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Bijnor News: डेंगू के सीजन में धोखा दे गई मशीन, प्लेटलेट्स को भटक रहे मरीज
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मेडिकल कॉलेज के रक्त केंद्र में खराब रखी प्लेटलेट एजिटेटर मशीन। संवाद
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अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। डेंगू का सीजन शुरू हो गया है। इन दिनों सामान्य बुखार आने पर भी मरीजों की प्लेटलेट्स कम हो रही हैं, मगर मेडिकल कॉलेज में प्लेटलेट्स स्टोर करने वाली मशीन 20 दिनों से बंद है। ऐसे में मरीज प्लेटलेट्स के लिए निजी रक्त केंद्रों की दौड़ लगा रहे हैं। उन्हें अधिक पैसा भी खर्च करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज रक्त केंद्र से हर साल 100 से ज्यादा मरीजों के लिए प्लेटलेट्स जाती हैं। इस साल जनवरी से 15 जुलाई तक 65 मरीजों को प्लेटलेट्स दी गई। इसके बाद स्टोर करने वाली प्लेटलेट एजिटेटर मशीन खराब हो गई। इस मशीन में प्लेटलेट्स को पांच दिन तक सुरक्षित रखा जाता है लेकिन मशीन खराब होने से प्लेटलेट्स स्टोर नहीं की जा रही हैं। रक्त केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि रोजाना चार यूनिट प्लेटलेट्स तैयार कर रहे हैं लेकिन इसे केवल 12 घंटे ही सुरक्षित रखा जा सकता है। ऐसे में मरीजों को समय से प्लेटलेट्स नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टोर इंचार्ज नीरज कुमार का कहना है कि इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। कंपनी के इंजीनियरों से भी बात की जा रही है।
वारंटी पीरियड के चार महीने बाद खराब हो गई मशीन
रक्त केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, प्लेटलेट एजिटेटर मशीन का कंपनी ने 21 मार्च 2023 का इंस्टॉलेशन किया था। मशीन तीन साल की वारंटी पीरियड में थी, लेकिन तीन साल पूरे होते ही जुलाई में मशीन खराब हो गई है। अब, रक्त केंद्र के अधिकारी कंपनी के इंजीनियरों से संपर्क साध रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में 300, प्राइवेट में दो से तीन हजार रुपये फीस
मेडिकल कॉलेज के रक्त केंद्र में निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों से प्लेटलेट्स की केवल 300 रुपये फीस ली जाती है, जबकि निजी रक्त केंद्रों में प्लेटलेट्स के नाम पर दो से तीन हजार रुपये तक लिए जाते हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में प्लेटलेट एजिटेटर मशीन खराब होने से मरीजों की जेब ढीली हो रही है।
रक्त केंद्र में पिछले साल ही शुरू हुई थी ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
रक्त केंद्र इंचार्ज जैसमीन ने बताया कि पिछले साल ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की शुरुआत हो गई थी। एक यूनिट खून से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, क्रायो अलग-अलग कर सकते हैं। इससे चार मरीजों को फायदा हो सकता है लेकिन फिलहाल प्लेटलेट्स स्टोर नहीं हो पा रही है। मरीजों के कहने पर प्लेटलेट्स अलग कर रहे हैं।
केस एक
बिजनौर निवासी अवनीश का बेटा एक निजी अस्पताल में भर्ती था। चिकित्सक ने प्लेटलेट्स की कमी बताई। मेडिकल कॉलेज प्लेटलेट्स लेने गया तो पता चला कि मशीन खराब है, तुरंत प्लेटलेट्स नहीं मिल सकती है। पांच घंटे पहले बताना होता है।
केस दो
नजीबाबाद निवासी राहुल का भाई निजी अस्पताल में बुखार की वजह से भर्ती था। जांच में प्लेटलेट्स कम आई। चिकित्सक की सलाह पर मेडिकल कॉलेज प्लेटलेट्स लेने पहुंचा तो वहां प्लेटलेट्स नहीं मिली। मशीन खराब होने की बात कहकर प्लेटलेट्स देने से मना कर दिया।
वर्जन::
