358 48 31.05 लाख

भदोही 276 37 92.70 लाख

औराई 317 78 67.26 लाख
टोल टैक्स कंपनी ने 62.88 करोड़ का लगाया था चूना
वाराणसी-प्रयागराज हाईवे स्थित लालानगर टोल प्लाजा का संचालन कर रही काशी टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड ने 62.87 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी की थी। जून 2025 में प्रकरण सामने आने पर एआईजी स्टांप पंकज सिंह ने टोल कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। टोल कंपनी 100 रुपये का स्टांप शुल्क देकर सामान्य अनुबंध के आधार पर टोल का संचालन कर रही थी। जांच में पता चला कि यह अनुबंध सामान्य नहीं बल्कि लीज अनुबंध है। लीज अनुबंध के हिसाब से दो फीसदी का शुल्क जमा करना होता है, जिसे कंपनी ने नहीं जमा किया।
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