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Bhadohi News: बोतल बंद पानी में मिला पीलिया फैलाने वाला बैक्टीरिया, 2 प्लांट किए गए सीज
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कार्पेट सिटी में बंद बोतलबंद पानी का प्लांट। संवाद
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धर्मेंद्र पाल ज्ञानपुर।
जिस बोतल बंद पानी को शुद्ध समझकर आप पी रहे हैं, वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। सहायक आयुक्त खाद्य विवेक मालवीय ने बताया कि जनवरी में कार्पेट सिटी स्थित ब्लूजेड और लालानगर के सिद्धि विनायक आरओ प्लांट के बोतल बंद पानी की जांच के लिए सैंपल लेकर लैब में भेजा था। जांच की रिपोर्ट आने के बाद पता चला है कि इन दोनों प्लांटों के पानी पीने लायक नहीं है। ब्लूजेड आरओ प्लांट के बोतल बंद पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। इस बैक्टीरिया से पीलिया बीमारी होती है। वहीं, सिद्धि विनायक आरओ प्लांट का पानी अधोमानक पाया गया है। इस आरओ प्लांट का पानी लंबे समय तक पीने से गंभीर बीमारी हो सकती है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दोनों आरओ प्लांट को सीज कर दिया है। दोनों आरओ प्लांट से दोबारा पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है।
हर दिन लगभग 40 हजार बोतल की होती है आपूर्ति
जिले के दोनों सीज प्लांटों से हर दिन लगभग 40 हजार बोतल बंद पानी की आपूर्ति भदोही सहित आसपास के जिले में होती थी। ये पानी हर छोटी-बड़ी दुकानों पर बिकता है। जो लोग इसका इस्तेमाल कर रहे थे, वे खाद्य विभाग की कार्रवाई से स्तब्ध हो गए हैं।
103 आरओ प्लांट, 20 फीसदी ही पंजीकृत
जनपद में घर से लेकर दफ्तरों तक पानी पहुंचाने वाले आरओ प्लांट संचालकों की मनमानी के आगे जिला प्रशासन बेबस है। भूगर्भ विभाग के मुताबिक जिले में करीब 103 आरओ प्लांट चल रहे हैं। इसमें भूगर्भ विभाग से किसी संचालक ने एनओसी नहीं ली है। खाद्य सुरक्षा विभाग में मात्र 20 फीसदी ही पंजीकृत हैं।
दूषित पानी पीने से होने वाली बीमारी
- पेट में संक्रमण, उल्टी-दस्त, लिवर में इंफेक्शन
- बच्चों, बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करता है
- तेज बुखार और थकान, मुंह सूखना और पेशाब कम आना
- किडनी में इंफेक्शन हो सकता है
नोट : ये जानकारी डॉ. प्रदीप यादव ने दी है।
क्या है ई-कोलाई बैक्टीरिया
ये बैक्टीरिया पानी में मानव या पशु मल के संपर्क से आता है। यह सीवर के पानी, खेताें से निकले पानी या गंदे पानी के रिसाव के माध्यम से पीने के पानी के स्रोतों तक पहुंचता है। कुओं या बोरवेलों के पास कीचड़, गंदा पानी या जानवरों के अवशेष रहने से पानी के स्रोतों तक पहुंचता है।
ये है शुद्ध पानी का मानक
- शुद्ध पानी का मानक उसके रासायनिक और भौतिक गुणों पर निर्भर करता है
- वैज्ञानिक रूप से शुद्ध पानी (जैसे आसुत जल) रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन होता है
- इसका पीएच मान 7 (उदासीन) और कुल घुलनशील ठोस (टीडीएस) लगभग 0-50 एमजी/एल होता है
- पीने के पानी के लिए टीडीएस 175-300 एमजी/एल (150-300 टीडीएस) और पीएच 6.5-8.5 आदर्श माना जाता है
शासन के निर्देश पर जनवरी में जिले के दोनों प्लांट की जांच की गई थी। उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। एक का नमूना अधोमानक और दूसरे में हानिकारक बैक्टीरिया मिला है। दोनों प्लांटों को सीज कर दिया गया है। - विवेक मालवीय, सहायक आयुक्त खाद्य भदोही।
