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Bhadohi News: तीन मोबाइलों में मिली 200 बैंक खातों की डिटेल, पकड़े गए तीन साइबर ठग, अब तक 10 करोड़ से ज्यादा ठगे
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पुलिस लाइन में पकड़ गए ठगी के आरोपी। स्रोत: पुलिस
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ज्ञानपुर। पुलिस ने बृहस्पतिवार को साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का राजफाश किया है। ये गिरोह सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और बैंक से ऋण दिलाने के बहाने कम पढ़े लिखे लोगों का खाता खुलवाते थे। इसके बाद खातों का डिटेल अपने पास रख लेते थे। फिर देश के अलग-अलग प्रदेशों में ठगी करते थे। ठगी की धनराशि इन्हीं खातों में मंगवाते थे। एसपी अभिनव त्यागी ने बताया कि आरोपी अंशुल मिश्रा निवासी कांवल, मोहम्मद शोएब निवासी यादवपुर महासी सबलापुर बहराइच और कपिल रावत निवासी धरमंगत खेड़ा थाना मोहनलालगंज लखनऊ को गोपीगंज ओवरब्रिज के पूर्वी छोर के पिलर नंबर 52 के सामने बस स्टैंड से गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास मिले तीन मोबाइल की जांच की गई तो उसमें 200 बैंक खातों की डिटेल मिली है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। तीनों आरोपियों ने अब तक 10 करोड़ से ज्यादा की ठगी की है।
बैंक की शाखा के बाहर घूमते थे ठग, मदद के बहाने लोगों को झांसे में फंसा लेते थे
एसपी अभिनव त्यागी ने बताया कि अमन बिंद निवासी बालीपुर ने पुलिस को बताया कि उसे ऋण की आवश्यकता थी। उस दौरान वह कई बैंकों में गया था। इस दौरान उसकी मुलाकात अस्तिव वर्मा उर्फ रौनक निवासी गोपीपुर, अंशुल मिश्रा निवासी कांवल चकसिखारी और ध्रुव पाठक निवासी जोरई से हुई। तीनों ने मेरा और मेरी बहन का बैंक खाता खुलावाया। इसके बाद पासबुक, एटीएम कार्ड एवं लिंक मोबाइल नंबर का सिम ले लिया। तब मुझे लगा कि मेरे साथ साइबर ठगी हो सकती है। अमन ने जब अपना एटीएम और सिम कार्ड मांगा तो आरोपी धमकी देने लगे। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करके छानबीन शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस को ठगों के बारे में जानकारी मिली।
लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करके निकालते थे ठगी की रकम
एसपी ने बताया कि आरोपी बैंक खाता खुलवाने के बाद पासबुक और एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते थे। इसके बाद राजस्थान, दिल्ली, झारखंड, लखनऊ सहित अन्य देश के अन्य शहरों में कोरियर के माध्यम से बैंक खाते का डिटेल अपने अन्य साथियों तक पहुंचाते थे। इसके बाद ह्वाट्सएप्प, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के माध्यम से झांसा देकर ठगी करते थे। जब ठगी की रकम इन खातों में क्रेडिट हो जाती थी तब आरोपी लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित शशि फिलिंग स्टेशन पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करके ठगी की रकम निकाल लेते थे। गिरोह का सदस्य कपिल रावत उसी पेट्रोल पंप पर काम करता था। वे ठगी के रुपयों को एटीएम से निकालने के बजाए पेट्रोल पंप पर स्वाइप मशीन के माध्यम से फर्जी ट्रांजेक्शन करके कैश में बदल लेते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि बीते एक साल में उन्होंने पेट्रोल पंप से स्वाइप करके लगभग 10 लाख रुपये की निकासी किए हैं।
खाता खुलवाने के लिए 10वीं के छात्रों को बनाया एजेंट
एसपी ने बताया कि साइबर ठगों का जिले में एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। गिरफ्तार साइबर ठगों ने खाता खुलवाने के लिए 10वीं के छात्रों का सहारा लिया था। जांच में पांच बच्चे भी मिले हैं, जो हाईस्कूल में पढ़ते हैं। इन बच्चों से ठग एजेंट के रूप में काम कराते थे। ये बच्चे खाता खुलवाने का काम करते थे। इन सभी बैंक खातों पर 500 से ज्यादा साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गई हैं। लगभग 10 करोड़ की हेराफेरी सामने आई है।
साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां
