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रमजान: कल पढ़ी जाएगी अलविदा जुमा की नमाज, जानें अगर 30 रोजे हुए तो क्या होगा, कब मनाया जाएगा ईद का त्योहार
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Thu, 12 Mar 2026 07:44 PM IST
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सार
Meerut News: रमजान माह के अलविदा जुमा की नमाज 13 मार्च को अदा की जाएगी। अगर 30 रोजे पूरे होते हैं तो अगले सप्ताह 20 मार्च को फिर से अलविदा जुमा की नमाज पढ़ी जाएगी। ऐसे में शनिवार 21 मार्च को ईद का त्योहार मनाया जा सकता है। हालांकि ये सब चांद दिखने के ऊपर निर्भर होगा।
रमजान
- फोटो : adobestock
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विस्तार
रमजान के पाक महीने में अलविदा जुमा की नमाज शुक्रवार को अदा की जाएगी। मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बिजनौर समेत सभी पूरे वेस्ट यूपी की मस्जिदों में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वहीं पुलिस-प्रशासन के साथ ही जिम्मेदार लोगों ने भी अपील की है कि मस्जिदों के अंदर ही नमाज पढ़ी जाए।
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मेरठ के शहर काजी प्रोफेसर जैनुस सालिकीन सिद्दीकी ने बताया कि रमजान के 23वें रोजे को अलविदा जुमा की नमाज सभी मस्जिदों में पूरे खुलूस के साथ अदा की जाएगी। नमाज से पहले खुतबा होगा और उसके बाद दो रकआत फर्ज नमाज अदा की जाएगी। नमाज के बाद देश और दुनिया में अमन चैन की दुआ की जाएगी।
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शहर काजी ने बताया कि अगर इस बार रमजान के 29 रोजे होते हैं, तो अगले जुमे को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा। अगर 30 रोजे मुकम्मल होते हैं, तो अगले जुमे को फिर से अलविदा जुमा की नमाज होगी, जो कि अल्लाह की तरफ से इनाम होगा। ऐसे में अगले शनिवार को ईद का त्योहार मनाया जाएगा।
मस्जिदों के अंदर नमाज पढ़ें
शहर काजी ने प्रोफेसर जैनुस सालिकीन सिद्दीकी अपील करते हुए कहा कि पुलिस-प्रशासन ने मस्जिदों के अंदर ही नमाज अदा करने को कहा है। ऐसे में सभी मुसलमान एहतियात और सब्र से काम लेते हुए मस्जिदों में ही नमाज पढ़ें। अगर कहीं ज्यादा नमाजी हो जाएं, तो दूसरी जमात में नमाज का एहतेमाम किया जाए।
शहर काजी ने प्रोफेसर जैनुस सालिकीन सिद्दीकी अपील करते हुए कहा कि पुलिस-प्रशासन ने मस्जिदों के अंदर ही नमाज अदा करने को कहा है। ऐसे में सभी मुसलमान एहतियात और सब्र से काम लेते हुए मस्जिदों में ही नमाज पढ़ें। अगर कहीं ज्यादा नमाजी हो जाएं, तो दूसरी जमात में नमाज का एहतेमाम किया जाए।
... जब अलविदा जुमा की नमाज पढ़ने दिल्ली जामा मस्जिद जाते थे मेरठ के लोग
ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के अध्यक्ष कारी शफीकुर्रहमान ने बताया कि अलविदा जुमा रमजान उल मुबारक का आखिरी जुमा होता है, इसकी अहमियत बहुत ज्यादा होती है। करीब 50 साल पहले मेरठ और आसपास के जिलों के लोग अलविदा जुमा की नमाज पढ़ने के लिए खास तौर से दिल्ली की जामा मस्जिद में जाते थे। वहीं मेरठ के गांवों के लोग अलविदा जुमा से एक दिन पहले ही बुग्गी-तांगों में बैठकर शहर की शाही ईदगाह में आ जाते थे। यहीं पर अपने तंबू लगा लेते थे और अलविदा जुमा की नमाज अदा करने के बाद अपने गांवों को लौटते थे।
कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि हमने प्रशासन से अपील की थी कि रमजान के बाकी बचे दिनों में मस्जिदों में सहरी और इफ्तार के वक्त लाउडस्पीकर की इजाजत दी जाए, मगर वह नहीं मिल पाई है। ऐसे में मौजूदा इंतजामात के मुताबिक काम करते हुए इबादत करें।
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ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के अध्यक्ष कारी शफीकुर्रहमान ने बताया कि अलविदा जुमा रमजान उल मुबारक का आखिरी जुमा होता है, इसकी अहमियत बहुत ज्यादा होती है। करीब 50 साल पहले मेरठ और आसपास के जिलों के लोग अलविदा जुमा की नमाज पढ़ने के लिए खास तौर से दिल्ली की जामा मस्जिद में जाते थे। वहीं मेरठ के गांवों के लोग अलविदा जुमा से एक दिन पहले ही बुग्गी-तांगों में बैठकर शहर की शाही ईदगाह में आ जाते थे। यहीं पर अपने तंबू लगा लेते थे और अलविदा जुमा की नमाज अदा करने के बाद अपने गांवों को लौटते थे।
कारी शफीकुर्रहमान ने कहा कि हमने प्रशासन से अपील की थी कि रमजान के बाकी बचे दिनों में मस्जिदों में सहरी और इफ्तार के वक्त लाउडस्पीकर की इजाजत दी जाए, मगर वह नहीं मिल पाई है। ऐसे में मौजूदा इंतजामात के मुताबिक काम करते हुए इबादत करें।
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