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Bijnor News: आम आदमी हुआ चौकन्ना, साइबर ठगों के जाल में फंस रहे ‘अक्लमंद’
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बिजनौर। जागरुकता अभियानों के संदेश को आम आदमी समझकर चौकन्ना हो चुका है, मगर अक्लमंद और नौकरीपेशा लोगों को साइबर ठगों की चाल नहीं समझ आ रही। वे निवेश के नाम पर बिछाए गए जाल में फंसकर मोटी रकम गंवा रहे हैं।
साइबर ठगी मौजूदा दौर में अपराध का नया रूप है। साइबर अपराधियों से बचने के लिए पुलिस अभियान भी चलाती है, मगर कहीं नासमझी तो कहीं मोटा मुनाफा कमाने का लालच साइबर अपराधियों का शिकार बना रहा है। जिले में ताजा मामला इंडियन ऑयल के प्रबंधक से 38 लाख ठगी का सामने आया है। यह केस पहला नहीं है, पहले भी रिटायर्ड अफसर या खूब पढ़े लिखे नौकरीपेशा भी ठगे जा चुके हैं।
n केस नंबर एक : फरवरी माह में बीएसएनएल के रिटायर्ड अफसर तीन मिनट में नेट बैंकिंग की सुविधा के फर्जी विज्ञापन के जरिए साइबर ठगों के जाल में फंस गए थे। ठगों ने उनके खातों से पांच लाख 40 हजार रुपये उड़ा लिए। हालांकि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करते हुए ढाई लाख रुपये होल्ड करा दिए थे।
n केस नवंबर दो : दिसंबर 2025 में नांगलसोती निवासी सराफा कारोबारी से बैंक का सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने के नाम पर साइबर ठगों ने लाखों रुपये की ठगी कर ली थी। ठगों ने व्हाट्सएप कॉल करके उनसे आधार कार्ड व पेन कार्ड और डेबिट कार्ड के नंबर हासिल कर रकम उड़ा ली थी।
n नंबर तीन : नजीबाबाद निवासी एक मर्चेंट नेवी अफसर को टेलीग्राम चैनल पर निवेश की सलाह दी थी। शुरुआत में साइबर ठगों ने 25 हजार का लाभ दिखाया। बाद में अफसर ने करीब 12 लाख रुपये निवेश के लिए दे दिए। महीनों बाद ठगी का अहसास हुआ था।
n केस नंबर चार : कोतवाली देहात थाने के गांव लालपुर निवासी सेवानिवृत्त नेवी अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने एक मई को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि उन्हें ठगों ने एक व्हाट्सएप पर ग्रुप से जोड़ लिया, फिर बड़े लाभ का लालच उनसे दो करोड़ आठ लाख रुपये ठग लिए। हालांकि पुलिस ने इस मामले छह आरोपियों को पकड़ लिया था।
n केस नंबर पांच : नोएडा की मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करने वाली नजीबाबाद की एक युवती भी ठगी का शिकार हुई थी। निवेश करके मोटा मुनाफा कमाने की आड़ में 1.181 करोड़ की ठगी गई थी।
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साइबर ठगी मौजूदा दौर में अपराध का नया रूप है। साइबर अपराधियों से बचने के लिए पुलिस अभियान भी चलाती है, मगर कहीं नासमझी तो कहीं मोटा मुनाफा कमाने का लालच साइबर अपराधियों का शिकार बना रहा है। जिले में ताजा मामला इंडियन ऑयल के प्रबंधक से 38 लाख ठगी का सामने आया है। यह केस पहला नहीं है, पहले भी रिटायर्ड अफसर या खूब पढ़े लिखे नौकरीपेशा भी ठगे जा चुके हैं।
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n केस नंबर एक : फरवरी माह में बीएसएनएल के रिटायर्ड अफसर तीन मिनट में नेट बैंकिंग की सुविधा के फर्जी विज्ञापन के जरिए साइबर ठगों के जाल में फंस गए थे। ठगों ने उनके खातों से पांच लाख 40 हजार रुपये उड़ा लिए। हालांकि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करते हुए ढाई लाख रुपये होल्ड करा दिए थे।
n केस नवंबर दो : दिसंबर 2025 में नांगलसोती निवासी सराफा कारोबारी से बैंक का सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने के नाम पर साइबर ठगों ने लाखों रुपये की ठगी कर ली थी। ठगों ने व्हाट्सएप कॉल करके उनसे आधार कार्ड व पेन कार्ड और डेबिट कार्ड के नंबर हासिल कर रकम उड़ा ली थी।
n नंबर तीन : नजीबाबाद निवासी एक मर्चेंट नेवी अफसर को टेलीग्राम चैनल पर निवेश की सलाह दी थी। शुरुआत में साइबर ठगों ने 25 हजार का लाभ दिखाया। बाद में अफसर ने करीब 12 लाख रुपये निवेश के लिए दे दिए। महीनों बाद ठगी का अहसास हुआ था।
n केस नंबर चार : कोतवाली देहात थाने के गांव लालपुर निवासी सेवानिवृत्त नेवी अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने एक मई को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि उन्हें ठगों ने एक व्हाट्सएप पर ग्रुप से जोड़ लिया, फिर बड़े लाभ का लालच उनसे दो करोड़ आठ लाख रुपये ठग लिए। हालांकि पुलिस ने इस मामले छह आरोपियों को पकड़ लिया था।
n केस नंबर पांच : नोएडा की मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करने वाली नजीबाबाद की एक युवती भी ठगी का शिकार हुई थी। निवेश करके मोटा मुनाफा कमाने की आड़ में 1.181 करोड़ की ठगी गई थी।

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