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Bhadohi News: कालीन उद्योग पर फिर से संकट, अब रोडटेप और कैप में उलझे निर्यातक
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नगर के कालीन कंपनी के गोदाम में निर्यात के लिए पैकिंग कर रखी कालीनें। स्रोत- संवाद
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भदोही। भारत सरकार ने एक बार फिर उद्यमियों को जोर का झटका धीरे से देते हुए रोडटेप के तहत मिलने वाले लाभ को एक झटके में घटाकर आधा कर दिया है। महानिदेशक विदेश व्यापार कार्यालय से 23 फरवरी को इस आशय की अधिसूचना जारी होने के बाद कालीन उद्यमियों में निराशा है। उद्यमियों की मानें तो ड्यूटी ड्राबैक के स्थान पर सरकार ने रोडटेप की शुरुआत की थी। रोडटेप की दरें ड्राबैक की दरों से काफी कम होने के बाद भी अब सरकार ने रोडटेप में मिलने वाले लाभ को आधा कर दिया है। इससे पूरा उद्योग सकते में हैं।
ड्राबैक की दरें पहले 12 प्रतिशत हुआ करती थी। सरकार ने ड्राबैक बंद करके रोडटेप की शुरूआत की। इसमें कालीन उद्योग पर दरें लगभग तीन प्रतिशत तक कर दी। इतना ही नहीं इन दरों पर सरकार ने अधिकतम 30 रुपये का कैप लगा दिया। इस बीच ट्रंप के टैरिफ से उपजी समस्याओं को देखते हुए लोग कैप हटाने की मांग कर रहे थे तभी रोडटेप में मिल रही धनराशि को घटाकर 50 प्रतिशत कर दिए जाने से सभी निर्यातक हतप्रभ हैं। इसका केवल कालीन निर्यातक ही नहीं बल्कि फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाईजेशन (फियो) भी विरोध जता रहा है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने बताया कि सीईपीसी ने भी केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय को इससे पैदा होने वाली समस्याओं की जानकारी देते हुए इसे पूर्ववत करने की मांग की है। कालीन उद्यमियों का तो यहां तक कहना है कि अभी हम ट्रंप के टैरिफ के जंजाल में पिछले दस माह से परेशान हैं। इससे काम प्रभावित हुआ है। सरकार से कुछ सहायता की मांग की गई। सरकार ने कुछ दिया तो नहीं उल्टे रोडटेप की दरों को आधी करके समस्या और बढ़ा दी है।
निर्यातकों ने कहा
इस निर्णय से उद्योगों का नुकसान होगा। निर्यातपरक सभी उद्योग पिछले 7-8 महीने से पहले से ही समस्याओं से जूझ रहे थे। सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
- एके ठुकराल, पूर्व अध्यक्ष इंडो अमरीकन चैंबर आफ कामर्स, वाराणसी
रोडटेप की दरों पर कैप में पहले से कैप लगा था। अब उसे भी आधा करने का फैसला उद्योग के लिए चिंताजनक है। यह सभी उद्योगों के लिए समस्या खड़ी करेगा। अगर इसे वापस न लिया गया तो दुर्भाग्यपूर्ण होगा। - रवि पाटोदिया, पूर्व अध्यक्ष एकमा
कालीन उद्योग वर्तमान में जटिल दौर से गुजर रहा है। हमें पहले ही बहुत कम राहत मिल रही थी। उसमे भी कटौती करने से .यह फैसला कालीन उद्योग पर भारी पड़ सकता है। पुनर्विचार करना चाहिए।
- पीयूष बरनवाल, मानद सचिव एकमा
सीईपीसी ने रोडटेप की पुरानी दरें बहाल करने की मांग केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से की है। इस एक निर्णय से कालीन उद्योग की समस्याएं बढ़ सकती है। मैं इसपर पुनर्विचार की मांग करता हूं। - असलम महबूब, उपाध्यक्ष सीईपीसी
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ड्राबैक की दरें पहले 12 प्रतिशत हुआ करती थी। सरकार ने ड्राबैक बंद करके रोडटेप की शुरूआत की। इसमें कालीन उद्योग पर दरें लगभग तीन प्रतिशत तक कर दी। इतना ही नहीं इन दरों पर सरकार ने अधिकतम 30 रुपये का कैप लगा दिया। इस बीच ट्रंप के टैरिफ से उपजी समस्याओं को देखते हुए लोग कैप हटाने की मांग कर रहे थे तभी रोडटेप में मिल रही धनराशि को घटाकर 50 प्रतिशत कर दिए जाने से सभी निर्यातक हतप्रभ हैं। इसका केवल कालीन निर्यातक ही नहीं बल्कि फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाईजेशन (फियो) भी विरोध जता रहा है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने बताया कि सीईपीसी ने भी केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय को इससे पैदा होने वाली समस्याओं की जानकारी देते हुए इसे पूर्ववत करने की मांग की है। कालीन उद्यमियों का तो यहां तक कहना है कि अभी हम ट्रंप के टैरिफ के जंजाल में पिछले दस माह से परेशान हैं। इससे काम प्रभावित हुआ है। सरकार से कुछ सहायता की मांग की गई। सरकार ने कुछ दिया तो नहीं उल्टे रोडटेप की दरों को आधी करके समस्या और बढ़ा दी है।
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निर्यातकों ने कहा
इस निर्णय से उद्योगों का नुकसान होगा। निर्यातपरक सभी उद्योग पिछले 7-8 महीने से पहले से ही समस्याओं से जूझ रहे थे। सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
- एके ठुकराल, पूर्व अध्यक्ष इंडो अमरीकन चैंबर आफ कामर्स, वाराणसी
रोडटेप की दरों पर कैप में पहले से कैप लगा था। अब उसे भी आधा करने का फैसला उद्योग के लिए चिंताजनक है। यह सभी उद्योगों के लिए समस्या खड़ी करेगा। अगर इसे वापस न लिया गया तो दुर्भाग्यपूर्ण होगा। - रवि पाटोदिया, पूर्व अध्यक्ष एकमा
कालीन उद्योग वर्तमान में जटिल दौर से गुजर रहा है। हमें पहले ही बहुत कम राहत मिल रही थी। उसमे भी कटौती करने से .यह फैसला कालीन उद्योग पर भारी पड़ सकता है। पुनर्विचार करना चाहिए।
- पीयूष बरनवाल, मानद सचिव एकमा
सीईपीसी ने रोडटेप की पुरानी दरें बहाल करने की मांग केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से की है। इस एक निर्णय से कालीन उद्योग की समस्याएं बढ़ सकती है। मैं इसपर पुनर्विचार की मांग करता हूं। - असलम महबूब, उपाध्यक्ष सीईपीसी