रक्त केंद्र में प्लेटलेट्स स्टोर करने वाली मशीन खराब होने की कोई जानकारी नहीं है। जानकारी कर जल्द ही उचित कार्रवाई करेंगे। ....डॉ. बीआर त्यागी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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बिजनौर। डेंगू का सीजन शुरू हो गया है। इन दिनों सामान्य बुखार आने पर भी मरीजों की प्लेटलेट्स कम हो रही हैं, मगर मेडिकल कॉलेज में प्लेटलेट्स स्टोर करने वाली मशीन 20 दिनों से बंद है। ऐसे में मरीज प्लेटलेट्स के लिए निजी रक्त केंद्रों की दौड़ लगा रहे हैं। उन्हें अधिक पैसा भी खर्च करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज रक्त केंद्र से हर साल 100 से ज्यादा मरीजों के लिए प्लेटलेट्स जाती हैं। इस साल जनवरी से 15 जुलाई तक 65 मरीजों को प्लेटलेट्स दी गई। इसके बाद स्टोर करने वाली प्लेटलेट एजिटेटर मशीन खराब हो गई। इस मशीन में प्लेटलेट्स को पांच दिन तक सुरक्षित रखा जाता है लेकिन मशीन खराब होने से प्लेटलेट्स स्टोर नहीं की जा रही हैं। रक्त केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि रोजाना चार यूनिट प्लेटलेट्स तैयार कर रहे हैं लेकिन इसे केवल 12 घंटे ही सुरक्षित रखा जा सकता है। ऐसे में मरीजों को समय से प्लेटलेट्स नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टोर इंचार्ज नीरज कुमार का कहना है कि इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। कंपनी के इंजीनियरों से भी बात की जा रही है।
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वारंटी पीरियड के चार महीने बाद खराब हो गई मशीन
रक्त केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, प्लेटलेट एजिटेटर मशीन का कंपनी ने 21 मार्च 2023 का इंस्टॉलेशन किया था। मशीन तीन साल की वारंटी पीरियड में थी, लेकिन तीन साल पूरे होते ही जुलाई में मशीन खराब हो गई है। अब, रक्त केंद्र के अधिकारी कंपनी के इंजीनियरों से संपर्क साध रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में 300, प्राइवेट में दो से तीन हजार रुपये फीस
मेडिकल कॉलेज के रक्त केंद्र में निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों से प्लेटलेट्स की केवल 300 रुपये फीस ली जाती है, जबकि निजी रक्त केंद्रों में प्लेटलेट्स के नाम पर दो से तीन हजार रुपये तक लिए जाते हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में प्लेटलेट एजिटेटर मशीन खराब होने से मरीजों की जेब ढीली हो रही है।
रक्त केंद्र में पिछले साल ही शुरू हुई थी ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
रक्त केंद्र इंचार्ज जैसमीन ने बताया कि पिछले साल ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की शुरुआत हो गई थी। एक यूनिट खून से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, क्रायो अलग-अलग कर सकते हैं। इससे चार मरीजों को फायदा हो सकता है लेकिन फिलहाल प्लेटलेट्स स्टोर नहीं हो पा रही है। मरीजों के कहने पर प्लेटलेट्स अलग कर रहे हैं।
केस एक
बिजनौर निवासी अवनीश का बेटा एक निजी अस्पताल में भर्ती था। चिकित्सक ने प्लेटलेट्स की कमी बताई। मेडिकल कॉलेज प्लेटलेट्स लेने गया तो पता चला कि मशीन खराब है, तुरंत प्लेटलेट्स नहीं मिल सकती है। पांच घंटे पहले बताना होता है।
केस दो
नजीबाबाद निवासी राहुल का भाई निजी अस्पताल में बुखार की वजह से भर्ती था। जांच में प्लेटलेट्स कम आई। चिकित्सक की सलाह पर मेडिकल कॉलेज प्लेटलेट्स लेने पहुंचा तो वहां प्लेटलेट्स नहीं मिली। मशीन खराब होने की बात कहकर प्लेटलेट्स देने से मना कर दिया।
वर्जन::
रक्त केंद्र में प्लेटलेट्स स्टोर करने वाली मशीन खराब होने की कोई जानकारी नहीं है। जानकारी कर जल्द ही उचित कार्रवाई करेंगे। ....डॉ. बीआर त्यागी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर