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Bijnor News: मरीजों को विरासत में मिली हीमोफीलिया बीमारी, 35 लोग बीमार
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बिजनौर। हीमोफीलिया बीमारी आम नहीं है। यह बच्चों को उनके परिजनों से विरासत में मिलती है। बिजनौर भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनमें एक से अधिक लोग हीमोफीलिया से ग्रसित हैं। जिले में वर्तमान में 35 से अधिक लोग हीमोफीलिया बीमारी की चपेट में हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर इस बीमारी के इलाज की सुविधा नहीं है।
हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को रक्त बहना खुद शुरू हो जाता है और रक्त का थक्का नहीं जमता है। मरीजों में हीमोफीलिया फैक्टर आठ और फैक्टर नौ की कमी से होता है। साथ ही विटामिन ’के’ की कमी मरीज में रक्तस्राव की समस्या को बढ़ाती है। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. राजेश डाबरे ने बताया कि हीमोफीलिया एक अनुवांशिक बीमारी है, जो पुरुषों में दिखाई देती है। हीमोफीलिया से ग्रसित मरीज को अगर चोट लग जाए तो उसका खून का थक्का नहीं जमता है।
जिले में जिन बच्चों को यह समस्या है, उन्हें इलाज के अभाव में मेरठ, मुरादाबाद, दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है क्योंकि, बिजनौर में सरकारी अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में फैक्टर आठ और नौ का इंजेक्शन नहीं लगता है। किसी मरीज को महीने में एक बार तो किसी मरीज को सप्ताह में एक बार फैक्टर इंजेक्शन लगवाना पड़ता है।
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हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को रक्त बहना खुद शुरू हो जाता है और रक्त का थक्का नहीं जमता है। मरीजों में हीमोफीलिया फैक्टर आठ और फैक्टर नौ की कमी से होता है। साथ ही विटामिन ’के’ की कमी मरीज में रक्तस्राव की समस्या को बढ़ाती है। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. राजेश डाबरे ने बताया कि हीमोफीलिया एक अनुवांशिक बीमारी है, जो पुरुषों में दिखाई देती है। हीमोफीलिया से ग्रसित मरीज को अगर चोट लग जाए तो उसका खून का थक्का नहीं जमता है।
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जिले में जिन बच्चों को यह समस्या है, उन्हें इलाज के अभाव में मेरठ, मुरादाबाद, दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है क्योंकि, बिजनौर में सरकारी अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में फैक्टर आठ और नौ का इंजेक्शन नहीं लगता है। किसी मरीज को महीने में एक बार तो किसी मरीज को सप्ताह में एक बार फैक्टर इंजेक्शन लगवाना पड़ता है।

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