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UP News: बदायूं में तेरहवीं भोज में बने रायते का मामला पहुंचा लखनऊ, गांव के हालात पर शासन ने मांगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 29 Dec 2025 06:07 PM IST
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सार
बदायूं के गांव पिपरौल में तेरहवीं भोज में रायता खाने के बाद अब भी ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। अब तक चार सौ से अधिक ग्रामीण एंटी रेबीज वैक्सीन लगवा चुके हैं। वहीं रायते का मामला शासन तक पहुंच गया है। शासन ने ग्रामीणों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik.com
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विस्तार
बदायूं के उझानी क्षेत्र के गांव पिपरौल में रेबीज पीड़ित भैंस के दूध का दही बनाकर तेरहवीं भोज में बने रायते का मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। पिपरौल के हालात और ग्रामीणों की स्थिति को लेकर रिपोर्ट के जवाब में हालात सामान्य होने का दावा किया गया है, फिर भी तीसरे दिन कई महिला-पुरुष और बच्चे अस्पताल पहुंचे। 120 लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई।
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एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए सोमवार सुबह में ही कई महिला-पुरुष और उनके परिवार के बच्चे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में पहुंचे। उन्होंने पंजीकरण कराने के बाद वैक्सीन लगवाई। शाम तक 120 लोगों को वैक्सीन लगाई गई। गांव के ओमकार, सुनील कुमार और विजय ने बताया कि दहशत की वजह से उन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए आना पड़ा। इससे पहले करीब चार सौ लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं। गांव में अभी भी अफरातफरी का माहौल बना हुआ है।
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ग्रामीणों को दी गई यह सलाह
वैक्सीन लगवाने अस्पताल आए लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों ने किसी तरह की दहशत में नहीं आने की सलाह दी। उन्हें बताया गया कि पहले ही साफ हो चुका है कि भैंस को कुत्ते ने नहीं काटा था। पशुपालक भी जानकारी स्पष्ट कर चुके हैं। इधर, पिपरौल के हालात और ग्रामीणों की स्थिति से लेकर रेबीज पीड़ित भैंस के मामले में लखनऊ से रिपोर्ट मांगी गई। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा के जरिये चिकित्साधीक्षक के पास पत्र पहुंचा। चिकित्साधीक्षक डॉ सर्वेश कुमार ने बताया कि शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। दरअसल, दूध के जरिये किसी के शरीर में रेबीज नहीं पहुंचता। भैंस भले ही रैबीज पीड़ित हो, लेकिन उसकी लार के संपर्क में आने से रेबीज फैलता है।
ग्रामीण बोले- पिपरौल में कराएं वैक्सीन की व्यवस्था
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में वैक्सीन लगवाने पहुंचे लोगों में वेदराम साहू ने बताया कि उनके कुनबे में करीब 25 लोग है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सभी लोग वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं। इसी तरह कई और परिवार हैं, जिनके सदस्यों की संख्या कम नहीं है। ग्रामीणों की सहूलियत के लिए पिपरौल में ही कैंप लगाकर वैक्सीन लगाई जाए।
वैक्सीन लगवाने अस्पताल आए लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों ने किसी तरह की दहशत में नहीं आने की सलाह दी। उन्हें बताया गया कि पहले ही साफ हो चुका है कि भैंस को कुत्ते ने नहीं काटा था। पशुपालक भी जानकारी स्पष्ट कर चुके हैं। इधर, पिपरौल के हालात और ग्रामीणों की स्थिति से लेकर रेबीज पीड़ित भैंस के मामले में लखनऊ से रिपोर्ट मांगी गई। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा के जरिये चिकित्साधीक्षक के पास पत्र पहुंचा। चिकित्साधीक्षक डॉ सर्वेश कुमार ने बताया कि शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। दरअसल, दूध के जरिये किसी के शरीर में रेबीज नहीं पहुंचता। भैंस भले ही रैबीज पीड़ित हो, लेकिन उसकी लार के संपर्क में आने से रेबीज फैलता है।
ग्रामीण बोले- पिपरौल में कराएं वैक्सीन की व्यवस्था
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में वैक्सीन लगवाने पहुंचे लोगों में वेदराम साहू ने बताया कि उनके कुनबे में करीब 25 लोग है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सभी लोग वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं। इसी तरह कई और परिवार हैं, जिनके सदस्यों की संख्या कम नहीं है। ग्रामीणों की सहूलियत के लिए पिपरौल में ही कैंप लगाकर वैक्सीन लगाई जाए।