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Bhadohi News: सीईपीसी ने कालीन लेबल को दी मंजूरी, छपाई के बाद शुरू होगा ट्रायल

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 12:52 AM IST
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CEPC approved the carpet label, the trial will start after printing
कालीन लेबल
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साजिद अली अंसारी भदोही। भारतीय कालीनों की ब्रांडिंग की दिशा में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय कालीनों की पहचान अब कालीन लेबल से होगी। सीईपीसी ने इसके डिजाइन को मंजूरी देकर छपाई करा रही है। बीते दिनों नई दिल्ली में परिषद बोर्ड की बैठक में इसे ट्रायल के तौर पर उपयोग करने की मंजूरी मिली है। छपाई के बाद इसका ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा।
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देश और विदेश में कालीनों को हाथ से छूते ही लोगों के मन में सवाल उठता रहा है कि भारतीय कालीन कैसे बनते हैं। इन्हें कौन लोग तैयार करते हैं। एक कालीन कितनी प्रक्रिया से गुजरता है। जहां कालीनों का निर्माण होता वहां का परिवेश कैसा होता है। इन्हीं सब सवालों का जवाब देने के लिए सीईपीसी कालीन लेबल लेकर आई है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की प्रामाणिकता, गुणवत्ता आश्वासन और ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है। खास बात यह है कि लेबल पर भारत सरकार की ओर से प्रोन्नत भी लिखा होगा, जो इसे और सशक्त बनाएगा। सीईपीसी बोर्ड सदस्य मानते हैं कि इस लेबल के माध्यम से विदेश में आयातकों से लेकर खुदरा खरीदारों को भारतीय कालीनों के प्रति भावनात्मक रूप से जोड़ा जा सकेगा। सीईपीसी सदस्यों का मानना है कि यह लेबल लगाना निर्यातकों के लिए अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन लोगों को लगाने के लिए प्रेरित जरूर किया जाएगा।
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ये है लोगों की खासियत
लेबल पर एक क्यूआर कोड लगा होगा
स्कैन करने पर 5.40 मिनट की एक वीडियो दिखेगी
कालीन निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिलेगी
धागा कैसे बनता है, रंगाई, धुलाई, कैसे होती है की जानकारी मिलेगी
भारत में कहां-कहां इसका निर्माण होता है
वीडियो में कमेंट्री के माध्यम से कालीन उत्पादन का इतिहास बताया जाएगा

निर्यातकों ने कहा

शीघ्र ही इसका ट्रायल शुरू होगा। कालीन लेबल लगाना अनिवार्य नहीं होगा। पहले कुछ लोगों के माध्यम से इसका ट्रायल किया जाएगा। प्रयास होगा कि इसके अच्छे परिणाम आएं ताकि और लोग इससे जुड़ें। - असलम महबूब, उपाध्यक्ष सीईपीसी।
यदि निजी तौर पर बात करूं तो मैं यह लेबल अपने कालीनों पर लगाना पसंद करुंगा। यह हमारे कालीन को भारतीय होने का प्रमाण तो होगा ही है इसका इतिहास भी बताएगा।
- पीयूष बरनवाल, मानद सचिव एकमा।
सीईपीसी ने बहुत सोच समझ कर यह कालीन लेबल तैयार किया है। ट्रायल के बाद इसके गुणदोष सामने आने के बाद इसे और बेहतर बनाने के बारे में सोचा जाएगा।
- इम्तीयाज अहमद, प्रशासनिक सदस्य सीईपीसी।
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