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Bhadohi News: टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने बुलंद की आवाज
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जिला मुख्यालय पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन करते राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के लोग। स
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ज्ञानपुर। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। उन्होंने वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को टीईटी से राहत देने की मांग की। साथ ही प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
वक्ताओं ने कहा कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी अधिसूचना और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के कारण शिक्षकों की सेवा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इसमें देश भर में 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक और उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षक शामिल हैं।
देश के विभिन्न राज्यों में 23 अगस्त 2010 से पूर्व और प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त सभी सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के प्रभावी नियमों के अनुसार वैध थीं।
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बाद में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें आवश्यक विधायी, नीतिगत या प्रशासनिक कदम उठाकर इन शिक्षकों को पूर्ण संरक्षण प्रदान करें।
कहा कि दशकों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगा। उन्होंने संसद और सरकार से इस विषय पर त्वरित और न्यायोचित हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
जिलाध्यक्ष धीरज सिंह ने कहा यह लड़ाई केवल एक परीक्षा के विरोध की नहीं, बल्कि उन हजारों अनुभवी शिक्षकों के सम्मान और सेवा सुरक्षा की है, जिन्होंने वर्षों तक राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है। उन्हें अब इस तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित करना अनुचित है।
इस मौके पर क्रांतिमान शुक्ला, प्रतीक मालवीय, रुक्मणिकांत पांडेय, मनोज सिंह, हरिओम श्रीवास्तव, सुरेश मौर्या, रितेश तिवारी, निशांत यादव, राजीव रतन यादव, देवेंद्र मिश्रा, अरुण यति, शिवम श्रीवास्तव, राजधर यादव, वेद मिश्र, विजय कुमार सिंह आदि रहे।
वक्ताओं ने कहा कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी अधिसूचना और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के कारण शिक्षकों की सेवा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इसमें देश भर में 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षक और उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षक शामिल हैं।
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देश के विभिन्न राज्यों में 23 अगस्त 2010 से पूर्व और प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त सभी सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के प्रभावी नियमों के अनुसार वैध थीं।
बाद में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारें आवश्यक विधायी, नीतिगत या प्रशासनिक कदम उठाकर इन शिक्षकों को पूर्ण संरक्षण प्रदान करें।
कहा कि दशकों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगा। उन्होंने संसद और सरकार से इस विषय पर त्वरित और न्यायोचित हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
जिलाध्यक्ष धीरज सिंह ने कहा यह लड़ाई केवल एक परीक्षा के विरोध की नहीं, बल्कि उन हजारों अनुभवी शिक्षकों के सम्मान और सेवा सुरक्षा की है, जिन्होंने वर्षों तक राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है। उन्हें अब इस तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित करना अनुचित है।
इस मौके पर क्रांतिमान शुक्ला, प्रतीक मालवीय, रुक्मणिकांत पांडेय, मनोज सिंह, हरिओम श्रीवास्तव, सुरेश मौर्या, रितेश तिवारी, निशांत यादव, राजीव रतन यादव, देवेंद्र मिश्रा, अरुण यति, शिवम श्रीवास्तव, राजधर यादव, वेद मिश्र, विजय कुमार सिंह आदि रहे।