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Bijnor News: जंगल से निकला गुलदार और आठ ब्लॉक में फैला दी दहशत
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वन विभाग ने गुलदार गणना के लिए तैयार की रिपोर्ट
-जिले के आठ ब्लॉक के 190 गांव गुलदार के लिए संवेदनशील
-आंकड़े दे रहे गवाही, लगातार बढ़ रही गुलदार की संख्या
नंबर गेम -1000 से ज्यादा गुलदार गन्ने के खेतों में होने का अनुमान
-36 इंसानों की जान साढ़े तीन साल में ले चुका गुलदार
-08 ब्लॉक जिले के गुलदार को लेकर संवेदनशील घोषित
-190 गांव जिले के संवेदनशील श्रेणी में हो चुके हैं शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। चार साल पहले अफजलगढ़ क्षेत्र से शुरू हुई गुलदार की दहशत अब पूरे जिले में फैल चुकी है। एक या दो नहीं, अब गुलदार के लिए जिले के आठ ब्लॉक के 190 गांव संवेदनशील घोषित हो चुके हैं। वन विभाग ने गुलदार गणना के लिए रिपोर्ट तैयार की तो यह हकीकत सामने आई। वहीं अभी तक गन्ने के खेतों में एक हजार से ज्यादा गुलदार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
चार साल पहले तक बिजनौर जिले में गुलदार केवल अफजलगढ़ ब्लॉक में ही अपनी दस्तक देते थे। माना जाता था कि अमानगढ़ से बाहर आए गुलदार वहां हमले करते हैं। कोरोना काल के बीच वर्ष 2023 में गुलदार की संख्या जिले में बढ़ गई। अफजलगढ़ और नगीना क्षेत्र में गुलदार के हमलों में इस साल 17 लोगों की जान चली गई। यह आंकड़ा हर साल बढ़ता गया और तब से अब तक 36 लोग जिले में गुलदार के हमलों में जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक वन विभाग के पास गुलदार की सही संख्या नहीं है। ऐसे में अब इनकी गणना कराने की तैयारी चल रही है। इसके लिए वन विभाग ने जिले में गुलदार की मौजूदगी को लेकर रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के अनुसार जिले के आठ ब्लॉक के 190 गांव गुलदार को लेकर संवेदनशील घोषित हो चुके हैं। वन विभाग की रिपोर्ट बता रही है कि इस समय जिले के लगभग हर हिस्से में गुलदार पहुंच चुके हैं।
महिला और बच्चे बने सबसे ज्यादा शिकार
पिछले साढ़े तीन साल में जिले के गुलदार के व्यवहार पर लगातार शोध हुए। विशेषज्ञों ने गुलदार के हमलों के पैटर्न पर काम किया तो हमले की प्रकृति भी देखी। इसके बाद आंकड़ों के आधार पर बताया कि गुलदार शाम के समय सबसे अधिक हमले करता है। वहीं इनके हमलों में मरने वाले 80 प्रतिशत महिला और बच्चे ही हैं। ऐसे में जिलेभर में एडवाइजरी जारी हुई कि बच्चों को जंगल में न ले जाया जाए।
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अब तक गुलदार के हमलों में इंसानों की मौत
वर्ष मौत घायल
2023 17 14
2024 08 16
2025 06 20
2026 02 02
नोट: तीन इंसानों की मौत कालागढ़ क्षेत्र में हुई, जिन्हें वन विभाग उत्तराखंड में मानता है
साढ़े तीन साल में पकड़े गए गुलदार और कितनों की मौत हुई
वर्ष पकड़े गए मारे गए
2022 10 16
2023 25 12
2024 28 28
2025 36 28
2026 26 16
नोट: यह आंकड़े वन विभाग से लिए गए हैं
--
वर्जन
जल्द ही गुलदार की गणना कराई जाएगी। यह गणना अगले दो माह में पूरी होने की संभावना है। इसके बाद गुलदार नियंत्रण के लिए मजबूत योजना तैयार की जाएगी। जिले में गुलदार पकड़ने के लिए 200 से ज्यादा पिंजरे लगाए अलग-अलग जगहों पर लगे हैं।
-जय सिंह कुशवाह, डीएफओ बिजनौर
बिजनौर के गुलदार का बदलता व्यवहार
-अब तीन से पांच साल के गुलदार भी हमलावर हो रहे हैं
-पिंजरे में बकरी की जगह मुर्गे बांधने पर सबसे ज्यादा गुलदार पकड़े गए
-आबादी के पास गुलदार घूमने लगे हैं, जबकि पहले दूर रहते थे