- साइबर फ्रॉड होते ही तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं
- किसी अंजान व्यक्ति के कहने पर कोई एप डाउनलोड ना करें
- वर्क फ्रॉम होम, शेयर ट्रेडिंग करने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें।
- किसी अंजान व्यक्ति की ओर से रुपये मांगने पर ठीक से जांचे।
- अपने खाते का बैंलेंस 24 घंटे में जरूर चेक कर लें।
- गलती से ट्रांजेक्शन पर बिना जांचें पैसा वापस न करें।
- किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा भेजी गई लिंक को क्लिक न करें।
- 24 घंटे में 15 मिनट के लिए मोबाइल को स्वीच्ड ऑफ जरूर करें।
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बैंक की शाखा के बाहर घूमते थे ठग, मदद के बहाने लोगों को झांसे में फंसा लेते थे
एसपी अभिनव त्यागी ने बताया कि अमन बिंद निवासी बालीपुर ने पुलिस को बताया कि उसे ऋण की आवश्यकता थी। उस दौरान वह कई बैंकों में गया था। इस दौरान उसकी मुलाकात अस्तिव वर्मा उर्फ रौनक निवासी गोपीपुर, अंशुल मिश्रा निवासी कांवल चकसिखारी और ध्रुव पाठक निवासी जोरई से हुई। तीनों ने मेरा और मेरी बहन का बैंक खाता खुलावाया। इसके बाद पासबुक, एटीएम कार्ड एवं लिंक मोबाइल नंबर का सिम ले लिया। तब मुझे लगा कि मेरे साथ साइबर ठगी हो सकती है। अमन ने जब अपना एटीएम और सिम कार्ड मांगा तो आरोपी धमकी देने लगे। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करके छानबीन शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस को ठगों के बारे में जानकारी मिली।
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लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करके निकालते थे ठगी की रकम
एसपी ने बताया कि आरोपी बैंक खाता खुलवाने के बाद पासबुक और एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते थे। इसके बाद राजस्थान, दिल्ली, झारखंड, लखनऊ सहित अन्य देश के अन्य शहरों में कोरियर के माध्यम से बैंक खाते का डिटेल अपने अन्य साथियों तक पहुंचाते थे। इसके बाद ह्वाट्सएप्प, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के माध्यम से झांसा देकर ठगी करते थे। जब ठगी की रकम इन खातों में क्रेडिट हो जाती थी तब आरोपी लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित शशि फिलिंग स्टेशन पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करके ठगी की रकम निकाल लेते थे। गिरोह का सदस्य कपिल रावत उसी पेट्रोल पंप पर काम करता था। वे ठगी के रुपयों को एटीएम से निकालने के बजाए पेट्रोल पंप पर स्वाइप मशीन के माध्यम से फर्जी ट्रांजेक्शन करके कैश में बदल लेते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि बीते एक साल में उन्होंने पेट्रोल पंप से स्वाइप करके लगभग 10 लाख रुपये की निकासी किए हैं।
खाता खुलवाने के लिए 10वीं के छात्रों को बनाया एजेंट
एसपी ने बताया कि साइबर ठगों का जिले में एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। गिरफ्तार साइबर ठगों ने खाता खुलवाने के लिए 10वीं के छात्रों का सहारा लिया था। जांच में पांच बच्चे भी मिले हैं, जो हाईस्कूल में पढ़ते हैं। इन बच्चों से ठग एजेंट के रूप में काम कराते थे। ये बच्चे खाता खुलवाने का काम करते थे। इन सभी बैंक खातों पर 500 से ज्यादा साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गई हैं। लगभग 10 करोड़ की हेराफेरी सामने आई है।
साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां
- साइबर फ्रॉड होते ही तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं
- किसी अंजान व्यक्ति के कहने पर कोई एप डाउनलोड ना करें
- वर्क फ्रॉम होम, शेयर ट्रेडिंग करने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें।
- किसी अंजान व्यक्ति की ओर से रुपये मांगने पर ठीक से जांचे।
- अपने खाते का बैंलेंस 24 घंटे में जरूर चेक कर लें।
- गलती से ट्रांजेक्शन पर बिना जांचें पैसा वापस न करें।
- किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा भेजी गई लिंक को क्लिक न करें।
- 24 घंटे में 15 मिनट के लिए मोबाइल को स्वीच्ड ऑफ जरूर करें।
