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Bijnor News: डेढ़ साल से बिना पंजीकरण चल रहा था अस्पताल
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नगीना। धामपुर मार्ग पर स्थित शिवालय हेल्थ केयर सेंटर के संचालक राजकुमार की बृहस्पतिवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस क्लीनिक को लेकर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पिछले डेढ़ साल से अस्पताल बिना पंजीकरण और अप्रशिक्षित चिकित्सक के सहारे चल रहा था। वहीं, तहसील के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद देशवाल भी अस्पताल पंजीकरण के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाए।
शिवालय हेल्थ केयर सेंटर के फ्लेक्सी बोर्ड पर संचालक राजकुमार के नाम से पहले चिकित्सक के पद पर (एमडी) बाल रोग विशेषज्ञ लिखा हुआ है। जबकि, इसी अस्पताल में लगे दूसरे फ्लेक्सी बोर्ड पर एमडी की फुल फॉर्म मैनेजिंग डायरेक्टर अंकित है। डिग्री व अस्पताल के पंजीकरण के संबंध में फ्लेक्सी बोर्ड पर कोई उल्लेख नहीं है। इससे साफ है कि राजकुमार सिर्फ इस अस्पताल के प्रबंध निदेशक थे। हालांकि, मरीजों व आम लोगों को गुमराह करने के लिए ही एमडी शब्द का इस्तेमाल किया गया। क्योंकि डॉक्टर के नाम के आगे एमडी का मतलब आमतौर पर डॉक्टर ऑफ मेडिसिन होता है। क्षेत्र में काफी संख्या में अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
संविदा पर कार्यरत डॉक्टर का नाम भी फ्लेक्सी बोर्ड पर अंकित
क्लीनिक के फ्लेक्सी बोर्ड में दो अन्य चिकित्सक डॉ. शिवम त्रिपाठी (बीएएमएस), डॉ. आशीष अहलावत (एमबीबीएस) अंकित हैं। डॉ. आशीष अहलावत नाम का चिकित्सक संविदा पर पुरैनी पीएचसी में भी तैनात है। नगीना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विशाल दिवाकर का कहना है कि संविदा चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकता है लेकिन उस क्लीनिक का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण अनिवार्य है।
अस्पताल में बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था
अस्पताल में प्रतिदिन पांच से 10 लोग अपने बच्चों का इलाज कराने अस्पताल में आते थे। अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए सात इनक्यूबेटर मशीन भी रखी हुई है। इनका इस्तेमाल नवजात कमजोर बच्चों को रखने के लिए किया जाता है। वहीं, अस्पताल में बच्चों को भर्ती करने के लिए भी करीब आधा दर्जन बेड की व्यवस्था भी है। चिकित्सक की डिग्री को लेकर अलग-अलग चर्चा है। कोई बीएएमएस, एनआईसीयू डिप्लोमा, तो कोई जेएनएम की डिग्री होने की बात बात कह रहा है।
नगीना में संचालित शिवालय हेल्थ केयर सेंटर कार्यालय में पंजीकृत नहीं है। क्लीनिक के फ्लेक्सी बोर्ड पर जिस संविदा डॉक्टर का नाम अंकित है। उसकी जांच कराई जाएगी। ....डॉ. कौशलेंद्र सिंह, सीएमओ, बिजनौर
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शिवालय हेल्थ केयर सेंटर के फ्लेक्सी बोर्ड पर संचालक राजकुमार के नाम से पहले चिकित्सक के पद पर (एमडी) बाल रोग विशेषज्ञ लिखा हुआ है। जबकि, इसी अस्पताल में लगे दूसरे फ्लेक्सी बोर्ड पर एमडी की फुल फॉर्म मैनेजिंग डायरेक्टर अंकित है। डिग्री व अस्पताल के पंजीकरण के संबंध में फ्लेक्सी बोर्ड पर कोई उल्लेख नहीं है। इससे साफ है कि राजकुमार सिर्फ इस अस्पताल के प्रबंध निदेशक थे। हालांकि, मरीजों व आम लोगों को गुमराह करने के लिए ही एमडी शब्द का इस्तेमाल किया गया। क्योंकि डॉक्टर के नाम के आगे एमडी का मतलब आमतौर पर डॉक्टर ऑफ मेडिसिन होता है। क्षेत्र में काफी संख्या में अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
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संविदा पर कार्यरत डॉक्टर का नाम भी फ्लेक्सी बोर्ड पर अंकित
क्लीनिक के फ्लेक्सी बोर्ड में दो अन्य चिकित्सक डॉ. शिवम त्रिपाठी (बीएएमएस), डॉ. आशीष अहलावत (एमबीबीएस) अंकित हैं। डॉ. आशीष अहलावत नाम का चिकित्सक संविदा पर पुरैनी पीएचसी में भी तैनात है। नगीना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विशाल दिवाकर का कहना है कि संविदा चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकता है लेकिन उस क्लीनिक का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण अनिवार्य है।
अस्पताल में बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था
अस्पताल में प्रतिदिन पांच से 10 लोग अपने बच्चों का इलाज कराने अस्पताल में आते थे। अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए सात इनक्यूबेटर मशीन भी रखी हुई है। इनका इस्तेमाल नवजात कमजोर बच्चों को रखने के लिए किया जाता है। वहीं, अस्पताल में बच्चों को भर्ती करने के लिए भी करीब आधा दर्जन बेड की व्यवस्था भी है। चिकित्सक की डिग्री को लेकर अलग-अलग चर्चा है। कोई बीएएमएस, एनआईसीयू डिप्लोमा, तो कोई जेएनएम की डिग्री होने की बात बात कह रहा है।
नगीना में संचालित शिवालय हेल्थ केयर सेंटर कार्यालय में पंजीकृत नहीं है। क्लीनिक के फ्लेक्सी बोर्ड पर जिस संविदा डॉक्टर का नाम अंकित है। उसकी जांच कराई जाएगी। ....डॉ. कौशलेंद्र सिंह, सीएमओ, बिजनौर