-अब पूरे साल गन्ने के खेतों में गुलदार के शावक मिल रहे हैं
-अकेले रहने वाले गुलदार अब दो से तीन तक की संख्या में एक साथ दिख जाते हैं
-जिले के आठ ब्लॉक के 190 गांव गुलदार के लिए संवेदनशील
-आंकड़े दे रहे गवाही, लगातार बढ़ रही गुलदार की संख्या
नंबर गेम -1000 से ज्यादा गुलदार गन्ने के खेतों में होने का अनुमान
-36 इंसानों की जान साढ़े तीन साल में ले चुका गुलदार
-08 ब्लॉक जिले के गुलदार को लेकर संवेदनशील घोषित
-190 गांव जिले के संवेदनशील श्रेणी में हो चुके हैं शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। चार साल पहले अफजलगढ़ क्षेत्र से शुरू हुई गुलदार की दहशत अब पूरे जिले में फैल चुकी है। एक या दो नहीं, अब गुलदार के लिए जिले के आठ ब्लॉक के 190 गांव संवेदनशील घोषित हो चुके हैं। वन विभाग ने गुलदार गणना के लिए रिपोर्ट तैयार की तो यह हकीकत सामने आई। वहीं अभी तक गन्ने के खेतों में एक हजार से ज्यादा गुलदार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
चार साल पहले तक बिजनौर जिले में गुलदार केवल अफजलगढ़ ब्लॉक में ही अपनी दस्तक देते थे। माना जाता था कि अमानगढ़ से बाहर आए गुलदार वहां हमले करते हैं। कोरोना काल के बीच वर्ष 2023 में गुलदार की संख्या जिले में बढ़ गई। अफजलगढ़ और नगीना क्षेत्र में गुलदार के हमलों में इस साल 17 लोगों की जान चली गई। यह आंकड़ा हर साल बढ़ता गया और तब से अब तक 36 लोग जिले में गुलदार के हमलों में जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक वन विभाग के पास गुलदार की सही संख्या नहीं है। ऐसे में अब इनकी गणना कराने की तैयारी चल रही है। इसके लिए वन विभाग ने जिले में गुलदार की मौजूदगी को लेकर रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के अनुसार जिले के आठ ब्लॉक के 190 गांव गुलदार को लेकर संवेदनशील घोषित हो चुके हैं। वन विभाग की रिपोर्ट बता रही है कि इस समय जिले के लगभग हर हिस्से में गुलदार पहुंच चुके हैं।
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महिला और बच्चे बने सबसे ज्यादा शिकार
पिछले साढ़े तीन साल में जिले के गुलदार के व्यवहार पर लगातार शोध हुए। विशेषज्ञों ने गुलदार के हमलों के पैटर्न पर काम किया तो हमले की प्रकृति भी देखी। इसके बाद आंकड़ों के आधार पर बताया कि गुलदार शाम के समय सबसे अधिक हमले करता है। वहीं इनके हमलों में मरने वाले 80 प्रतिशत महिला और बच्चे ही हैं। ऐसे में जिलेभर में एडवाइजरी जारी हुई कि बच्चों को जंगल में न ले जाया जाए।
अब तक गुलदार के हमलों में इंसानों की मौत
वर्ष मौत घायल
2023 17 14
2024 08 16
2025 06 20
2026 02 02
नोट: तीन इंसानों की मौत कालागढ़ क्षेत्र में हुई, जिन्हें वन विभाग उत्तराखंड में मानता है
साढ़े तीन साल में पकड़े गए गुलदार और कितनों की मौत हुई
वर्ष पकड़े गए मारे गए
2022 10 16
2023 25 12
2024 28 28
2025 36 28
2026 26 16
नोट: यह आंकड़े वन विभाग से लिए गए हैं
वर्जन
जल्द ही गुलदार की गणना कराई जाएगी। यह गणना अगले दो माह में पूरी होने की संभावना है। इसके बाद गुलदार नियंत्रण के लिए मजबूत योजना तैयार की जाएगी। जिले में गुलदार पकड़ने के लिए 200 से ज्यादा पिंजरे लगाए अलग-अलग जगहों पर लगे हैं।
-जय सिंह कुशवाह, डीएफओ बिजनौर
बिजनौर के गुलदार का बदलता व्यवहार
-अब तीन से पांच साल के गुलदार भी हमलावर हो रहे हैं
-पिंजरे में बकरी की जगह मुर्गे बांधने पर सबसे ज्यादा गुलदार पकड़े गए
-आबादी के पास गुलदार घूमने लगे हैं, जबकि पहले दूर रहते थे
-अब पूरे साल गन्ने के खेतों में गुलदार के शावक मिल रहे हैं
-अकेले रहने वाले गुलदार अब दो से तीन तक की संख्या में एक साथ दिख जाते हैं