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Bhadohi News: स्टांप चोरी में टोल प्लाजा का संचालन करने वाली कंपनी पर 6.28 करोड़ का जुर्माना, पढ़ें पूरा मामला
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 10:24 AM IST
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सार
भदोही में लालानगर टोल प्लाजा पर स्टांप चोरी पकड़े जाने के बाद देश के 55 टोल कंपनियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में काशी टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड पर 6.28 करोड़ का जुर्माना लगाया है।
Toll plaza
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
जिला मजिस्ट्रेट शैलेश कुमार की अदालत ने मंगलवार को स्टांप चोरी के मामले में लालानगर टोल प्लाजा का संचालन करने वाली काशी टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड पर 6.28 करोड़ का जुर्माना लगाया है। कंपनी को स्टांप शुल्क के 62.88 करोड़ रुपये भी जमा करने के आदेश दिए हैं।
बता दें कि भदोही में स्टांप चोरी पकड़े जाने के बाद देश के 55 टोल कंपनियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर लालानगर के पास टोल प्लाजा का संचालन का जिम्मा 18 मार्च 2023 को नेताजी सुभाष प्लेस, प्रीतमपुरा, नई दिल्ली स्थित काशी टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड को 15 साल के मिला था।
इसके एवज में कंपनी ने एनएचएआई को 3144 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। 26 नवंबर 2024 को प्रमुख सचिव ने टोल के अनुबंधों की जांच के निर्देश दिए थे। रजिस्ट्री विभाग की ओर से टोल कंपनी से अनुबंध के दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन हर बार अधूरा जवाब देने पर रजिस्ट्री विभाग ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी हासिल की। इसमें पता चला कि काशी टोल-वे का 15 साल का लीज अनुबंध है। इस पर दो फीसदी स्टांप देय होता है।
विभाग की जांच में 3244 करोड़ रुपये के अनुबंध में दो फीसदी के तहत 62.88 करोड़ रुपये की स्टांप की चोरी पकड़ी गई। इसके बाद एआईजी स्टांप पंकज सिंह ने स्टांप वाद के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई। इस मामले में सुनवाई करते हुए जिला मजिस्ट्रेट की अदालत ने काशी टोलवे कंपनी को स्टांप चोरी में दोषी पाया।
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बता दें कि भदोही में स्टांप चोरी पकड़े जाने के बाद देश के 55 टोल कंपनियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर लालानगर के पास टोल प्लाजा का संचालन का जिम्मा 18 मार्च 2023 को नेताजी सुभाष प्लेस, प्रीतमपुरा, नई दिल्ली स्थित काशी टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड को 15 साल के मिला था।
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इसके एवज में कंपनी ने एनएचएआई को 3144 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। 26 नवंबर 2024 को प्रमुख सचिव ने टोल के अनुबंधों की जांच के निर्देश दिए थे। रजिस्ट्री विभाग की ओर से टोल कंपनी से अनुबंध के दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन हर बार अधूरा जवाब देने पर रजिस्ट्री विभाग ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी हासिल की। इसमें पता चला कि काशी टोल-वे का 15 साल का लीज अनुबंध है। इस पर दो फीसदी स्टांप देय होता है।
विभाग की जांच में 3244 करोड़ रुपये के अनुबंध में दो फीसदी के तहत 62.88 करोड़ रुपये की स्टांप की चोरी पकड़ी गई। इसके बाद एआईजी स्टांप पंकज सिंह ने स्टांप वाद के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई। इस मामले में सुनवाई करते हुए जिला मजिस्ट्रेट की अदालत ने काशी टोलवे कंपनी को स्टांप चोरी में दोषी पाया।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद प्रमुख सचिव ने कराई जांच
रीवा टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड बनाम मध्यप्रदेश सरकार 2024 के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि रीवा टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड की ओर से मध्य प्रदेश सरकार के साथ किए गए रियायत समझौते को एक पट्टा माना जाएगा और इस पर स्टांप ड्यूटी लगनी चाहिए।
इसी को आधार बनाकर प्रमुख सचिव स्टांप ने प्रदेश के सभी टोल प्लाजा का संचालन कर रही कंपनियों के अनुबंधों की जांच के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में रजिस्ट्री विभाग की ओर से काशी टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड के अनुबंध की जांच की गई।
इसी को आधार बनाकर प्रमुख सचिव स्टांप ने प्रदेश के सभी टोल प्लाजा का संचालन कर रही कंपनियों के अनुबंधों की जांच के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में रजिस्ट्री विभाग की ओर से काशी टोल-वे प्राइवेट लिमिटेड के अनुबंध की जांच की गई।