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जिस बोतल बंद पानी को शुद्ध समझकर आप पी रहे हैं, वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। सहायक आयुक्त खाद्य विवेक मालवीय ने बताया कि जनवरी में कार्पेट सिटी स्थित ब्लूजेड और लालानगर के सिद्धि विनायक आरओ प्लांट के बोतल बंद पानी की जांच के लिए सैंपल लेकर लैब में भेजा था। जांच की रिपोर्ट आने के बाद पता चला है कि इन दोनों प्लांटों के पानी पीने लायक नहीं है। ब्लूजेड आरओ प्लांट के बोतल बंद पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। इस बैक्टीरिया से पीलिया बीमारी होती है। वहीं, सिद्धि विनायक आरओ प्लांट का पानी अधोमानक पाया गया है। इस आरओ प्लांट का पानी लंबे समय तक पीने से गंभीर बीमारी हो सकती है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दोनों आरओ प्लांट को सीज कर दिया है। दोनों आरओ प्लांट से दोबारा पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है।
हर दिन लगभग 40 हजार बोतल की होती है आपूर्ति
जिले के दोनों सीज प्लांटों से हर दिन लगभग 40 हजार बोतल बंद पानी की आपूर्ति भदोही सहित आसपास के जिले में होती थी। ये पानी हर छोटी-बड़ी दुकानों पर बिकता है। जो लोग इसका इस्तेमाल कर रहे थे, वे खाद्य विभाग की कार्रवाई से स्तब्ध हो गए हैं।
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103 आरओ प्लांट, 20 फीसदी ही पंजीकृत
जनपद में घर से लेकर दफ्तरों तक पानी पहुंचाने वाले आरओ प्लांट संचालकों की मनमानी के आगे जिला प्रशासन बेबस है। भूगर्भ विभाग के मुताबिक जिले में करीब 103 आरओ प्लांट चल रहे हैं। इसमें भूगर्भ विभाग से किसी संचालक ने एनओसी नहीं ली है। खाद्य सुरक्षा विभाग में मात्र 20 फीसदी ही पंजीकृत हैं।
दूषित पानी पीने से होने वाली बीमारी
- पेट में संक्रमण, उल्टी-दस्त, लिवर में इंफेक्शन
- बच्चों, बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करता है
- तेज बुखार और थकान, मुंह सूखना और पेशाब कम आना
- किडनी में इंफेक्शन हो सकता है
नोट : ये जानकारी डॉ. प्रदीप यादव ने दी है।
क्या है ई-कोलाई बैक्टीरिया
ये बैक्टीरिया पानी में मानव या पशु मल के संपर्क से आता है। यह सीवर के पानी, खेताें से निकले पानी या गंदे पानी के रिसाव के माध्यम से पीने के पानी के स्रोतों तक पहुंचता है। कुओं या बोरवेलों के पास कीचड़, गंदा पानी या जानवरों के अवशेष रहने से पानी के स्रोतों तक पहुंचता है।
ये है शुद्ध पानी का मानक
- शुद्ध पानी का मानक उसके रासायनिक और भौतिक गुणों पर निर्भर करता है
- वैज्ञानिक रूप से शुद्ध पानी (जैसे आसुत जल) रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन होता है
- इसका पीएच मान 7 (उदासीन) और कुल घुलनशील ठोस (टीडीएस) लगभग 0-50 एमजी/एल होता है
- पीने के पानी के लिए टीडीएस 175-300 एमजी/एल (150-300 टीडीएस) और पीएच 6.5-8.5 आदर्श माना जाता है
शासन के निर्देश पर जनवरी में जिले के दोनों प्लांट की जांच की गई थी। उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। एक का नमूना अधोमानक और दूसरे में हानिकारक बैक्टीरिया मिला है। दोनों प्लांटों को सीज कर दिया गया है। - विवेक मालवीय, सहायक आयुक्त खाद्य भदोही।