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Bhadohi News: डुडवा गांव के पास रेलवे फाटक की उठाई मांग
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क्षेत्र के डुडवा गांव के पास रेलवे फाटक न होने से 15 गांवों की 25 हजार की आबादी को आठ से 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है।
उन्हें रेलवे लाइन के उस पार जाने के लिए तीन किलोमीटर मोढ या चार किलोमीटर पिपरिस फाटक जाना पड़ता है। गांव की रेलवे लाइन के उस पार मुख्यालय के लिए भी रास्ता जाता है।
वाराणसी-जंघई रेलखंड पर जिले में 15 रेलवे फाटक हैं, लेकिन मोढ़ क्षेत्र के डुडवा गांव के समीप फाटक की काफी समय से मांग की जा रही है।
फाटक न होने से लांगनबारी, सियरहा, डुडवा धर्मपुरी, मनफोड़ा, नेवादा कलां, भुसौला, पिपरिस आंशिक भाग, खोरीपुर, मोढ़ डिहवा जैसे करीब 15 गांवों के लोगों को करीब 500 मीटर के रास्ते के लिए आठ से 10 किमी अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है।
इस रुट पर मोढ़ से भदोही की तरफ जाते समय पिपरिस में रेलवे फाटक है। यहां से डुडवा की दूरी करीब चार से पांच किलोमीटर है। इसी तरह मोढ़ में बने फाटक से डुडवा की दूरी करीब तीन से चार किमी है।
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इस बीच कोई रेलवे फाटक न होने से लोगों को मुख्यालय मार्ग पकड़ने के लिए इन दोनों फाटक का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे उन्हें करीब आठ से 10 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।
स्थानीय दिनेश पाठक, रमाशंकर बिंद, हीरामणि यादव, कमलेश प्रजापति, राम कृष्ण यादव आदि ने बताया कि करीब एक दशक से यहां फाटक की मांग उठ रही है, लेकिन इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बताया कि गांव के लोग अब रेलवे प्रशासन को पत्र लिखेंगे। संवाद
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उन्हें रेलवे लाइन के उस पार जाने के लिए तीन किलोमीटर मोढ या चार किलोमीटर पिपरिस फाटक जाना पड़ता है। गांव की रेलवे लाइन के उस पार मुख्यालय के लिए भी रास्ता जाता है।
वाराणसी-जंघई रेलखंड पर जिले में 15 रेलवे फाटक हैं, लेकिन मोढ़ क्षेत्र के डुडवा गांव के समीप फाटक की काफी समय से मांग की जा रही है।
फाटक न होने से लांगनबारी, सियरहा, डुडवा धर्मपुरी, मनफोड़ा, नेवादा कलां, भुसौला, पिपरिस आंशिक भाग, खोरीपुर, मोढ़ डिहवा जैसे करीब 15 गांवों के लोगों को करीब 500 मीटर के रास्ते के लिए आठ से 10 किमी अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है।
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इस रुट पर मोढ़ से भदोही की तरफ जाते समय पिपरिस में रेलवे फाटक है। यहां से डुडवा की दूरी करीब चार से पांच किलोमीटर है। इसी तरह मोढ़ में बने फाटक से डुडवा की दूरी करीब तीन से चार किमी है।
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इस बीच कोई रेलवे फाटक न होने से लोगों को मुख्यालय मार्ग पकड़ने के लिए इन दोनों फाटक का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे उन्हें करीब आठ से 10 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।
स्थानीय दिनेश पाठक, रमाशंकर बिंद, हीरामणि यादव, कमलेश प्रजापति, राम कृष्ण यादव आदि ने बताया कि करीब एक दशक से यहां फाटक की मांग उठ रही है, लेकिन इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बताया कि गांव के लोग अब रेलवे प्रशासन को पत्र लिखेंगे। संवाद