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Bhadohi News: नहीं मिलता हीमोफीलिया का इंजेक्शन, 20 मरीजों को करनी होती है भागदौड़
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मनोज कुमार गुप्ता ज्ञानुपर। जिले के 20 बच्चे आनुवांशिक बीमारी हीमोफीलिया से ग्रसित हैं। इस बीमारी का जिले में उपचार नहीं होता। मरीजों को उपचार कराने के लिए वाराणसी जाना होता है। कई बार वहां भी इंजेक्शन नहीं मिलने पर उन्हें लखनऊ जाना पड़ता है। इस बीमारी में शरीर पर हल्की सी चोट लगते ही तेजी से खून बहाने लगता है। यह बहाव तब तक बंद नहीं होता, जब तक उसका इंजेक्शन न लगे। एक इंजेक्शन की कीमत 30 से 35 हजार रुपये की होती है।
हीमोफीलिया मरीजों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। इलाज नहीं मिलने से उस दशा में वे मजबूरन चोट के स्थान पर बर्फ की सेकाई करते हैं। इस दुर्लभ बीमारी के ए श्रेणी के मरीज औराई के महदेपुर कैयरमऊ निवासी विकास भारती ने बताया कि यह हीमोफीलिया ए और हीमोफीलिया बी दो तरह की होती है। ए श्रेणी की बीमारी काफी कम देखी जाती है, लेकिन बी श्रेणी में ज्याजा देखने को मिलती है। बीमारी से ग्रसित बच्चों में हल्की चोट, दबाव या खरोंच आने पर तेजी से खून बहने लगता है। चोट लगने के एक घंटे के अंदर उन्हें ''फैक्टर'' इंजेक्शन लगाना पड़ता है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों का कार्ड बनता है। इसमें बीमारी की श्रेणी लिखी रहती है।
योगाभ्यास और व्यायाम से मिलेगी राहत
औराई के ही कोठरा गांव निवासी बी श्रेणी के मरीज रामसुंदर प्रजापति ने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को काफी सावधानियां रखनी होती है। इसमें यह ध्यान रखना होता है कि किसी भी तरह से कहीं चोट न लगे। बचाव के लिए बताया कि जब भी स्वास्थ्य की स्थिति अनुकूल हो, हल्का योगाभ्यास एवं फिजियोथेरेपी अवश्य करें। ताकि मांसपेशियां मजबूत रहें और जोड़ों में जकड़न या कमजोरी न आए। इसके अलावा किसी भी प्रकार के भारी काम या चोट लगने वाले कार्य से बचें। यात्रा करते समय सतर्कता और सुरक्षा का ध्यान रखें। जोड़ों में दर्द या सूजन होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
हीमोफीलिया के लक्षण
- चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहना
- बार-बार नाक से खून आना
- जोड़ों में सूजन और दर्द
- शरीर नीला पड़ना
- दांत निकलने या सर्जरी के बाद ज्यादा ब्लीडिंग
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हीमोफीलिया मरीजों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 अप्रैल को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया जाता है। इलाज नहीं मिलने से उस दशा में वे मजबूरन चोट के स्थान पर बर्फ की सेकाई करते हैं। इस दुर्लभ बीमारी के ए श्रेणी के मरीज औराई के महदेपुर कैयरमऊ निवासी विकास भारती ने बताया कि यह हीमोफीलिया ए और हीमोफीलिया बी दो तरह की होती है। ए श्रेणी की बीमारी काफी कम देखी जाती है, लेकिन बी श्रेणी में ज्याजा देखने को मिलती है। बीमारी से ग्रसित बच्चों में हल्की चोट, दबाव या खरोंच आने पर तेजी से खून बहने लगता है। चोट लगने के एक घंटे के अंदर उन्हें ''फैक्टर'' इंजेक्शन लगाना पड़ता है। इस बीमारी से ग्रसित मरीजों का कार्ड बनता है। इसमें बीमारी की श्रेणी लिखी रहती है।
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औराई के ही कोठरा गांव निवासी बी श्रेणी के मरीज रामसुंदर प्रजापति ने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित मरीजों को काफी सावधानियां रखनी होती है। इसमें यह ध्यान रखना होता है कि किसी भी तरह से कहीं चोट न लगे। बचाव के लिए बताया कि जब भी स्वास्थ्य की स्थिति अनुकूल हो, हल्का योगाभ्यास एवं फिजियोथेरेपी अवश्य करें। ताकि मांसपेशियां मजबूत रहें और जोड़ों में जकड़न या कमजोरी न आए। इसके अलावा किसी भी प्रकार के भारी काम या चोट लगने वाले कार्य से बचें। यात्रा करते समय सतर्कता और सुरक्षा का ध्यान रखें। जोड़ों में दर्द या सूजन होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
हीमोफीलिया के लक्षण
- चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहना
- बार-बार नाक से खून आना
- जोड़ों में सूजन और दर्द
- शरीर नीला पड़ना
- दांत निकलने या सर्जरी के बाद ज्यादा ब्लीडिंग
