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प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी अन्न की गुणवत्ता : विपुल
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ज्ञानपुर। केंद्र में मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज में विकसित भारत प्रदर्शनी के जरिये लोगों को जागरूक किया जा रहा है। दूसरे दिन बृहस्पतिवार को प्राकृतिक खेती जन जागरूकता एवं किसान कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया गया।
निषाद पार्टी के विधायक विपुल दूबे और सीडीओ बाल गोविंद शुक्ला ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। विधायक ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक और गुणवत्तापूर्ण अन्न उत्पादन का भी माध्यम है। उप कृषि निदेशक डॉ. राम प्रवेश ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती कम लागत में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित कृषि प्रणाली प्रदान करती है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरपी चौधरी ने कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, बीजामृत, जीवामृत, आच्छादन, वाफसा तथा नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, आग्नेयास्त्र एवं दशपर्णी अर्क जैसे जैविक उपायों की जानकारी दी। प्रगतिशील कृषक ओंकारनाथ उपाध्याय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे प्राकृतिक खेती में प्रयुक्त जैविक उत्पादों का निर्माण कर स्वयं उपयोग करने के साथ अन्य किसानों को भी उपलब्ध करा रहे हैं। इस मौके पर रामेश्वर सिंह, चंद्रशेखर आदि रहे।
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निषाद पार्टी के विधायक विपुल दूबे और सीडीओ बाल गोविंद शुक्ला ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। विधायक ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक और गुणवत्तापूर्ण अन्न उत्पादन का भी माध्यम है। उप कृषि निदेशक डॉ. राम प्रवेश ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती कम लागत में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित कृषि प्रणाली प्रदान करती है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरपी चौधरी ने कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, बीजामृत, जीवामृत, आच्छादन, वाफसा तथा नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, आग्नेयास्त्र एवं दशपर्णी अर्क जैसे जैविक उपायों की जानकारी दी। प्रगतिशील कृषक ओंकारनाथ उपाध्याय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे प्राकृतिक खेती में प्रयुक्त जैविक उत्पादों का निर्माण कर स्वयं उपयोग करने के साथ अन्य किसानों को भी उपलब्ध करा रहे हैं। इस मौके पर रामेश्वर सिंह, चंद्रशेखर आदि रहे।