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नवजात की मौत का मामला: बदायूं में सीएचसी प्रभारी चला रहे थे अवैध अस्पताल, बहन कर रही थी संचालन, रिपोर्ट दर्ज

संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: Mukesh Kumar Updated Mon, 27 Apr 2026 04:14 PM IST
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सार

बदायूं के कादरचौक में एक निजी अस्पताल में प्रसूता के सीने पर बैठकर प्रसव कराया गया, जिससे उसके नवजात की मौत हो गई। जिस अस्पताल में यह घटना हुई, वह सीएचसी प्रभारी का निकला। उनकी बहन इस अस्पताल को संचालित कर रही थी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर सीएचसी प्रभारी और उनकी बहन समेत पांच आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। 

CHC In-charge Was Running Illegal Hospital his Sister Was Managing Operations FIR Registered in Budaun
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को किया सील - फोटो : संवाद
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विस्तार

बदायूं के कादरचौक में जिस निजी अस्पताल में महिला के सीने पर बैठकर प्रसव कराया गया, जिससे उसके बच्चे की मौत हो गई थी। वह अस्पताल सीएचसी प्रभारी का निकला। इस अस्पताल का संचालन सीएचसी प्रभारी की बहन कर रही थी। इससे यह साफ है कि जिले के स्वास्थ्य महकमे में किस तरह से खेल चल रहा है। जानकारी के बाद भी विभागीय जिम्मेदार आंख मूंदे हैं। इस मामले में पुलिस ने आरोपी सीएचसी प्रभारी, उसकी बहन समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है। आरोप है कि अवैध रूप से संचालित इस अस्पताल में गलत तरीके से प्रसव कराने के दौरान नवजात की मौत हो गई थी। 

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यह घटना 26 अप्रैल को सामने आई, जब कादरचौक थाना के गांव लल्सी नगला निवासी छोटेलाल की पत्नी कृष्णावती को प्रसव पीड़ा होने पर सुबह करीब सात बजे 108 एम्बुलेंस से सीएचसी कादरचौक लाया गया था। छोटेलाल का आरोप है कि सीएचसी पर मौजूद स्टाफ ने परिजनों को बिना स्पष्ट जानकारी दिए कृष्णावती को एक निजी राधिका अस्पताल भेज दिया। परिजनों को आश्वासन दिया गया कि जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहेंगे और बताया गया कि यह अस्पताल चिकित्साधिकारी प्रभारी अवधेश राठौर का है, जिसका संचालन उनकी बहन मोनिका राठौर करती हैं।
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तहरीर के अनुसार, निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला ने कथित तौर पर प्रसूता के पेट पर बैठकर दबाव डाला। इस गंभीर लापरवाही के कारण गर्भ में पल रहे नवजात की मौत हो गई। यह आरोप चिकित्सा मानकों का घोर उल्लंघन है और पूरे मामले को अत्यधिक संवेदनशील बना देता है। 

प्रसूता के पति ने लगाया ये आरोप 
पीड़ित छोटेलाल ने आरोप लगाया है कि निजी राधिका अस्पताल अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। सरकारी पद पर रहते हुए चिकित्साधिकारी प्रभारी अवधेश राठौर का इस निजी अस्पताल से सीधा संबंध होने का भी आरोप है। पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि सीएचसी कादरचौक का स्टाफ (जिसमें शशिलता और बबिता शामिल हैं) चिकित्साधिकारी प्रभारी की मिलीभगत से मरीजों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजता था। इस मामले में पुलिस ने चिकित्साधिकारी प्रभारी अवधेश राठौर उनकी बहन मोनिका राठौर, शशिलता, बबिता और एक अज्ञात महिला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। 

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल 
इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है, क्या बिना अनुमति निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, और क्या प्रसव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में चिकित्सा मानकों का पालन हो रहा है। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। 
 

सीएचसी प्रभारी की हो सकती है गिरफ्तारी
भले ही इस मामले को सामने आने के बाद सीएचसी कादरचौक प्रभारी का तबादला दूसरी जगह कर दिया गया हो लेकिन इससे उनकी समस्याएं कम नहीं होगी। अब उनके खिलाफ निलंबन के साथ ही गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जा सकती है। सीएमओ डॉ श्रीमोहन झा ने बताया कि निजी राधिका अस्पताल को सील कर दिया गया है। विभाग की टीम जांच कर रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

सीओ उझानी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में सीएचसी प्रभारी समेत पांच लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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