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Bhadohi News: लोन कंपनी ने शर्तों का किया उल्लंघन, 35 हजार रुपये लगा जुर्माना
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भदोही (ज्ञानपुर)।
जिला उपभोक्ता आयोग ने लोन देने वाली कंपनी के खिलाफ 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी ने लोन की पूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी लोन की आधी धनराशि जारी की। वहीं, 12.13 की जगह 18.5 फीसदी ब्याज पूरी धनराशि पर लगाया। कोर्ट ने अधिक लिए गए ब्याज को मूल लोन में समायोजित करने और शेष धनराशि को वापस करने के निर्देश दिए। चेताया कि लोन की शेष धनराशि नहीं दी जाती है तो लोन की दी गई धनराशि समाप्त होगी। उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि सुरियावां नगर निवासी बनारसी दास ने उपभोक्ता आयोग में 21 दिसंबर, 2024 को शिकायत दर्ज कराई। बताया कि उन्हें जौनपुर की आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड कंपनी उन्हें होम लेने देने के लिए राजी हुई। कंपनी ने उनके चल रहे सात लोन को बंद कराने और 15 लाख रुपये लोन जारी करने की हामी भरी। इसके लिए कंपनी ने उनसे 5900 रुपये प्रोसेसिंग फीस मांगी। उपभोक्ता ने लोन संबंधी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद लोन कंपनी में कागज जमा किए। इस पर कंपनी ने 15 लाख का लोन होने की बात कही। बताया कि इसकी ईएमआई 19907 रुपये होगी। काफी दिनों तक लोन का पैसा नहीं मिला तो कंपनी के प्रबंधक से संपर्क किया गया। जहां उनसे मकान का गिफ्ट डीड बनाकर मांगा गया। इस पर उन्होंने इनकार किया। कंपनी से प्रोसेसिंग फीस वापस मांगी तो कंपनी ने प्रोसेसिंग फीस नहीं दिया। दोबारा गिफ्ट डीड की डिमांड की। इसके बाद उन्होंने इसकी प्रक्रिया भी पूरी की। इसके बाद पता चला कि उनका लोन 12 लाख 940 रुपये का ही हुआ था। इसमें कंपनी ने उन्हें केवल छह लाख 83 हजार का चेक दिया। वहीं, वार्षिक ब्याज भी 12.13 फीसदी से 18.5 फीसदी किया गया। शिकायत के बाद आयोग ने लोन कंपनी के प्रबंधक को नोटिस जारी किया। आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार व सदस्य दिप्ती श्रीवास्तव व विजय बहादुर सिंह की पीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए लोन कंपनी की दलील को खारिज कर दिया। आदेश दिया कि कंपनी द्वारा जारी किए गए 6. 83 लाख रुपये पर ही निर्धारित ब्याज का आगणन करके धनराशि को लोन खाते में समायोजित किया। वहीं, अगर शेष धनराशि बचती है तो उसे पीड़ित को वापस किया जाए। इसके अलावा लोन की वास्तविक धनराशि में कोई धनराशि देय होती है तो अधिक ली गई ईएमआई को उसमें समायोजित करने के बाद अवशेष राशि पीड़ित से प्राप्त लोन अकाउंट समाप्त करें। चेताया कि अगर आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो दी गई लोन की धनराशि समाप्त कर दी जाएगी। कोर्ट ने क्षतिपूर्ति के 25 हजार और वाद व्यय 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
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जिला उपभोक्ता आयोग ने लोन देने वाली कंपनी के खिलाफ 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी ने लोन की पूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी लोन की आधी धनराशि जारी की। वहीं, 12.13 की जगह 18.5 फीसदी ब्याज पूरी धनराशि पर लगाया। कोर्ट ने अधिक लिए गए ब्याज को मूल लोन में समायोजित करने और शेष धनराशि को वापस करने के निर्देश दिए। चेताया कि लोन की शेष धनराशि नहीं दी जाती है तो लोन की दी गई धनराशि समाप्त होगी। उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि सुरियावां नगर निवासी बनारसी दास ने उपभोक्ता आयोग में 21 दिसंबर, 2024 को शिकायत दर्ज कराई। बताया कि उन्हें जौनपुर की आधार हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड कंपनी उन्हें होम लेने देने के लिए राजी हुई। कंपनी ने उनके चल रहे सात लोन को बंद कराने और 15 लाख रुपये लोन जारी करने की हामी भरी। इसके लिए कंपनी ने उनसे 5900 रुपये प्रोसेसिंग फीस मांगी। उपभोक्ता ने लोन संबंधी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद लोन कंपनी में कागज जमा किए। इस पर कंपनी ने 15 लाख का लोन होने की बात कही। बताया कि इसकी ईएमआई 19907 रुपये होगी। काफी दिनों तक लोन का पैसा नहीं मिला तो कंपनी के प्रबंधक से संपर्क किया गया। जहां उनसे मकान का गिफ्ट डीड बनाकर मांगा गया। इस पर उन्होंने इनकार किया। कंपनी से प्रोसेसिंग फीस वापस मांगी तो कंपनी ने प्रोसेसिंग फीस नहीं दिया। दोबारा गिफ्ट डीड की डिमांड की। इसके बाद उन्होंने इसकी प्रक्रिया भी पूरी की। इसके बाद पता चला कि उनका लोन 12 लाख 940 रुपये का ही हुआ था। इसमें कंपनी ने उन्हें केवल छह लाख 83 हजार का चेक दिया। वहीं, वार्षिक ब्याज भी 12.13 फीसदी से 18.5 फीसदी किया गया। शिकायत के बाद आयोग ने लोन कंपनी के प्रबंधक को नोटिस जारी किया। आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार व सदस्य दिप्ती श्रीवास्तव व विजय बहादुर सिंह की पीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए लोन कंपनी की दलील को खारिज कर दिया। आदेश दिया कि कंपनी द्वारा जारी किए गए 6. 83 लाख रुपये पर ही निर्धारित ब्याज का आगणन करके धनराशि को लोन खाते में समायोजित किया। वहीं, अगर शेष धनराशि बचती है तो उसे पीड़ित को वापस किया जाए। इसके अलावा लोन की वास्तविक धनराशि में कोई धनराशि देय होती है तो अधिक ली गई ईएमआई को उसमें समायोजित करने के बाद अवशेष राशि पीड़ित से प्राप्त लोन अकाउंट समाप्त करें। चेताया कि अगर आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो दी गई लोन की धनराशि समाप्त कर दी जाएगी। कोर्ट ने क्षतिपूर्ति के 25 हजार और वाद व्यय 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया।