{"_id":"6a062d3fe9579a36890f296f","slug":"flowers-of-income-bloomed-in-the-cultivation-of-thorns-bijnor-news-c-27-1-smrt1004-179532-2026-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bijnor News: कांटों की खेती में खिला दिए आमदनी के फूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bijnor News: कांटों की खेती में खिला दिए आमदनी के फूल
विज्ञापन
स्योहारा। कैक्टस के पौधों की देखते हुये अक्षत देवरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
धर्मेंद्र भुइयार
स्योहारा। लोग जहां खेती में पारंपरिक फसलों तक सीमित रहते हैं, वहीं स्योहारा कस्बे के युवा उद्यमी अक्षत देवरा ने कांटों वाले पौधों में सफलता की ऐसी कहानी लिख दी, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। वनस्पति विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी की उच्च शिक्षा प्राप्त अक्षत ने लाखों रुपये की नौकरी छोड़ अपने पैतृक नर्सरी व्यवसाय को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए कैक्टस और सकुलेंट्स की खेती को नया आयाम दिया। आज उनके फार्म में देश-विदेश की 100 से अधिक प्रजातियों के करीब डेढ़ लाख पौधे हैं और उनकी वार्षिक कमाई लगभग 20 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
स्टेशन सड़क स्थित डॉ. विनीत देवरा के पुत्र अक्षत देवरा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित रामजस कॉलेज से वनस्पति विज्ञान में बीएससी ऑनर्स तथा टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज से पादप जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान में एमएससी की पढ़ाई की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के साथ कार्य कर कृषि अनुसंधान का अनुभव प्राप्त किया। इसके अलावा देश की अग्रणी विधि फर्म लक्ष्मीकुमारण एंड श्रीधरण अटॉर्नीस में विषय विशेषज्ञ के रूप में भी कार्य किया।
अक्षत ने करीब 35 वर्षों से संचालित पैतृक देवरा नर्सरी एवं एग्रीकल्चर फार्म में कैक्टस और सकुलेंट्स की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग और दार्जिलिंग तथा उत्तराखंड के भीमताल जैसे क्षेत्रों का दौरा कर इन पौधों की उन्नत खेती और उत्पादन प्रणाली को करीब से समझा।
कृषि और वानिकी अनुभव का मिला लाभ
करीब दस वर्षों के कृषि एवं वानिकी अनुभव के आधार पर अक्षत ने क्रॉस परागण, स्व-परागण, वानस्पतिक प्रवर्धन और ग्राफ्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए कैक्टस की कई विशिष्ट किस्में विकसित कीं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से दुर्लभ प्रजातियां एकत्रित कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े कैक्टस फार्मों में से एक तैयार कर दिया। अक्षत ने करीब चार हजार वर्ग फीट क्षेत्रफल में आधुनिक पॉलीहाउस भी तैयार किया है, जिसे क्षेत्र का पहला बड़ा कैक्टस पॉलीहाउस माना जा रहा है।
महानगरों में हो रही आपूर्ति
कैक्टस और सकुलेंट्स की बढ़ती मांग के चलते अब उनके फार्म से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों तक पौधों की आपूर्ति की जा रही है। अक्षत का सपना उत्तर प्रदेश का पहला ऑनलाइन वन स्टॉप गार्डनिंग प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां लोगों को घर बैठे दुर्लभ पौधों के साथ खाद, गमले और बागवानी से जुड़ी सभी सामग्री उपलब्ध हो सके।
50 रुपये से लेकर पांच हजार कीमत वाले पौधे
अक्षत के कैक्टस फार्म में देश-विदेश की 100 से अधिक प्रजातियों के करीब 1.50 लाख पौधे मौजूद हैं। यहां 50 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक कीमत वाले पौधे उपलब्ध हैं। ईस्टर कैक्टस, ओल्ड लेडी कैक्टस, बनी ईयर कैक्टस, एकिनोप्सिस कैक्टस और जिम्नो कैक्टस जैसी दुर्लभ प्रजातियां लोगों को खासा आकर्षित कर रही हैं।
Trending Videos
स्योहारा। लोग जहां खेती में पारंपरिक फसलों तक सीमित रहते हैं, वहीं स्योहारा कस्बे के युवा उद्यमी अक्षत देवरा ने कांटों वाले पौधों में सफलता की ऐसी कहानी लिख दी, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। वनस्पति विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी की उच्च शिक्षा प्राप्त अक्षत ने लाखों रुपये की नौकरी छोड़ अपने पैतृक नर्सरी व्यवसाय को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए कैक्टस और सकुलेंट्स की खेती को नया आयाम दिया। आज उनके फार्म में देश-विदेश की 100 से अधिक प्रजातियों के करीब डेढ़ लाख पौधे हैं और उनकी वार्षिक कमाई लगभग 20 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
स्टेशन सड़क स्थित डॉ. विनीत देवरा के पुत्र अक्षत देवरा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित रामजस कॉलेज से वनस्पति विज्ञान में बीएससी ऑनर्स तथा टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज से पादप जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान में एमएससी की पढ़ाई की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के साथ कार्य कर कृषि अनुसंधान का अनुभव प्राप्त किया। इसके अलावा देश की अग्रणी विधि फर्म लक्ष्मीकुमारण एंड श्रीधरण अटॉर्नीस में विषय विशेषज्ञ के रूप में भी कार्य किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
अक्षत ने करीब 35 वर्षों से संचालित पैतृक देवरा नर्सरी एवं एग्रीकल्चर फार्म में कैक्टस और सकुलेंट्स की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग और दार्जिलिंग तथा उत्तराखंड के भीमताल जैसे क्षेत्रों का दौरा कर इन पौधों की उन्नत खेती और उत्पादन प्रणाली को करीब से समझा।
कृषि और वानिकी अनुभव का मिला लाभ
करीब दस वर्षों के कृषि एवं वानिकी अनुभव के आधार पर अक्षत ने क्रॉस परागण, स्व-परागण, वानस्पतिक प्रवर्धन और ग्राफ्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए कैक्टस की कई विशिष्ट किस्में विकसित कीं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से दुर्लभ प्रजातियां एकत्रित कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े कैक्टस फार्मों में से एक तैयार कर दिया। अक्षत ने करीब चार हजार वर्ग फीट क्षेत्रफल में आधुनिक पॉलीहाउस भी तैयार किया है, जिसे क्षेत्र का पहला बड़ा कैक्टस पॉलीहाउस माना जा रहा है।
महानगरों में हो रही आपूर्ति
कैक्टस और सकुलेंट्स की बढ़ती मांग के चलते अब उनके फार्म से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों तक पौधों की आपूर्ति की जा रही है। अक्षत का सपना उत्तर प्रदेश का पहला ऑनलाइन वन स्टॉप गार्डनिंग प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां लोगों को घर बैठे दुर्लभ पौधों के साथ खाद, गमले और बागवानी से जुड़ी सभी सामग्री उपलब्ध हो सके।
50 रुपये से लेकर पांच हजार कीमत वाले पौधे
अक्षत के कैक्टस फार्म में देश-विदेश की 100 से अधिक प्रजातियों के करीब 1.50 लाख पौधे मौजूद हैं। यहां 50 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक कीमत वाले पौधे उपलब्ध हैं। ईस्टर कैक्टस, ओल्ड लेडी कैक्टस, बनी ईयर कैक्टस, एकिनोप्सिस कैक्टस और जिम्नो कैक्टस जैसी दुर्लभ प्रजातियां लोगों को खासा आकर्षित कर रही हैं।